जीवनी

सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय

Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi
Written by Himanshu Grewal
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Essay on Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi

लौह पुरुष की ऐसी छवि, ना देखी, ना सोची कभी…

नमस्कार, आज हम लौह पुरुष यानि सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय पढ़ने वाले है।

सरदार वल्लभभाई पटेल को लौह पुरुष के नाम से भी जाना जाता है, इनको लौह पुरुष इसलिए कहा जाता था क्योंकि उन्होंने 200 वर्षों की गुलामी के फंसे देश के अलग-अलग राज्यों को संगठित कर भारत जैसे विशाल देश को बिना किसी सैन्य बल के बनाया। यहीं इनकी खासियत थी कि अपने देश भारत के लिए इनको जो कुछ भी करना था उन्होंने कर के दिखाया, और शायद इसी वजह से भारत की आजादी के बाद भारत का हर युवा इनको प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता था। लेकिन अंग्रेजों द्वारा चलाई गई नीति, महात्मा गांधी के निर्णय एवं जवाहरलाल नेहरू जी के हठ के कारण वो भारत देश का सपना सच न हो सका और फल स्वरूप जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए।

Information About Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi

नामसरदार वल्लभ भाई पटेल
जन्म तिथि31 अक्टूबर 1875
जन्म स्थाननडियाद, बंबई प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (गुजरात)
मृत्यु तिथि15 दिसम्बर 1950 (उम्र 75)
मृत्यु स्थानबॉम्बे, बॉम्बे राज्य, भारत
पिताझावेरभाई पटेल
मातालाडबा देवी
पत्नीझावेरबा पटेल
भाईसोमाभाई, नरसी भाई, विट्टल भाई
बहनदहिबा
बेटादह्याभाई पटेल
बेटीमणिबेन पटेल
शिक्षा
एन.के. हाई स्कूल, पेटलाड, इंस ऑफ कोर्ट, लंदन, इंग्लैंड
पुस्तकें
राष्ट्र के विचार, वल्लभभाई पटेल, वल्लभ भाई पटेल के संग्रहित कार्य, 15 खंड
स्मारक
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity)
राजनीतिक पार्टीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

Sardar Vallabhbhai Patel Biography in Hindi

Sardar Vallabhbhai Patel

सरदार पटेल पॉलिटिकल करियर

1. 👉 1917 में बोरसाद में एक स्पीच के दौरान उन्होंने गांधी जी के स्वराज के लिए उनकी लड़ाई में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए लोगों को मनाया।

2. 👉 खेडा आंदोलन में अहम भूमिका निभाते हुए उन्होंने वहां मौजूद अकाल ग्रस्त लोगों की सेवा भी की।

3. 👉 बारडोली सत्याग्रह में उन्होंने लोगों को कर (Tax) ना देने के लिए प्रेरित किया और एक बड़ी जीत भी हासिल की, और वहीं से उनको महिलाओं द्वारा सरदार शब्द की उपाधि भी मिली।

4. 👉 असहयोग आंदोलन में गांधी जी का साथ देते हुए पूरे भारत का भ्रमण किया और आंदोलन के लिए धन राशि एवं लोगों को एकत्र किया।

5. 👉 भारत छोड़ो आंदोलन में अपनी भूमिका निभाने की वजह से इनको जेल भी जाना पड़ा।

6. 👉 आजादी के बाद भारत देश के गृहमंत्री एवं उप – प्रधानमंत्री बनाए गए।

7. 👉 इस पद पर विराजमान होते हुए उन्होंने अलग – अलग राज्यों को देश में मिलाने का कार्य किया, जिससे उन्हें लौह पुरुष की छवि मिली।

क्या आप जानते है कि सरदार वल्लभ भाई पटेल जी पर एक से बढ़ के एक कवितायें लिखी गई हैं। चलिये दोस्तों, सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी की शुरुआत उन पर लिखी गई एक कविता से शुरू करते हैं:-

Short Poem on Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi

सरदार पटेल पर कविता


खुशबू से जिसकी महका उठा सारा हिंदुस्तान
वो थे वल्लभ भाई पटेल, भारत की शान।

प्रतिभाशाली, व्यक्तित्व के धनी थे सरदार
भारत की आजादी के नायक थे महान।।

आजादी के बाद बिखरी रियासतों का
किया एकीकरण,लौह पुरुष कहलाये।

स्वाध्याय से प्रांरभिक शिक्षा ली फिर लंदन
जाकर बैरिस्टर की पढ़ाई में प्रथम आये।।

बारडोली सत्याग्रह की सफलता के बाद
सरदार की उपाधि वहां की महिलाओं ने दी|

दुश्मनों के लिए लौह पुरुष थे सरदार पटेल
इनको मरणोपरांत भारत रत्न की उपाधि दी।।

हृदय कोमल,आवाज में सिंह सी दहाड़ थी
भारतीय राजनीति के प्रखण्ड विद्वान थे।

शत् शत् नमन ऐसे महान व्यक्ति को
वे भारत की आन बान और शान थे।।

Sardar Vallabhbhai Patel Essay in Hindi

Sardar Vallabhbhai Patel PNG

सरदार वल्लभ भाई पटेल पर निबंध

सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म नडियाद, बंबई प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (गुजरात) में एक (गुर्जर) कृषक परिवार में हुआ था। एक आम इंसान कि तरह इनके भी बचपन से ही कुछ सपने थे। वह पढ़ाई करना चाहते थे, कुछ कमाना चाहते थे और फिर उस कमाई के पैसों से विदेश जाकर वकालत की पढ़ाई करना चाहते थे।

परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने की वजह से वो अपने सपने जो कहीं भूल से गए थे, और इसी बीच उनका विवाह झवेरबाई से हो गया। कुछ समय बाद इनके 2 बच्चे हुए, समय ठीक ठाक ही गुजर रहा था और तभी इनकी पत्नी को कैंसर हो गया। इलाज कराने हेतु यह मुंबई गए, और वहां इनकी पत्नी का देहांत हो गया। पत्नी के गुजरने के बाद उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के बारे मे सोचते हुए दूसरा विवाह करने से इंकार कर दिया। कुछ ही समय बाद वह लंदन गए और 36 महीने की पढ़ाई को 30 महीने में पूरी कर अपने कॉलेज में टॉप किया। फिर वह भारत वापिस आ गए और एक सफल बैरिस्टर के तौर पर अहमदाबाद में काम करने लगे।

कही ना कही उनके बचपन में खुद के भविष्य के लिए देखे गए सपने अब साकार हो रहे थे, लेकिन शायद नियति को कुछ और मंजूर था। गांधी जी के विचार को सुन कर उन्होंने भी भारत को अंग्रेजों से मुक्त कराने की लड़ाई में सहयोग देना शुरू कर दिया। इंग्लैंड से आने के बाद इनके पहनावे में काफी फरक आ गया था, साथ ही पढ़ा लिखा होने के कारण उन्होंने अपने भाषण के द्वारा लोगों को एकत्र करना शुरू कर दिया। कुछ इस प्रकार से बिना रुके वह राजनीति में घुस गए और भारत को अंग्रेजों से स्वतंत्र कराने में अपनी अहम भूमिका निभाई।

स्वतंत्र संग्राम में वल्लभ भाई का योगदान और सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी

Sardar Vallabhbhai Patel Name

स्थानीय कार्य

गुजरात में वल्लभ भाई ने सबसे पहले स्थानीय क्षेत्रों में शराब, छुआछूत एवं नारियों के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ लड़ाई की, इसके साथ ही उन्होंने मुस्लिम और हिन्दू एकता को बनाए रखने की भी पुरजोर कोशिश की|

खेड़ा आंदोलन कब हुआ और क्या था?

वर्ष 1917 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सरदार पटेल का यह सबसे पहला और बड़ा संघर्ष था। गुजरात का खेडा खण्ड उन दिनों भयंकर सूखे की चपेट में था, किसानों ने अंग्रेज सरकार से भारी कर में छूट की मांग की। जब यह स्वीकार नहीं किया गया तो सरदार पटेल, गांधी जी एवं अन्य लोगों ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हें ‘कर‘ न देने के लिये प्रेरित किया। अन्त में सरकार झुकी और उस वर्ष किसानों को करों में राहत दी गयी।

बारडोली सत्याग्रह कब हुआ था और क्या था?

1928 में साइमन कमीशन के खिलाफ सरदार वल्लभ भाई ने बारडोली में इस सत्याग्रह का नेतृत्व किया। इसमें भी सरकार द्वारा किसानों पर बढ़ाए गए ‘कर‘ का विरोध किया गया था। इसी सत्याग्रह के कारण इनका नाम पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गया और लोगों में उनके नाम का उत्साह बढ़ गया। इस आंदोलन में सफलता के कारण बारडोली के औरतों ने इनको सरदार पटेल कह कर नवाजा।

पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल के बीच का अंतर

Jawaharlal Nehru and Sardar Patel

Sardar Vallabhbhai Patel Information in Hindi

नेहरू जी बचपन से ही अमीर घराने से थे, जमीनी हकीकत से दूर थे वहीं पटेल जी एक कृषक परिवार से होने के कारण मिट्टी में रचे बसे साधारण व्यक्तित्व के तेजस्वी व्यक्ति थे और शायद इसी वजह से इन दोनों के सोच में आसमान जमीन का अंतर था। जिस काम को करने का नेहरू अभी सोचते ही थे उस काम को पटेल पहले ही कर लेते थे। इसके साथ ही शैक्षणिक योग्यता हो या व्यावहारिक सोच हो इन सभी में पटेल, नेहरू जी से काफी आगे थे, परंतु दोनों गांधी जी के विचार धारा से प्रेरित थे और इसी वजह से दोनों एक कमान में थे। लेकिन कही न कही कांग्रेस में नेहरू जी के लिए पटेल एक बहुत बड़ा रोड़ा के समान थे।


आजादी के बाद सरदार पटेल द्वारा किए गए अहम काम

15 अगस्त 1947 में जब भारत अंग्रेजों से आजाद हुआ तो देश की हालत भी गंभीर हो गई थी क्योंकि उसी दौरान पाकिस्तान भी भारत से अलग हुआ था और इस वजह से कई लोग बेघर हो गए थे। उस समय भारत का एक-एक राज्य एक स्वतंत्र देश के भांति था, जिसे भारत में मिलाना बहुत जरूरी था। यह कार्य बहुत ही कठिन था क्योंकि 200 वर्षों तक अंग्रेजों के शासन के बाद अब कोई भी राजा किसी तरह की अधीनता के लिए तैयार नहीं था।

बिना किसी युद्ध के रियासतों को देश में मिलाने का काम सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कर दिखाया, ऐसा मुमकिन सिर्फ इस वजह से हो पाया क्योंकि सबको उन पर यकीन था। बिना रक्त बहाए 560 रियासतों को भारत में मिलाने का कार्य 1947 के नवम्बर के महीने में सफल हो पाया

भारत के इतिहास से लेकर आज कल उनके जैसा काम बिना हिंसा के देश का एकीकरण करना सिर्फ वल्लभ भाई के लिए संभव था और इस बात से गांधी जी भी सहमत थे। उन दिनों उनके उस कार्य में सफलता प्राप्त करने की वजह से वो अखबारों में चर्चों के पात्र बने हुए थे। दोस्तों, ऐसा भी कहा जाता है कि यदि सरदार पटेल भारत के पहले प्रधानमंत्री बनते तो आज पाकिस्तान और चीन की वजह से जिन समस्या का सामना भारत को करना पड़ता है उससे हम वंचित रहते। उन्होंने कई बार नेहरू को चीन के लिए सतर्क भी किया, लेकिन नेहरू ने इनकी एक ना सुनी और उसका परिणाम भारत और चीन का घमासान युद्ध आज भी चर्चा में बना रेहता है|


सरदार वल्लभ भाई पटेल की मृत्यु कब और कहां हुई?

Sardar Vallabhbhai Patel Death Date: गांधी जी की मृत्यु 1948 में होने के बाद पटेल को बहुत गहरा आघात पहुंचा, जिस वजह से उनको कुछ ही समय बाद हार्ट अटैक हुआ। उससे वह उभर नहीं पाए और 15 दिसम्बर 1950 में इस दुनिया को अलविदा कह कर चले गए।


सरदार वल्लभ भाई पटेल द्वारा लिखी हुई प्रकाशित पुस्तके

Sardar Vallabhbhai Patel Books: निरन्तर संघर्षपूर्ण जीवन जीने वाले सरदार पटेल को स्वतंत्र रूप से पुस्तक-रचना का अवकाश कभी नहीं मिला, परंतु उनके लिखे पत्रों, टिप्पणियों एवं उनके द्वारा दिये गये व्याख्या के रूप में बृहत् साहित्य उपलब्ध है, जिनका संकलन विविध रूपाकारों में प्रकाशित होते रहा है।

हिन्दी में

  1. सरदार पटेल: चुना हुआ पत्र-व्यवहार (1945-1950) – दो खंडों में, संपादक-वी० शंकर, प्रथम संस्करण-1976, [नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद]
  2. सरदारश्रीके विशिष्ट और अनोखे पत्र (1918-1950) – दो खंडों में, संपादक-गणेश मा० नांदुरकर, प्रथम संस्करण-1981 [वितरक-नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद]
  3. भारत विभाजन (प्रभात प्रकाशन, नयी दिल्ली)
  4. गांधी, नेहरू, सुभाष
  5. आर्थिक एवं विदेश नीति
  6. मुसलमान और शरणार्थी
  7. कश्मीर और हैदराबाद

In English

  1. Sardar Patel’s correspondence, 1945-50. (In 10 Volumes), Edited by Durga Das [Navajivan Pub. House, Ahmedabad.]
  2. The Collected Works of Sardar Vallabhbhai Patel (In 15 Volumes), Ed. By Dr. P.N. Chopra & Prabha Chopra [Konark Publishers PVT LTD, Delhi]

इस वीर व्यक्ति को आज भी याद किया जाता है और शायद इसी वजह से आज भी उनके नाम का उल्लास भर्तियों में जिंदा रह पाया है। उनकी मृत्यु के बाद उनको कई बार सम्मानित किया गया है।

  • 👉 अहमदाबाद के हवाई अड्डे का नामकरण सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया है।
  • 👉 गुजरात के वल्लभ विद्यानगर में सरदार पटेल विश्वविद्यालय
  • 👉 सन् 1991 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित
  • 👉 स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

वल्लभ भाई पटेल का विवाह: Sardar Vallabhbhai Patel Marriage

छोटी उम्र में इनकी शादी महज 16 साल की उम्र में सन् 1891 में झावेरबा नामक देवी से हो गई। विवाह के उपरांत उन्हें दो संताने प्राप्त हुई जिनका नाम दह्याभाई और मणिबेन था।

Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti in Hindi

सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती: 31 अक्टूबर 2013 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 137वीं जयंती के मौके पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार वल्लभ भाई पटेल के एक नए स्मारक का शिलान्यास किया।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

Statue of Unity Images

Information About Statue of Unity in Hindi

यहां लौह से निर्मित सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक विशाल प्रतिमा लगाने का निश्चय किया गया था, अतः इस स्मारक का नाम “एकता की मूर्ति” (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) रखा गया है। यह मूर्ति “स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” (93 मीटर) से दुगनी ऊंची है, इस प्रस्तावित प्रतिमा को एक छोटे चट्टानी द्वीप पर स्थापित किया जाना है जो केवाड़िया में सरदार सरोवर बांध के सामने नर्मदा नदी के बीच स्थित है। इसकी बनने की शुरुआत साल 2013 से लौह पुरुष सरदार पटेल जी की जयंती के मौके पर नरेंद्र मोदी जी (भारत के प्रधानमंत्री) के द्वारा रखी गई अथवा इनके द्वारा ही सन् 2018 में विश्व की सबसे ऊँची मूर्ति का उद्घाटन भी किया गया। स्थापित हो जाने पर सरदार वल्लभ भाई पटेल की यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची धातु मूर्ति में गिनी गई, जो 5 वर्ष में लगभग 3000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई है। ऐसे महान व्यक्ति को मेरा सलाम!

जय हिन्द!


सरदार वल्लभ भाई पटेल को लौह पुरुष क्यों कहा जाता है?

यदि आप किसी सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहे हैं तो, मैं आपको बता देना चाहता हूँ कि आप से यह प्रश्न पूछा जा सकता है या फिर यह भी पूछा जा सकता है कि भारत के लौह पुरुष का नाम क्या है? और क्योंकि आप सरकारी नौकरी हासिल करना चाहते है तो इसका उत्तर आपको जरूर ज्ञात होना चाहिए-

कोई भी इंसान जब इस पृथ्वी पर जन्म लेता है तो वह बिलकुल एक आम व्यक्ति होता है, लेकिन जैसे-जैसे उसकी उम्र बढ़ती है वो चीजों को समझता है और मेहनत कर के अपना नाम कमाता है ताकि जब वह दुनिया को छोर कर चला जाए तब भी उसका नाम सब याद रखे या आप बोल सकते है कि वो अमर हो जाता है।

भारत के वीर क्रांतिकारियों में से एक सरदार वल्लभ भाई पटेल भी थे, आज आजादी के 74 वर्ष बाद भी हमें उनका नाम ज्ञात है या उनके लिए हमारे जेहन में इज्ज़त है। इसके पीछे का एक ही मुख्य कारण है और वो है कि उनको अपने जीवन को व्यर्थ नहीं किया बल्कि मेहनत कर नाम कमाया और शायद उस मेहनत को करने के कारण ही आज उनकी मृत्यु के बाद भारत में उनकी मूर्ति बना कर तैयार हुई है, उनके नाम पर कितने कॉलेज चल रहे है जिसमें भारत के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। दोस्तों, यदि आपको ज्ञात हो तो सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति नर्मदा नदी के तट पर बनी है और लोग उसे देखने भी जाते हैं, वो भी लौह की ही बनी हुई है और उनको भी लौह पुरुष कहा जाता है तो अवश्य ही इसके पीछे मुख्य कारण होगा।

यदि आप HimanshuGrewal.com पर रोजाना आकर लेख पढ़ते है तो यकीनन ही आपको ज्ञात होगा कि भारत 1947 में जब आजाद हुआ तो सवाल उठा कि भारत में प्रधानमंत्री कौन बनेंगे? सवाल उठने पर जो तीन ऊमीदवार सामने आए थे उनमें से सरदार पटेल को ही सबसे ज्यादा वोट प्राप्त हुए परंतु महात्मा गांधी जी के कहने पर उन्होंने प्रधानमंत्री के पद को त्याग दिया था क्योंकि गांधी जी चाहते थे कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ही प्रधानमंत्री बने। पंडित जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्री के काल में सरदार पटेल गृहमंत्री बने थे और इसके बाद भारतीय रियासतों के विलय की जिम्मेदारी उनको ही सौंप दी गई थी। उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वाहण करते हुए छह सौ छोटी-बड़ी रियासतों का भारत में विलय कराया।

देशी रियासतों का विलय स्वतंत्र भारत की पहली उपलब्धि थी और विशेष रूप से सरदार वल्लभ भाई पटेल का इसमें विशेष योगदान था। नीतिगत दृढ़ता के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने उन्हें सरदार और लौह पुरुष की उपाधि दी थी। वल्लभ भाई पटेल ने आजाद भारत को एक विशाल राष्ट्र बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया था।


सरदार वल्लभ भाई पटेल की कौन सी जयंती है?

जिस तिथि तो व्यक्ति जन्म लेता है अर्थात उसके जन्मदिन को उनके जयंती के रूप में माना जाता है, जैसे हम बचपन से गांधी जी के जन्म तिथि 2 अक्टूबर को मनाते हैं क्योंकि उनका जन्म 2 अक्टूबर को ही हुआ था। ठीक उसी तरह से सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 में हुआ था और इनकी जयंती को 31 अक्टूबर के दिन मनाया जाता है।


सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कितनी रियासतों का एकीकरण किया था?

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कुल 565 रियासतों का विलय कर भारत को एक राष्ट्र बनाया था, यही कारण है कि वल्लभ भाई पटेल की जयंती अर्थात 31 अक्टूबर के मौके पर राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day 2021) मनाया जाता है और उनकी मूर्ति को भी statue of unity कहा जाता है। इसके साथ ही सरदार पटेल को भारत का बिस्मार्क का टाइटल भी दिया गया था

यहां से भी आपके General Awareness के चार प्रश्न तैयार हो रहे हैं।

1. सरदार पटेल की जयंती कब मनाई जाती है

»» 31 अक्टूबर

2. राष्ट्रीय एकता दिवस कब मनाया जाता है?

»» 31 अक्टूबर

3. सरदार पटेल का जन्म कब हुआ?

»» 31 अक्टूबर 1875

4. सरदार पटेल की मूर्ति को क्या नाम दिया गया है?

»» Statue of Unity


पहली बार राष्ट्रीय एकता दिवस कब मनाया गया था?

मैं आपको बताना चाहता हूँ कि पहली बार राष्ट्रीय एकता दिवस 2014 में मनाया गया था। क्या आपके भी मन में यह सवाल आ रहा है कि वल्लभ भाई पटेल के नाम के साथ ये एकता शब्द क्यों जोड़ा जा रहा है, अर्थात हमारे देश को आजाद कराने में तो कई वीर व्यक्तियों ने भूमिका निभाई है लेकिन एकता के सूत्रधार सरदार वल्लभ भाई पटेल को एकता का प्रतीक क्यों माना जा रहा है? यदि हाँ तो चलिये मैं आपको बताता हूँ–


सरदार वल्लभ भाई पटेल को एकता का प्रतीक क्यों कहा जाता है?

1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब भी भारत एक साथ नहीं था अर्थात भारत के कई टुकड़े हो गए थे। भारत का जो नक्शा ब्रिटिश शासन में खीचा गया था उसकी 40 प्रतिशत भूमि इन देशी रियासतों के पास थी। आजादी के बाद इन रियासतों को भारत या पाकिस्तान में विलय या फिर स्वतंत्र रहने का विकल्प दिया गया था। सरदार पटेल ने आजादी से पहले ही वीपी मेनन के साथ मिलकर कई देशी राज्यों को भारत में मिलाने के लिये कार्य आरम्भ कर दिया था। काफी हद तक उन्हे सफलता प्राप्त हुई लेकिन इसके परिणामस्वरूप तीन – जम्मू एवं कश्मीर, जूनागढ़ तथा हैदराबाद स्टेट के राजाओं ने ऐसा करना नहीं स्वीकारा और देशी राजाओं को बहुत समझाने के उपरांत भी स्वायत्तता देना संभव नहीं हो सका।

जूनागढ़ एक छोटी रियासत थी और चारों ओर से भारतीय भूमि से घिरी थी, और 9 नवम्बर 1947 को जूनागढ़ भी भारत में मिल गया। उसके बाद टार्गेट किया गया हैदराबाद को जो कि भारत की सबसे बड़ी रियासत थी, जो चारों ओर से भारतीय भूमि से घिरी थी। नवंबर 1948 में हैदराबाद ने भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, अंत में बारी आई कश्मीर की जिसको नेहरू ने यह कहकर अपने पास रख लिया कि यह समस्या एक अन्तरराष्ट्रीय समस्या है। कश्मीर समस्या को संयुक्त राष्ट्रसंघ में ले गये और अलगाववादी ताकतों के कारण कश्मीर की समस्या दिनोदिन बढ़ती चली गयी।

करीबन 71 वर्ष के बाद 5 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री मोदीजी और गृहमंत्री अमित शाह जी के प्रयास से कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 और 35 (अ) समाप्त हुआ और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया। सरदार पटेल का भारत को अखण्ड बनाने का स्वपन्न उस दिन साकार हुआ, 31 अक्टूबर 2019 को जब जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के रूप में दो केन्द्र शासित प्रेदश अस्तित्व में आये। अब जम्मू-कश्मीर केन्द्र के अधीन रहता है और भारत के सभी कानून वहां लागू होते हैं। यकीनन ही यह सरदार पटेल जी को कृतज्ञ राष्ट्र की यह सच्ची श्रद्धांजलि दी गई थी।

सरदार पटेल (Sardar Vallabhbhai) ही एक ऐसे व्यक्ति थे जिसने अपनी दूरदर्शिता, चतुराई और डिप्लोमेसी की बदौलत इन रियासतों का भारत में विलय करवाया था। ऐसा बहुत ही कम होता है कि एक नेता दूसरे नेता की तारीफ करे, लेकिन सरदार पटेल के निधन पर पंडित नेहरू ने कहा था, सरदार का जीवन एक महान गाथा है जिससे हम सभी परिचित है और पूरा देश भी यह जानता है।इतिहास इसे कई पन्नों में जरूर दर्ज करेगा और उन्हें राष्ट्र-निर्माता के रूप में जाना भी जाएगा। इतिहास उन्हें नए भारत का एकीकरण करने वाला कहेगा और शायद यही कारण है कि सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती के दिन राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है।


सरदार वल्लभ भाई पटेल रास कब पहुंचे?

नमक सत्याग्रह (Namak Satyagrah) जिसका दूसरा नाम दांडी मार्च है, यह महात्मा गांधी द्वारा चलाया गया था और यह गांधी जी के द्वारा चलाए प्रमुख आंदोलनों में से एक था। महात्मा गांधी ने 12 मार्च, 1930 में अहमदाबाद के पास स्थित साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाला था। गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन में साथ देने के लिए सरदार पटेल भी दांडी कूच की तैयारी के सिलसिले में सात मार्च को रास पहुंचे थे और वहां जाकर उन्होने जनता के कहने पर भाषण देने कि शुरुआत इन शब्दों से कि थी-

“क्या आप आंदोलन के लिए तैयार हैं”

बस इतने में ही उनको गिरफ्तार कर लिया गया था।


सरदार पटेल को भारत रत्न कब मिला?

हर उस व्यक्ति को भारत रत्न से नवाजा जाता है जिसने देश के लिए कुछ बेहतर कार्य किया अर्थात देश की उन्नति में उनका कुछ भी योगदान रहा हो। 15 दिसम्बर 1950 में, पटेल इस दुनिया को छोड़ कर चले गए लेकिन उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है और सन् 1991 में सरदार पटेल को मरणोपरान्त “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया था।


सरदार वल्लभ भाई पटेल के सपनों का भारत

इस लेख को पढ़कर आपको यह तो ज्ञात हो गया होगा कि पटेल देश को एक साथ लेकर चलाना चाहते थे अर्थात हमेशा देश की प्रगति के बारे में प्रयास किया करते थे। यह वाकई सरल नहीं रहा होगा जब सरदार पटेल ने कुल 565 रियासतों का विलय कर भारत को एक संयुक्त राष्ट्र बनाया था। गुजरात में जब सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की विश्व की सबसे ऊँची मूर्ति बनाई गई तब वेंकैया नायडू ने खुशी जाहिर करते हुए यह शब्द भी जाहिर किए थे-

“सरदार पटेल ने हम सभी को मिल – जुल कर देश की सेवा कर समग्र राष्ट्र को प्रगति के मार्ग पर ले जाने के लिए प्रेरित किया है। इसका अनुसरण करना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी”। उन्होंने कहां कि सरदार पटेल का स्पष्ट संदेश था “धर्म, जाति, संप्रदाय और क्षेत्र से ऊपर उठकर भारत एक देश है, हम एक व्यक्ति हैं इसलिए हम एक राष्ट्र हैं।”

यदि देखा जाए तो यह बिलकुल सत्य भी है। धर्म, जाती, लिंग से बढ़ कर हम एक व्यक्ति और एक देश के नागरिक होने के नाते आपका यह फर्ज बनता है कि अपने देश के प्रगति के बारे में सोचे और हर वो संभव प्रयास करें जिससे कि आप देश के प्रगति में कुछ योगदान दे सके।


सरदार वल्लभ भाई पटेल के विचार

1. “आज हमें ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, जाति-पंथ के भेदभावों को समाप्त कर देना चाहिए.” – लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के अनमोल विचार

2. “शक्ति के अभाव में विश्वास व्यर्थ है. विश्वास और शक्ति, दोनों किसी महान काम को करने के लिए आवश्यक हैं.” – Most Inspirational Quotes By Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi

3. “इस मिट्टी में कुछ अनूठा है, जो कई बाधाओं के बावजूद हमेशा महान आत्माओं का निवास रहा है.” – लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रेरक अनमोल विचार

सरदार वल्लभ भाई पटेल के अनमोल विचार

4. “आपको अपना अपमान सहने की कला आनी चाहिए.” – सरदार वल्लभ भाई पटेल के नारे

5. “अधिकार मनुष्य को तब तक अंधा बनाये रखेंगे, जब तक मनुष्य उस अधिकार को प्राप्त करने हेतु मूल्य न चुका दे.”

6. “आपकी अच्छाई आपके मार्ग में बाधक है, इसलिए अपनी आँखों को क्रोध से लाल होने दीजिये, और अन्याय का सामना मजबूत हाथों से कीजिये.”

Sardar Vallabhbhai Patel Quotes in Hindi

7. “मनुष्य को ठंडा रहना चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए. लोहा भले ही गर्म हो जाए, हथौड़े को तो ठंडा ही रहना चाहिए अन्यथा वह स्वयं अपना हत्था जला डालेगा. कोई भी राज्य प्रजा पर कितना ही गर्म क्यों न हो जाये, अंत में तो उसे ठंडा होना ही पड़ेगा.

8. “मेरी एक ही इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक हो और इस देश में कोई अन्न के लिए आंसू बहाता हुआ भूखा ना रहे.”

9. “संस्कृति समझ-बूझकर शांति पर रची गयी है. मरना होगा तो वे अपने पापों से मरेंगे। जो काम प्रेम, शांति से होता है, वह वैर-भाव से नहीं होता.”

10. “जब जनता एक हो जाती है, तब उसके सामने क्रूर से क्रूर शासन भी नहीं टिक सकता। अतः जात-पांत के ऊँच-नीच के भेदभाव को भुलाकर सब एक हो जाइए.”

Conclusion
Sardar Vallabhbhai Patel GK Questions in Hindi

प्रश्न: स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की लंबाई कितनी है ?
उत्तर: 182 m

प्रश्न: स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की लागत कितनी है ?
उत्तर: 3000 करोड़ रूपये

प्रश्न: स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कहां स्थित है ?
उत्तर: Sardar Sarovar Dam, Kevadia, Gujarat 393155

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जीवन परिचय ⇓

– Biography of Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi

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Himanshu Grewal

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2 Comments

  • सरदार पटेल जी की जीवनी हर भारतीय को देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा देती है किस प्रकार सरदार पटेल ने ब्रटिश भारत से आजादी के बाद देश को रियासतों में बंटने के ,देश के टूटने से अपने कूटनीति ,रक्त और लौह की नीति का अनुसरण करते हुए बचाया ,बच्चे बच्चे को ये बात रोमांचित कर देती है।

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