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The Intelligent Investor Book Summary in Hindi | द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर

The Intelligent Investor Book Summary in Hindi
Written by Himanshu Grewal

आज के इस लेख में इन्वेस्टमेंट और इन्वेस्टर के टॉपिक पर हम बात करेंगे जिसको हमने The Intelligent Investor Book Summary से लिया है तो चलिए शुरू करते हैं-

The Intelligent Investor Book Summary in Hindi

क्या आपको पता है कि इस दुनिया मे हम सभी लोग सिर्फ और सिर्फ चार तरीके से ही पैसे कमा सकते है,

  1. As a Employee ⇒ एक कर्मचारी के रूप में, जैसे – किसी भी बड़े से बड़े कंपनी का EMPLOYEE या सरकारी ऑफिस का कर्मचारी, एक दैनिक वेतन वाला मजदुर|
  2. As a Self Employed ⇒ एक खुद के छोटे ऑफिस या दुकान के मालिक के रूप में जैसे – दुकानदार, छोटा बिजनेसमैन या फिर डॉक्टर, वकील, CA.
  3. As a Businessman ⇒ एक बिज़नसमैन के रूप पे जैसे – एक बहुत बड़ी कंपनी का मालिक, जिसके पास एक ऐसा बिज़नस है जो सिस्टम पर काम करता है, और उसका मालिक वहा नहीं हो तो भी कंपनी बिलकुल सही तरह से काम करती है.
  4. As a Investor ⇒ एक निवेशक के रुप में जैसे – किसी भी तरह का निवेशक, जो किसी निवेश में पैसे लगाकर इनकम कमाता है|

आप चाहे कोई भी हो, आप इन चारो में से कोई एक हो सकते है, अगर आप पहले दो में से है, जैसा कि इस दुनिया के 90% लोग होते है, तो आप सिर्फ ACTIVE INCOME कमा रहे है, और अगर आप तीसरे और चौथे केटेगरी में आते है, तो आप बेशक बहुत अमीर आदमी है, क्योकि इस केटेगरी में लोग PASSIVE INCOME कमाते है.

ये लोग पैसे के लिए काम नहीं करते, बल्कि पैसा इनके लिए काम करता है|

अगर आप सच में अमीर बनना चाहते है, और फ़िलहाल अगर आप पैसे कमाने वाली पहली केटेगरी में है तो आपको अपनी चालू इनकम के साथ साथ एक निवेशक के रूप में भी INCOME कमाने के बारे में जरुर सोचना चाहिए, और ऐसा मुमकिन है एक तरीके से => इन्वेस्टमेंट करके|

कहने का अर्थ है कि आप एक इन्वेस्टर बन जाए, इससे आपके अमीर बनने की सम्भावना बढ़ जाती हैं|

हर चीज़ मुमकिन है लेकिन उसके लिए ज़रूरी है की चीज़े सही दिशा में भी हो, क्यूंकि कहते हैं ना – Hard work in the right direction is the key of success.

The Intelligent Investor Book Summary By Benjamin Graham

आज इस लेख में हम एक महान इन्वेस्टर – Mr. Benjamin Graham द्वारा लिखी हुई किताब “The intelligent Investor Book Summary” जानेंगे.

Mr. Benjamin Graham दुनिया के सबसे सफल इन्वेस्टर Warren Buffet के गुरु थे, जब वो 19 वर्ष के थे तब उन्होंने इस किताब को पढ़ा था और कहा था की यह किताब आज तक की इन्वेस्टर पर लिखी हुई सबसे अच्छी किताब है.

Warren Buffet ने और भी कई किताबे पढ़ी थी, और किताब के लेखक से वो बहुत Inspire भी होते थे|

एक बार जब उनको मालूम हुआ कि वो लेखक कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं तो उन्होंने वहा एडमिशन ले लिया, सिर्फ Mr. Benjamin Graham की वजह से|

Mr. Benjamin ने इन्वेस्टिंग को कुछ इस तरह से डिफाइन किया है-

“An investment operation is one which, upon thorough analysis, promises safety of principal and an adequate return. Operations not meeting these requirements are speculative.”

Investment वो है जो आपकी पूरी एनालिसिस के बाद आपकी प्रिंसिपल यानिकी आपकी इन्वेस्टमेंट को सेव रखती है, और आपको उसपर उचित Return देती है इसके अलावा जो भी है वो सट्टेवाज़ी है|

इन्वेस्टमेंट के इस डेफिनेशन में 3 पॉइंट है – Money Investment Tips in Hindi

  1. आपको कंपनी और उसके बिज़नस को अच्छी तरह से एनालिसिस करना चाहिए.
  2. आपको अपनी इन्वेस्टमेंट राशी को लोसिस से बचाना चाहिए.
  3. आपको इन्वेस्टमेंट पर उचित Return मिलने चाहिए.

तो दोस्तों हम युही किसी को इन्वेस्टर नहीं बोल सकते है| जो इस डेफिनिशन से इन्वेस्टिंग करते हैं उनको इन्वेस्टर कहा जाता है| अगर आप भी इन्वेस्टिंग करते है तो आपको सोचना चाहिए कि क्या आप इन्वेस्टिंग कर रहे हैं या फिर Speculating कर रहा हूँ.

यह दोनों दो अलग अलग चीज़े हैं इसलिए जब आप इन्वेस्टिंग कर रहे हैं तो सिर्फ उसके बारे में सोचे और जब Speculating कर रहे हैं तो स्पेकुलेशन के बारे में.

इन्वेस्टर बिज़नस के वैल्यू के अनुसार स्टॉक की वैल्यू निकालते हैं वही स्पेकुलेटर सोचते हैं कि शेयर प्राइज बढ़ जायेगी क्यूंकि कोई न कोई उस स्टॉक के लिए ज्यादा पैसे पे करेगा.

इंटेलीजेंट इन्वेस्टर शेयर प्राइज गिर रही है इसलिए कभी भी शेयर नहीं बेचते बल्कि चेक करते हैं कि कंपनी के बिज़नस की वैल्यू में कोई चेंज हुआ है क्या ?

Mr. Benjamin का अलग रूल है की इन्वेस्टर को कभी भी कंपनी का पास्ट देख कर कभी भी उनके फ्यूचर का अनुमान नहीं लगाना चाहिए.

जब सारे इन्वेस्टर को लगता है कि किसी स्टॉक में गारंटीड पैसा बनेगा तो वो उसे खरीदने लगते हैं, जिससे शेयर के प्राइज बढ़ कर और वैल्यूड हो जाते हैं.

इन्वेस्टर को पता होता है कि इन्वेस्टमेंट में सक्सेस के लिए उन्हें “Buy low sale high” का रूल फॉलो करना होगा, फिर भी वो इसका उल्टा कर बैठते हैं.

इन्वेस्टिंग में Generally यह माना जाता है कि आप जितने ज्यादा रिस्क लोगे उतने ही ज्यादा आपको Return भी मिलेंगे, लेकिन Mr. Benjamin ऐसा नहीं मानते है उनका कहना है कि Rate of Return इस बात पर निर्भर करता है कि इन्वेस्टर कितना Intelligent एफर्ट ले रहा है, और उसके लिए ज्यादा एनर्जी और समय लगता है.

Mr. Benjamin का अलग रूल है कि IPO में इन्वेस्ट करते वक़्त आपको ज्यादा केयरफुल रहना चाहिए, इसके पीछे दो वजह है-

  1. इनको ज्यादा ज़ोरों शोरो के साथ प्रमोट किया जाता है|
  2. इनको मार्किट में तब लाया जाता है जब मार्किट के रेट हाई होते है|

दोस्तों ऐसी कंडीशन कंपनी के लिए तो अच्छी होती है लेकिन इन्वेस्टर के लिए नहीं अच्छी साबित नहीं होती है| अगर आपने Observe किया हो तो दोस्तों US में 1968 – 69 में जब Bull Run चल रहा था तब 781 कंपनी के IPO आये थे.

  • 1974 में जब Bear Run चल रहा था तब सिर्फ 9 कंपनी के IPO आये थे|
  • 1975 में जब Bear Run चल रहा था तब सिर्फ 14 कंपनी के IPO आये थे|

तो इसलिए Intelligent investor को ऐसी सिचुएशन को अच्छे से परखना आना चाहिए.

IPO में शेयर के प्राइज Investment Bank निश्चित करती है वही वो कंपनी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने के बाद लोग Decide करते हैं| इसलिए जब Investment Bank शेयर के प्राइज निश्चित करती है तो उसमे बार्गेन मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है, वही लोगो के ग्रीड और फियर की वजह से सेकेंडरी मार्किट में बार्गेन Opportunity मिल जाती है.

बार्गेन क्या होता है – Benjamin Graham The Intelligent Investor in Hindi

जब किसी स्टॉक की वैल्यू उसके सेल्लिंग प्राइज से ज्यादा होती है तो उसको बार्गेन इशू बोलते हैं.

Mr. Graham का कहना है की कोई स्टॉक तब अच्छा होता है जब उसकी वैल्यू उसके selling price से 50% ज्यादा हो.

उदाहरण के लिए – मान लीजिये एक स्टॉक की कीमत 100 रुपया है तो वह अच्छा स्टॉक तभी कहलायेगा जब उसकी कीमत 150 रूपये या उससे ज्यादा हो जाए.

बार्गेन पता करने का एक और तरीका है – जब कोई स्टॉक उसके नेटवर्क कैपिटल से भी कम दाम पर सेल हो रहा हो तो वो एक अच्छा स्टॉक हो सकता है.

नेटवर्क कैपिटल का अर्थ है » Networking capital » Current Assets » Total Liabilities

जब आप किसी स्टॉक में इन्वेस्ट कर रहे हो तो आपको एनालिसिस करते वक़्त अपने दिमाग में यह बात रखनी चाहिए कि आप उस कंपनी को खरीदने जा रहे हैं|

इसलिए जब कंपनी के स्टॉक नेटवर्क कैपिटल से कम भाव में मिल रहे इसका अर्थ है कि आप कंपनी की बिल्डिंग और मशीनरी के लिए पे नहीं कर रहे हैं.

ज्यादातर इन्वेस्टर क्राउड को फॉलो करते हैं, इसलिए अगर कोई स्टॉक बार्गेन में मिल रहा है तो वो उससे भी दूर रहते हैं, क्यूंकि बाकी लोग उस स्टॉक में इन्वेस्ट नहीं करते हैं और जो स्टॉक आलरेडी बहुत ओवर वैल्यूड है उसमे इन्वेस्ट करते हैं क्यूंकि बाकी लोग उसमे इन्वेस्ट करते हैं|

जबकि इंटेलीजेंट इन्वेस्टर जब कोई स्टॉक अंडर वैल्यूड होता है तब उसे खरीद लेता है और जब वो बहुत ओवर वैल्यूड होता है तो उसको बेच देते हैं.

कुछ लोग समझते हैं कि जब किसी स्टॉक की वैल्यू बहुत बढ़ गई है तो वो स्टॉक ओवर वैल्यूड हो गया है और जब किसी स्टॉक की वैल्यू गिर गई है तो स्टॉक अंडर वैल्यूड हो गया है और इस तरह से वो मालूम करते हैं शेयर के प्राइज के बारे में.

जब कि शेयर की वैल्यू पता करने के लिए हमे उसके बिज़नस की वैल्यू पता करनी होगी| यानिकी बिज़नस के वैल्यू को उसके शेयर प्राइज से Compare करना होगा.

उनका अगला रूल है – Don’t try to time the market – The Intelligent Investor Book Summary

स्टॉक मार्किट में उतार चढ़ाव होता रहता है, और इन्वेस्टर इसका फायदा लेना चाहते हैं और इसी वजह से वो मार्किट को टाइम करने के कोशिश करते हैं|

यानिकी आने वाले टाइम में क्या होगा ये पता लगाने की कोशिश करते हैं| यदि उनको लगता है कि मार्किट ऊपर बढ़ेगा तो वो शेयर खरीद लेते हैं.

अगर आप अंदाज़ा लगाना शुरू कर देते हैं कि मार्किट ऊपर जायेगा या नीचे तो आप एक स्पेकुलेटर बन जाते हैं और इस चक्कर में कई लोगो ने बड़े-बड़े लोस्सेस भी उठाये हैं.

Brokerage Former analyst लगातार मार्किट को टाइम करने की कोशिश करते हैं क्यूंकि वो उनका बिज़नस है और उनको उसके लिए पैसे भी मिलते हैं| एक Intelligent Investor को कभी भी इसमें नहीं पड़ना चाहिए.

हर इन्वेस्टर को यह बात समझनी चाहिए की मार्किट में उतार चढाव होते रहते हैं और यह इन्वेस्टर को अच्छी Opportunity ढूंढने में मदद करते हैं.

चलिए एक उदाहरण की मदद से समझते हैं |

1929 में A & P अमेरिकन स्टॉक एक्सचेंज जिसका नाम अब न्यू योर्क स्टॉक एक्सचेंज हो गया है उसपर लिस्ट हुआ था, उसके बाद उसका स्टॉक प्राइज $494 तक पहुच गया.

1932 के ग्रेट डिप्रेशन की वजह से उसके स्टॉक क प्राइज गिरते-गिरते $104 पर पहुच गया और फिर 1936 में उसका शेयर प्राइज $34 पर आ गया.

उन दिनों पूरी कंपनी $126 मिलियन डॉलर में मिल रही थी, जबकि कंपनी के पास $85 मिलियन डॉलर तो सिर्फ कैश थी, और उस वक़्त कंपनी के पास $134 मिलियन डॉलर का वोर्किंग कैपिटल था.

A & P उस वक़्त अमेरिका की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी थी, और कंपनी का इम्प्रैशन भी बहुत अच्छा था फिर भी उन दिनों कंपनी $126 मिलियन डॉलर में मिल रही थी| इसके पीछे तीन ही कारण थे-

  1. बाते ऐसी चल रही थी कि कंपनी के मालिक पर स्पेशल टैक्स लग सकता है.
  2. कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल कम था.
  3. पूरा मार्किट ही डिप्रेस्ड था.

Mr Graham का कहना है कि पहला कारण सिर्फ एक डर था और दूसरा और तीसरा कारण कुछ समय के लिए ही है.

1936 में A & P के शेयर प्राइज $36 थे वही 1937 में $80 था और उसका प्राइज पर अर्निंग रेश्यो 12 था|

Mr Graham के अनुसार $80 पर भी A & P का स्टॉक मार्किट Attractive था|

अगर किसी इन्वेस्टर ने 1937 में A & P के शेयर $80 में ख़रीदे होते तो उसके प्राइज $36 होने पर भी उसके लिए कोई फर्क नहीं पड़ता क्यूंकि बिज़नस तब भी सेम था|

अगर उसके बाद पैसा और चाह होती तो वो $36 पर भी A & P के और शेयर खरीद लेता.

1939 में A & P की शेयर प्राइज $117 तक चली गई और 1961 में $705 हो गई और उसका प्राइज पर अर्निंग रेश्यो 30 हो गया.

उस वक़्त सभी के नजरो में A & P चढ़ा हुआ था और कोई भी उस Optimism को कोई Justification नहीं था| कंपनी के फाइनेंसियल कंडीशन तब खराब हो रहे थे स्टॉक ओवर वैल्यूड हो गया था फिर भी लोग उसपर Optimistic थे.

फिर 1962 में उसके शेयर प्राइज $340 हुए, पर $340 शेयर प्राइज 1937-38 जैसे बार्गेन प्राइज नहीं था|

बाद में A & P की शेयर प्राइज 1970 में गिर कर $180 हो गई| इसी तरह मार्किट में उतार चढ़ाव चलता रहता है.

1938 में $36 होने पर कोई उसका शेयर खरीदने को तैयार नहीं था, वही1960 में उसका शेयर प्राइज ओवर वैल्यूड होने के बावजूद लोग खरीदने को तैयार थे.

1961 की A & P 1938 की A & P से बड़ी कंपनी ज़रूर हुई थी, पर वो 1938 की A & P की तरह अच्छी तरह नहीं चलाई जा रही थी और वैल्यूएशन के हिसाब से उतनी Attractive भी नहीं थी.

दोस्तों इस स्टोरी से हमे सिख मिलती है कि शेयर प्राइज कई बार extremely ऊपर निचे हो जाते हैं, और इन्वेस्टर करेज दिखा कर और अलर्ट रह कर ऐसे Opportunity का फायदा ले सकते हैं| और दूसरी बात ये की ज्यादातर बिज़नस की क्वालिटी और करैक्टर लॉन्ग टर्म में बदलते हैं, इसलिए अपनी इन्वेस्टमेंट को Review करना ज़रूरी है.

Market फ्लक्चुएशन का फायदा आप कैसे ले सकते हैं, आइये एक और उदाहरण की मदद से समझते हैं.

मान लीजिये आपने किसी प्राइवेट बिज़नस का यानी जो बिज़नस स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं है उसका करीब $1000 खरीद लिया.

उस कंपनी में आपका एक पार्टनर है जिसका नाम है Mr Market है.

हर दिन वो आपको बताता है कि उसके अनुसार आपकी शेयर की वैल्यू कितनी है ?

इतना ही नहीं अगर आपको और शेयर खरीदने है तो वो आपको और शेयर खरीद के देगा और अगर आपको आपके शेयर बेचने है तो बेच के भी देगा.

Mr Market आपको जो बताता है वो बिज़नस डेवलपमेंट को देख कर कई बार आपको सही लगती है, वही कई बार बताई हुई वैल्यू आपको बहुत सिल्ली लगती है.

अगर आप एक सेंसिबल इन्वेस्टर हो तो आपको Mr Market जो डेली प्राइज बताते हैं आप उसी को उस शेयर की वैल्यू मानोगे?

अगर आप Mr Market की कोर्ट की हुई प्राइज से अग्री करते हो तो ही आप Mr Market की बताई हुई शेयर प्राइज के अनुसार बताई हुई शेयर प्राइज के बिज़नस की वैल्यू लगाओगे और बाकी टाइम उसकी बाते इगनोर करोगे.

अगर Mr Market आपको बहुत ज्यादा हाई प्राइज कोर्ट करता है तो आप ख़ुशी से अपने शेयर उस प्राइज पर बेच दोगे, और अगर बहुत कम प्राइज कोर्ट करता है तो आप ख़ुशी से उससे वो शेयर खरीद लोगे.

शेयर प्राइज में उतार चढाव – The Intelligent Investor Book Summary in Hindi

इन्वेस्टर को जब शेयर प्राइज घट जाती तो खरीदने का और जब प्राइज बढ़ जाती है तो शेयर बेचने का Opportunity देती है और बाकी टाइम वो इन्वेस्टर उस स्टॉक मार्किट पर ध्यान नहीं देते.

स्टॉक मार्किट आप्शन बेसिस पर चलता है, इसलिए फ्लक्चुएशन स्टॉक मार्किट का एक हिस्सा है, इनफैक्ट फ्लक्चुएशन स्टॉक मार्किट की ब्यूटी है.

अगर आप कंपनी के वैल्यू को देख कर कंपनी में इन्वेस्ट कर रहे हो, तो अगर शेयर प्राइज ज्यादा गिरती है तो आपको चिंता करने की ज़रुरत नहीं है, और अगर प्राइज बढ़ जाती है तो बहुत ज्यादा Excited होने की ज़रुरत नहीं है.

Mr Graham कहते हैं कि अगर कोई शेयर गिर रहा है तो सिर्फ इस वजह से उसको मत बेचो, और सिर्फ कोई शेयर बढ़ रहा तो उसे मत खरीदो.

दोस्तों आज का यह लेख अब यही पर समाप्त हो रहा है, अगर आप एक स्टॉक मार्किट में अभी प्रवेश कर रहे है तो आप पहले स्टॉक मार्किट को समझिए और फिर इस किताब को एक बार ज़रूर पढ़िए.

अगर आपको The Intelligent Investor Book Summary से सम्बंधित कुछ पूछना है तो आप कमेंट के माध्यम से पूछ सकते हो अथवा अगर आपको लेख पसंद आया हो तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करें|

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Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमे आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

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