देश की एकता के सूत्रधार सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय

Essay on Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi

लौह पुरुष की ऐसी छवि, ना देखी, ना सोची कभी…

नमस्कार, आज हम लौह पुरुष यानि सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय को पढ़ते हैं एवं अपने ज्ञान को बढ़ाते हैं|

सरदार वल्लभभाई पटेल को लौह पुरुष के नाम से भी जाना जाता है, इनको लौह पुरुष इसलिए कहा जाता था क्यूंकि उन्होंने 200 वर्षों की गुलामी के फंसे देश के अलग-अलग राज्यों को संगठित कर भारत जैसे विशाल देश को बिना किसी सैन्य बल के बनाया|

यही इनकी खासियत थी कि अपने देश भारत के लिए इनको जो कुछ भी करना था उन्होंने कर के दिखाया, और शायद इसी वजह से भारत के आजादी के बाद भारत का हर युवा इनको प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता था|

लेकिन अंग्रेज़ों द्वारा चलाई गई नीति, महात्मा गांधी के निर्णय एवं जवाहरलाल नेहरू जी के हठ के कारण वो भारत देश का सपना सच न हो सका और फल स्वरूप जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए|

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Post Contents

Information About Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi

नाम :सरदार वल्लभ भाई पटेल
जन्म तिथि :31 अक्टूबर 1875
जन्म स्थान :नाडियाद, गुजरात
मृत्यु तिथि :15 दिसम्बर 1950
मृत्यु स्थान :बॉम्बे
पिता का नाम :झावेरभाई पटेल
माता का नाम :लाड़ बाई
पत्नी का नाम :झवेरबाई
भाइयों के नाम :
सोम भाई, बिट्ठल भाई, नरसी भाई
बहन का नाम :दहिबा
बेटा :दहयाभाई पटेल
बेटी :मणिबेन पटेल
शिक्षा :
एन.के. हाई स्कूल, पेटलाड, इंस ऑफ कोर्ट, लंदन, इंग्लैंड
पुस्तकें :
राष्ट्र के विचार, वल्लभभाई पटेल, वल्लभ भाई पटेल के संग्रहित कार्य, 15 खंड
स्मारक
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity)
राजनीतिक पार्टी :भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

पॉलिटिकल करियर : Biography of Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi

1. 1917 में बोरसाद में एक स्पीच के दौरान उन्होंने गांधी जी के स्वराज के लिए उनकी लड़ाई में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए लोगो को मनाया|

2. खेडा आंदोलन में अहम भूमिका निभाते हुए उन्होंने वहाँ मौजूद अकाल ग्रस्त लोगो की सेवा भी की|

3. बारडोली सत्याग्रह में उन्होंने लोगो को कर (Tax) ना देने के लिए प्रेरित किया और एक बड़ी जीत भी हासिल की, और वहीं से उनको महिलाओ द्वारा सरदार शब्द की उपाधि भी मिली|

4. असहयोग आंदोलन में गांधी जी का साथ देते हुए पूरे भारत का भ्रमण किया और आंदोलन के लिए धन राशि एवं लोगो को एकत्र किया|

5. भारत छोड़ो आंदोलन में अपनी भूमिका निभाने की वजह से इनको जेल भी जाना पड़ा|

6. आजादी के बाद भारत देश के गृहमंत्री एवं उप – प्रधानमंत्री बनाए गए|

7. इस पद पर विराजमान होते हुए उन्होंने अलग – अलग राज्यो को देश में मिलाने का कार्य किया, जिससे उन्हें लौह पुरुष की छवि मिली|

क्या आप जानते हैं कि सरदार वल्लभ भाई पटेल जी पर एक से बढ़ के एक कवितायें लिखी गई हैं| चलिये दोस्तों, सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय की शुरुआत उन पर लिखी गई एक कविता से शुरू करते हैं:-

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Short Poem on Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi

सरदार वल्लभ भाई पटेल पर कविता


खुशबू से जिसकी महका उठा सारा हिंदुस्तान
वो थे वल्लभ भाई पटेल, भारत की शान।

प्रतिभाशाली, व्यक्तित्व के धनी थे सरदार
भारत की आजादी के नायक थे महान।।

आजादी के बाद बिखरी रियासतों का
किया एकीकरण,लौह पुरुष कहलाये।

स्वाध्याय से प्रांरभिक शिक्षा ली फिर लंदन
जाकर बैरिस्टर की पढ़ाई में प्रथम आये।।

बारडोली सत्याग्रह की सफलता के बाद
सरदार की उपाधि वहां की महिलाओं ने दी|

दुश्मनों के लिए लौह पुरुष थे सरदार पटेल
इनको मरणोपरांत भारत रत्न की उपाधि दी।।

हृदय कोमल,आवाज में सिंह सी दहाड़ थी
भारतीय राजनीति के प्रखण्ड विद्वान थे।

शत् शत् नमन ऐसे महान व्यक्ति को
वे भारत की आन बान और शान थे।।


सरदार वल्लभ भाई पटेल पर निबंध – Sardar Vallabhbhai Patel Essay in Hindi

सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म नडियाद, गुजरात में एक (गुर्जर) कृषक परिवार में हुआ था| एक आम इंसान कि तरह इनके भी बचपन से ही कुछ सपने थे|

वह पढ़ाई करना चाहते थे, कुछ कमाना चाहते थे और फिर उस कमाई के पैसो से विदेश जाकर वकालत की पढ़ाई करना चाहते थे|

परिवार के जिम्मेदारियों को निभाने की वजह से वो अपने सपने जो कही भूल से गए थे, और इसी बीच उनका विवाह झवेरबाई से हो गया|

कुछ समय बाद इनके 2 बच्चे हुए, समय ठीक ठाक ही गुजर रहा था और तभी इनकी पत्नी को कैंसर हो गया|

इलाज़ कराने हेतु यह मुंबई गए, और वहाँ इनकी पत्नी का देहांत हो गया| पत्नी के गुजरने के बाद उन्होंने अपने बच्चो के भविष्य के बारे मे सोचते हुए दूसरा विवाह करने से इंकार कर दिया|

कुछ ही समय बाद वह लंदन गए और 36 महीने की पढ़ाई को 30 महीने में पूरी कर अपने कॉलेज में टॉप किया| फिर वह भारत वापिस आ गए और एक सफल बैरिस्टर के तौर पर अहमदाबाद में काम करने लगे|

कही ना कही इनके बचपन में खूद के भविष्य के लिए देखे गए सपने अब साकार हो रहे थे, लेकिन शायद नियति को कुछ और मंजूर था|

गांधी जी के विचार को सुन कर उन्होंने भी भारत को अंग्रेज़ों से मुक्त कराने की लड़ाई में सहयोग देना शुरू कर दिया|

इंग्लैंड से आने के बाद इनके पहनावे में काफी फरक आ गया था, साथ ही पढ़ा लिखा होने के कारण इन्होंने अपने भाषण के द्वारा लोगो को एकत्र करना शुरू कर दिया|

कुछ इस प्रकार से बिना रुची भी वह राजनीति भी घुस गए और भारत को अंग्रेज़ों से स्वतंत्र कराने में अपनी अहम भूमिका निभाई|

स्वतंत्र संग्राम में वल्लभ भाई का योगदान – सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी

स्थानीय कार्य :

गुजरात में वल्लभ भाई ने सबसे पहले स्थानीय क्षेत्रों में शराब, छुआछूत एवं नारियों के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ लड़ाई की, इसके साथ ही उन्होंने मुस्लिम और हिन्दू एकता को बनाए रखने की भी पुरजोर कोशिश की|

खेड़ा आंदोलन कब हुआ और क्या था :

वर्ष 1917 में स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान सरदार पटेल का यह सबसे पहला और बड़ा संघर्ष था। गुजरात का खेडा खण्ड उन दिनो भयंकर सूखे की चपेट में था, किसानों ने अंग्रेज सरकार से भारी कर में छूट की मांग की।

जब यह स्वीकार नहीं किया गया तो सरदार पटेल, गांधी जी एवं अन्य लोगों ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हें कर न देने के लिये प्रेरित किया।

अन्त में सरकार झुकी और उस वर्ष किसानों को करों में राहत दी गयी।

बारडोली सत्याग्रह कब हुआ था और क्या था :

1928 में साइमन कमीशन के खिलाफ सरदार वल्लभ भाई ने बारडोली में इस सत्याग्रह का नेतृत्व किया| इसमे भी सरकार द्वारा किसानो पर बढ़ाए गए कर का विरोध किया गया था|

इसी सत्याग्रह के कारण इनका नाम पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गया और लोगों में उनके नाम का उत्साह बढ़ गया|

इस आंदोलन में सफलता के कारण बारडोली के औरतों ने इनको सरदार पटेल कह कर नवाजा|

पंडित जवाहर लाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल के बीच का अंतर

Sardar Vallabhbhai Patel Information in Hindi

नेहरू जी बचपन से ही अमीर घराने से थे, जमीनी हकीकत से दूर थे वही पटेल जी एक कृषक परिवार से होने के कारण मिट्टी में रचे बसे साधारण व्यक्तित्व के तेजस्वी व्यक्ति थे| और शायद इसी वजह से इन दोनों के सोच में आसमान जमीन का अंतर था|

जिस काम को करने का नेहरू अभी सोचते ही थे उस काम को पटेल पहले ही कर लेते थे|

इसके साथ ही शैक्षणिक योग्यता हो या व्यवहारिक सोच हो इन सभी में पटेल नेहरू जी से काफी आगे थे, परंतु दोनों गांधी जी के विचार धारा से प्रेरित थे और इसी वजह से दोनों एक कमान में थे| लेकिन कही न कही काँग्रेस में नेहरू जी के लिए पटेल एक बहुत बड़ा रोड़ा के समान थे|

आजादी के बाद सरदार पटेल द्वारा किए गए अहम काम

Sardar Vallabhbhai Patel Information in Hindi

15 अगस्त 1947 में जब भारत अंग्रेज़ों से आजाद हुआ तो देश की हालत भी गंभीर हो गई थी क्यूंकी उसी दौरान पाकिस्तान भी भारत से अलग हुआ था और इस वजह से कई लोग बेघर हो गए थे|

उस समय भारत का एक-एक राज्य एक स्वतंत्र देश के भांति था, जिसे भारत में मिलाना बहुत जरूरी था| यह कार्य बहुत ही कठिन था क्यूंकि 200 वर्षो तक अंग्रेज़ों के शासन के बाद अब कोई भी राजा किसी तरह की अधीनता के लिए तैयार नहीं था|

बिना किसी युद्ध के रियासतों को देश में मिलाने का काम सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कर दिखाया, ऐसा मुमकिन सिर्फ इस वजह से हो पाया क्यूंकि सबको उनपर यकीन था|

बिना रक्त बहाए 560 रियासतों को भारत में मिलाने का कार्य 1947 के नवम्बर के महीने में सफल हो पाया|

भारत के इतिहास से लेकर आज कल उनके जैसा काम – बिना हिंसा के देश का एकीकरण करना सिर्फ वल्लभ भाई के लिए संभव था और इस बात से गांधी जी भी अग्री करते थे| उन दिनों उनके उस कार्य में सफलता प्राप्त करने की वजह से वो अख़बारों में चर्चों के पात्र बने हुए थे|

दोस्तों ऐसा भी कहा जाता है कि यदि पतले भारत के पहले प्रधानमंत्री बनते तो आज पाकिस्तान और चीन की वजह से जिन समस्या का सामना भारत को करना पड़ता है उससे हम वंचित रहते|

उन्होंने कई बार नेहरू को चीन के लिए सतर्क भी किया, लेकिन नेहरू ने इनकी एक ना सुनी और उसका परिणाम भारत और चीन का घमासान युद्ध आज भी चर्चा में बना रेहता है|

सरदार वल्लभ भाई पटेल की मृत्यु कब और कहां हुई – Sardar Vallabhbhai Patel Death Date

गांधी जी की मृत्यु 1948 में होने के बाद पटेल को बहुत गहरा आघात पंहुचा, जिस वजह से उनको कुछ ही समय बाद हार्ट अटैक हुआ| उससे वो उभर नहीं पाए और 15 दिसम्बर 1950 में इस दुनिया को अलविदा कह कर चले गए|

सरदार वल्लभ भाई पटेल द्वारा लिखी हुई प्रकाशित पुस्तके – Sardar Vallabhbhai Patel Books

निरन्तर संघर्षपूर्ण जीवन जीने वाले सरदार पटेल को स्वतंत्र रूप से पुस्तक-रचना का अवकाश कभी नहीं मिला, परंतु उनके लिखे पत्रों, टिप्पणियों एवं उनके द्वारा दिये गये व्याख्या के रूप में बृहद् साहित्य उपलब्ध है, जिनका संकलन विविध रूपाकारों में प्रकाशित होते रहा है।

हिन्दी में :

  1. सरदार पटेल : चुना हुआ पत्र-व्यवहार (1945-1950) – दो खंडों में, संपादक-वी० शंकर, प्रथम संस्करण-1976, [नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद]
  2. सरदारश्री के विशिष्ट और अनोखे पत्र (1918-1950) – दो खंडों में, संपादक-गणेश मा० नांदुरकर, प्रथम संस्करण-1981 [वितरक-नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद]
  3. भारत विभाजन (प्रभात प्रकाशन, नयी दिल्ली)
  4. गांधी, नेहरू, सुभाष
  5. आर्थिक एवं विदेश नीति
  6. मुसलमान और शरणार्थी
  7. कश्मीर और हैदराबाद

In English

  1. Sardar Patel’s correspondence, 1945-50. (In 10 Volumes), Edited by Durga Das [Navajivan Pub. House, Ahmedabad.]
  2. The Collected Works of Sardar Vallabhbhai Patel (In 15 Volumes), Ed. By Dr. P.N. Chopra & Prabha Chopra [Konark Publishers PVT LTD, Delhi]

इस वीर व्यक्ति को आज भी याद किया जाता है और शायद इसी वजह से आज भी उनके नाम का उल्लास भर्तियों में जिंदा रह पाया है| उनकी मृत्यु के बाद उनको कई बार सम्मानित किया गया है|

  • अहमदाबाद के हवाई अड्डे का नामकरण सरदार वल्लभभाई पटेल अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया है।
  • गुजरात के वल्लभ विद्यानगर में सरदार पटेल विश्वविद्यालय
  • सन् 1991 में मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित
  • स्टैच्यू ऑफ यूनिटी
वल्लभभाई पटेल का विवाह – Sardar Vallabhbhai Patel Marriage

छोटी उम्र में इनकी शादी महज 16 साल की उम्र में सन् 1891 में झावेरबा नामक देवी से हो गई| विवाह के उपरांत उन्हें दो संताने प्राप्त हुई जिनका नाम दहयाभाई और मणिबेन था|

Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti – सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती

31 अक्टूबर 2013 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 137वीं जयंती के मौके पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार वल्लभ भाई पटेल के एक नए स्मारक का शिलान्यास किया।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी – Information About Statue of Unity in Hindi

Statue of Unity Images

यहाँ लौह से निर्मित सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक विशाल प्रतिमा लगाने का निश्चय किया गया था, अतः इस स्मारक का नाम “एकता की मूर्ति” (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) रखा गया है।

यह मूर्ति “स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” (93 मीटर) से दुगनी ऊंची है, इस प्रस्तावित प्रतिमा को एक छोटे चट्टानी द्वीप पर स्थापित किया जाना है जो केवाड़िया में सरदार सरोवर बांध के सामने नर्मदा नदी के बीच स्थित है।

इस बनने की शुरुआत साल 2013 से लौह पुरुष सरदार पटेल जी की जयंती के मौके पर नरेंद्र मोदी जी (भारत के प्रधानमंत्री) के द्वारा रखी गई अथवा इनके द्वारा ही सन् 2018 में विश्व की सबसे ऊँची मूर्ती का उद्घाटन भी किया गया|

स्थापित हो जाने पर सरदार वल्लभ भाई पटेल की यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची धातु मूर्ति में गिनी गई, जो 5 वर्ष में लगभग 3000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई है।

ऐसे महान इन्सान को मेरा सलाम!

जय हिन्द!

सरदार वल्लभ भाई पटेल के विचार – Sardar Vallabhbhai Patel Quotes in Hindi

1. “आज हमें ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, जाति-पंथ के भेदभावों को समाप्त कर देना चाहिए.” – लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के अनमोल विचार

2. “शक्ति के अभाव में विश्वास व्यर्थ है. विश्वास और शक्ति, दोनों किसी महान काम को करने के लिए आवश्यक हैं.” – Most Inspirational Quotes By Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi

3. “इस मिट्टी में कुछ अनूठा है, जो कई बाधाओं के बावजूद हमेशा महान आत्माओं का निवास रहा है.” – लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रेरक अनमोल विचार

4. “आपको अपना अपमान सहने की कला आनी चाहिए.” – सरदार वल्लभ भाई पटेल के नारे

5. “अधिकार मनुष्य को तब तक अंधा बनाये रखेंगे, जब तक मनुष्य उस अधिकार को प्राप्त करने हेतु मूल्य न चुका दे.”

6. “आपकी अच्छाई आपके मार्ग में बाधक है, इसलिए अपनी आँखों को क्रोध से लाल होने दीजिये, और अन्याय का सामना मजबूत हाथों से कीजिये.”

7. “मनुष्य को ठंडा रहना चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए. लोहा भले ही गर्म हो जाए, हथौड़े को तो ठंडा ही रहना चाहिए अन्यथा वह स्वयं अपना हत्था जला डालेगा. कोई भी राज्य प्रजा पर कितना ही गर्म क्यों न हो जाये, अंत में तो उसे ठंडा होना ही पड़ेगा.

8. “मेरी एक ही इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक हो और इस देश में कोई अन्न के लिए आंसू बहाता हुआ भूखा ना रहे.”

9. “संस्कृति समझ-बूझकर शांति पर रची गयी है. मरना होगा तो वे अपने पापों से मरेंगे। जो काम प्रेम, शांति से होता है, वह वैर-भाव से नहीं होता.”

10. “जब जनता एक हो जाती है, तब उसके सामने क्रूर से क्रूर शासन भी नहीं टिक सकता। अतः जात-पांत के ऊँच-नीच के भेदभाव को भुलाकर सब एक हो जाइए.”

Conclusion

Sardar Vallabhbhai Patel GK Questions in Hindi

प्रश्न : स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की लंबाई कितनी है ?
उत्तर : 182 m

प्रश्न : स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की लागत कितनी है ?
उत्तर : 3000 करोड़ रूपये

प्रश्न : स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कहां स्थित है ?
उत्तर : Sardar Sarovar Dam, Kevadia, Gujarat 393155

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Biography of Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi के इस लेख को अंत तक पढ़ने के लिए आप सभी रीडर्स का तहे दिल से धन्यवाद!

जीवन परिचय ⇓

सरदार वल्लभ भाई पटेल
देश की एकता के सूत्रधार सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय

जन्म : 31 अक्टूबर 1875, मृत्यु : 15 दिसम्बर 1950, पिता : झावेरभाई पटेल, माता : लाड़ बाई, पत्नी : झवेरबाई|

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Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमे आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

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