सम्पूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता यथार्थ गीता – Shrimad Bhagwat Geeta

मेरा काफी समय से मन था कि मैं Shrimad Bhagwat Geeta से जुड़ा एक लेख अपनी वेबसाइट के माध्यम से आपके लिए लिखूँ और आपके साथ गीता से जुड़ा थोड़ा ज्ञान बाटूँ.

आज मैं आपको बताऊँगा कि प्रभु श्री कृष्ण ने महाभारत के अर्जुन को गीता से जुड़ा ज्ञान कब दिया था, इसके साथ ही मैं आपको गीता के 11 उपदेश (श्रीमद्भागवत गीता के उपदेश) भी इस लेख के माध्यम से आपके साथ शेयर करूंगा.

Shrimad Bhagwat Geeta in Hindi

नारायण जी ने प्रभु श्री कृष्ण का अवतार लेकर इस पृथ्वी पर जन्म लिया, और मनुष्य के बीच रहकर पूरी दुनिया में माता लक्ष्मी के राधा अवतार के साथ मिलकर हमको प्यार का मतलब बताया.

श्री कृष्ण जी ने अपने जीवन में एक से बढ़ के एक लीला (कृष्ण लीला) रची थी, उन्ही में से कुछ लीला महाभारत के समय हुये युद्ध के दौरान भी उन्होने रची|

महाभारत का युद्ध आरंभ होने से पहले जब युद्ध के लिए रणनीति तैयार की जा रही थी तभी प्रभु श्री कृष्ण ने एक शर्त दोनों दलो (पांडवों एवं कौरवों) के सामने रखी थी.

उनकी शर्त यह थी एक तरफ वो अपनी पूरी की पूरी सेना देंगे और दूसरी और वो खूद रहेंगे जहाँ वो एक भी अस्त्र का इस्तेमाल नहीं करेंगे|

कौरवों के मुखिया दुर्योधन ने जहाँ श्री कृष्ण के सेना को चुना था वही पांडवो ने श्री कृष्ण को चुना|

पांडवो मे अर्जुन सबसे ज़्यादा वीर और सबसे ज़्यादा धरोहर थे और इस वजह से श्री कृष्ण ने युद्ध के समय उनके साथ रहने के लिए उनका सार्थी बनने का निर्णय किया था.

द्वापर युग में महाभारत युद्ध शुरु होने से पहले पाण्डु पुत्र अर्जुन को जब मोह और संशय उत्पन्न हुआ था, तब भगवान श्री कृष्ण ने मोक्षदा एकादशी के दिन उन्हें (अर्जुन) श्रीमद्भगवद्गीता का महान और सार्वकालिक उपदेश दिया था.

दोस्तो यही एक कारण है कि यह एकादशी “गीता जयंती” के रुप में भी मनाई जाती हैं| कहते हैं कि महाभारत का युद्ध 18 दिन तक चला था, इधर कौरवों के पास गंगा पुत्र देवव्रत यानि भीष्म पितामह थे तो दूसरी और पांडवो की और भगवान श्री कृष्ण खूद उनके पास थे.

अंत मे जीत पांडवो की ही हुई क्यूंकी उनके साथ भगवान थे इसलिए कहते हैं| जिसका कोई नहीं होता उसका ऊपर वाला होता है|

मैं ऐसा इसलिए बोल रहा हूँ क्यूंकी काफी लोगो को भगवान में विश्वास नहीं होता है और वह उनके लिए मात्र एक शब्द होता है|

दोस्तो श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय की बात करू तो श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्याय हैं और यह संस्कृत में लिखी गई थी, लेकिन बढ़ते समय के साथ संस्कृत भाषा रोज़मर्रा की जिन्दगी से निकल गई और यह ज्ञान मनुष्य से दूर हो गया.

आइए जानते हैं कि भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से हम तक क्या संदेश पहुंचाने की कोशिश की थी, जिससे आज भी करिवन 70-80 प्रतिशत भारत की जनता अनभिज्ञ है| तो चलिये शुरू करते हैं.

Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 1 To 18 in Hindi

Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 1 To 18 in Hindi

आईये दोस्तों, पढ़ना शुरू करते है श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल वचन को और अपने ज्ञान के भंडार को और बढ़ाते है.

कुरान, बाइबल, गुरु ग्रंथ साहिब और गीता यह सभी किताबे भगवान द्वारा दिए गए हैं, जो किसी भी एक धर्म के लिए नहीं है बल्कि पूरी मनुष्य जाती के लिए है, पूरी इंसानियत एवं सभी आत्माओं के लिए हैं.

क्यूंकी ये आत्मा को परमात्मा के बारे में, उसकी सृष्टि के बारे में और सबसे अहम ये उन कायदों के बारे में समझाती है जिनका आत्मा का मनुष्य के रूप में हर हाल में पालन करना हो और रक्षा करनी होगी.

इन्ही कायदों के बुनियाद पर आत्मा को शरीर त्यागने के बाद परखा जाएगा, इस परीक्षा में पास होने पर हमेशा के लिए जन्म और मृत्यु से मुक्ति मिलेगी.

परमात्मा भगवद गीता में कहते हैं कि मैं ही सब कि शुरुआत हूँ, मैं शुरू से भी पहले था और सब खत्म होने के बाद भी रहूँगा| सब मुझमे हैं और मैं सब में हूँ|

जो भी तुम देख सकते हो चख सकते हो या सुन सकते हो वो सब मैं हूँ| ये नदियाँ, ये पहाड़, सूरज, ग्रह, चाँद तारे सब मैंने ही बनाए हैं| मैंने ही भगवान, शैतान, राक्षस और इंसान बनाया| मैं सर्वव्यापी हूँ, सब में मै रहता हूँ सब में मैं हूँ, मैं हूँ और बस मैं ही हूँ|

मैं ही ब्राह्मा बन कर सब बनाता हूँ, और रुद्र बन कर सब नष्ठ करता हूँ| मैं इस सृष्टि को युही बनाऊँगा और नष्ठ भी करूंगा, ताकि आत्मा को मौका मिलता रहे इस जन्म और मृत्यु से मोक्ष पाने को|

Shrimad Bhagwat Geeta in Hindi – सम्पूर्ण श्रीमद भगवद गीता अध्याय

भगवत गीता कहती है की इन सब से बड़ी परीक्षा के लिए परमात्मा ने प्रकृति का निर्माण पाँच तत्व से किया है:-

  1. हवा
  2. अगनी
  3. जल
  4. पृथ्वी
  5. ईथर

इन पांचो से किया है जिन्हें हम छू के, चख के, देख के, सुन के महसूस कर सकते हैं|

परंतु परमात्मा खूद इन पाँच केंद्रीयों के समझ से बाहर हैं, उन्हे आत्मा इन इंद्रियों से नहीं जान सकती| आत्मा इन पाँच इंद्रियों से वैसे ही है जैसे लोहे का रोबोट (जिसे अपने बनाने वाले का कोई अता पता नहीं होता) होता है.

अर्जुन को भी परमात्मा का विराट रूप में देखने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने दिव्य नेत्र दिए थे, Shrimad Bhagwat Geeta में लिखा है कि आत्मा एक अजन्मी है, जिसे कोई मार नहीं सकता, जिसे कोई जला नहीं सकता, डूबा नहीं सकता, काट नहीं सकता लेकिन आत्मा को परमात्मा के साथ हमेशा रहने के लिए ये परीक्षा रूपी जीवन में बैठना पड़ेगा.

इस परीक्षा के लिए आत्मा को परमात्मा से बिछड़ के इस पृथ्वी पर किसी न किसी रूप मे जन्म लेना पड़ेगा|

भगवान श्री कृष्ण ने दिया भागवत गीता का ज्ञान – Complete Shrimad Bhagwat Geeta in Hindi

88 करोड़ योनियों को जीने और बोलने के बाद एक आत्मा को मनुष्य का शरीर और दिमाग मिलता है इस सबसे बड़ी परीक्षा में बैठने के लिए|

हर मनुष्य को इस पूरी परीक्षा के दौरान तरह तरह की अच्छी और बुरी भावनाओं के बारे में अपने ही भाई बहन और दोस्तो के साथ डाला जाता है, जिसमे हर आत्मा को अपने अंदर के मानसिक एवं राजसिक अवगुणों से निकल के सदीक जीवन में प्रवेश करने को मौका मिलता है.

हमारे मानसिक अवगुण वो हैं जो हमारे अंदर हीन भावना पैदा करके हमे उदास करते हैं और हमे नुकसान पहुचाते हैं और राजसिक अवगुण वो हैं जो हमारे अंदर लोभी भाव को उत्पन करते है ताकि हम दूसरों का नुकसान करते हैं.

इस परीक्षा के दौरान हर आत्मा को मानसिक और राजसिक गुणों को खत्म कर के अपने सात्विक गुणों से परिचित होना पड़ेगा|

सात्विक गुण क्या है ?

सात्विक गुण वो हैं जो आत्मा को अपने आस-पास की हर चीज़ से जोड़े और प्यार करना सिखाते हैं|

परीक्षा के दौरान हर आत्मा को जीवन के चारो स्तंभ = धर्म, अर्थ, ज्ञान और मोक्ष का ज्ञान प्राप्त करके मुक्ति मिलती है| यही वो द्वार है जिसे समझ कर आत्मा परमात्मा को समझ सकती है.

दोस्तो हमे रोज थोड़ा समय निकाल कर गीता जरुर पढ़नी चाहिए, लोगों का मानना है की गीता रूपी सूर्य के उज्जवल प्रकाश से अज्ञान रूपी अंधकार नष्ट हो जाता है और मोह का नाश हो जाता है, जैसा कि अर्जुन का हुआ था.

मै इस लेख का अंत अब यही पर कर रहा हूँ, आशा करता हूँ Shrimad Bhagwat Geeta पढ़ कर आप सकारात्मक महसूस कर रहे होंगे और अब आप चाहे तो इस लेख को अपने दोस्तों के साथ सोश्ल मीडिया के माध्यम से शेयर भी कर सकते हैं.

आपको यह जानकारी पढ़कर कैसा लगा हमको कमेंट करके जरुर बताये.

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Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमे आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

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