सम्पूर्ण रामायण कथा और कहानी हिंदी में

महर्षि वाल्मीकि जी के द्वारा संस्कृत भाषा में लिखा गया| रामायण एक महाकाव्य है| भारतीय साहित्य के दो विशाल महाकाव्य है, जिसमें से एक रामायण कथा है और दूसरा महाकाव्य महाभारत है.

आइये आज इस लेख की मदद से रामायण की कहानी जानते हैं.

सम्पूर्ण रामायण कथा – Ramayan Katha in Hindi

हिंदू धर्म में रामायण को एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है जिसमें हम सबको रिश्तों के कर्तव्यों के बारे में समझाया गया है.

रामायण महाकाव्य में एक आदर्श पिता, आदर्श पुत्र, आदर्श पत्नी, आदर्श भाई, आदर्श मित्र, आदर्श सेवक और आदर्श राजा को दिखाया गया है.

रामायण महाकाव्य में 24 हजार छंद और 500 सर्ग हैं जो कि 7 खंड है|

इस लेख में मै आपको उन सात खंड से रूबरू कराते हुए पूरी रामायण कथा की कहानी संचिप्त में बताऊँगा| तो चलिये शुरू करते हैं.

रामायण की कहानी को पढ़ने से पहले आइये एक प्रश्न का उत्तर जानते हैं, जिसका उत्तर कई लोगो को मालूम नहीं है.

Ramayan GK Questions in Hindi – रामायण सामान्य ज्ञान

प्रश्न : रामायण ग्रंथ है या किताब?

यदि आपको उत्तर मालूम है तो बहुत ही अच्छी बात है लेकिन अगर नहीं मालूम है तो आपको निराष होने की आवश्यकता नहीं है.

इस लेख को लिखने का मेरा उद्देश्य आप तक सही जानकारी को पहुचाना ही है, तो आइये जानते हैं इस सवाल का सही जवाब.

देश में विदेशियों की सत्ता हो जाने के बाद संस्कृत का ह्रास हो गया और भारतीय लोग उचित ज्ञान के अभाव तथा विदेशी सत्ता के प्रभाव के कारण अपनी ही संस्कृति को भूलने लग गये.

ऐसी स्थिति को अत्यन्त विकट जानकर महाज्ञानी सन्त श्री तुलसीदास जी ने एक बार फिर से भगवान श्री राम की पवित्र कथा को देशी भाषा में लिपिबद्ध किया.

सन्त तुलसीदास जी ने अपने द्वारा लिखित भगवान श्री राम की कल्याणकारी कथा से परिपूर्ण इस ग्रंथ का नाम रामचरितमानस रखा.

सामान्य रूप से रामचरितमानस को तुलसी रामायण के नाम से जाना जाता है.

तो दोस्तो शायद अब आपको आपके सवाल का जवाब मिल गया होगा कि रामायण एक ग्रंथ है.

जैसा की आप जानते हैं कि रामायण को कई लोगो ने कई बार लिखा है, वही रामायण मंजरी भी लिखा गया है, आइये जानते हैं कि इसके लेखक कौन है.

प्रश्न : रामायण मंजरी के लेखक कौन है ?
उत्तर : आशापूर्णा देवी|

आप चाहे तो इस किताब को ऑनलाइन Amazon से परचेस करके पढ़ सकते हो|

वैसे तो मै इस कहानी को रामायण के सात कांड में विभाजित कर के ही समझाने वाला हूँ| लेकिन फिर भी मै आपको रामायण के सात कांड संस्कृत भाषा मे बताना चाहता हूँ.

रामायण के सात कांड कौन-कौन से हैं ?

  1. बालकाण्डम्
  2. अयोध्याकाण्ड
  3. अरण्यकाण्ड
  4. किष्किन्धाकाण्ड
  5. सुन्दरकाण्डम्
  6. युद्धकाण्डम्
  7. उत्तरकाण्डम्

रामचरितमानस बालकांड हिंदी में – Ramayan Balkand in Hindi

अयोध्या के राजा का नाम दशरथ था, जिन की तीन पत्तियां (कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा) थी.

राजा दशरथ बहुत समय तक निसंतान थे और वह अपने अपने उत्तराधिकारी के लिए बहुत चिंतित थे| इसलिए राजा दशरथ ने अपने कुल गुरु ऋषि वशिष्ठ की सलाह मानकर पुत्र कामेष्टि यज्ञ करवाया, उस यज्ञ के फलस्वरुप राजा दशरथ को चार पुत्र प्राप्त हुए.

उनकी पहली पत्नी कौशल्या से प्रभु श्री राम, कैकई से भरत और सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ|

जब प्रभु श्री राम 16 वर्ष के हुए तब एक बार ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ के पास आए और अपने यज्ञ में विघ्न उत्पन्न करने वाले राछस के आतंक के बारे में राजा दशरथ को बताया और उनसे सहायता मांगी.

ऋषि विश्वामित्र की बात सुनकर राजा दशरथ उनकी सहायता करने के लिए तैयार हो गए और अपने राज्य के सैनिक को उनके साथ भेजने का आदेश दिया, पर ऋषि विश्वामित्र ने इस कार्य के लिए राम और लक्ष्मण का चयन किया.

राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ उनके आश्रम जाते हैं, और उनके यज्ञ मैं विघ्न डालने वाले राक्षस का नाश कर देते हैं| इससे ऋषि विश्वामित्र प्रसन्न होकर राम और लक्ष्मण को अनेक दिव्यास्त्र प्रदान करते हैं.

दूसरी और जनक मिथिला प्रदेश के राजा थे और वह भी निसंतान थे और संतान प्राप्ति के लिए वह भी बहुत चिंतित थे, तब एक दिन उनको गहरे कुंड में एक बच्ची मिली, तब राजा जनक की खुशी का ठिकाना ना रहा, और राजा जनक उस बच्ची को भगवान का वरदान मानकर उसे अपने महल ले आए.

राजा जनक ने उस बच्ची का नाम सीता रखा, राजा जनक अपनी पुत्री सीता को बहुत ही अधिक स्नेह करते थे| सीता गुण और अद्वितीय सुंदरता से परिपूर्ण थी.

जब सीता विवाह योग्य हुई तब राजा जनक अपने प्रिय पुत्री सीता के लिए उनका स्वयंवर रखने का निश्चय किया|

राजा जनक ने सीता के स्वयंवर में शिव धनुष को उठाने वाले और उस पर प्रत्यंचा चाहने वाले से अपनी प्रिय पुत्री सीता से विवाह करने की शर्त रखी.

सीता के गुण और सुंदरता की चर्चा पहले से ही चारों तरफ फैल चुकी थी तो सीता के स्वयंवर की खबर सुनकर बड़े-बड़े राजा सीता स्वयंवर में भाग लेने के लिए आने लगे.

ऋषि विश्वामित्र भी राम और लक्ष्मण के साथ सीता स्वयंवर को देखने के लिए राजा जनक के नगर मिथिला पहुंचे| शर्त के अनुसार बहुत सारे राजाओं ने शिव धनुष को उठाने की कोशिश की लेकिन कोई भी धनुष को हिला भी नहीं पा रहा था उठाना तो बहुत दूर की बात है, यह सब देख कर राजा जनक चिंतित हो गए.

तब ऋषि विश्वामित्र ने राजा जनक की चिंता दूर करते हुए अपने शिष्य राम को उठने की अनुमति दी, प्रभु राम अपने गुरु को प्रणाम कर उठे और उन्होंने उस धनुष को बड़ी सरलता से उठा कर जब उस पर प्रत्यंचा चलाने लगे तो धनुष टूट गया.

राजा जनक शर्त के अनुसार प्रभु श्रीराम से सीता का विवाह करने का निश्चय किया और साथ ही अपनी अन्य पुत्रियों का विवाह भी राजा दशरथ के पुत्रों से करवाने का उन्होंने विचार किया.

इस प्रकार एक साथ ही राम का विवाह सीता से, लक्ष्मण का विवाह उर्मिला से, भरत का विवाह मांडवी से और शत्रुधन का विवाह श्रुतकीर्ति से हो गया.

मिथिला में विवाह का एक बहुत बड़ा आयोजन हुआ और उनमें प्रभु राम और उनके भाइयों की विवाह संपन्न हुआ, विवाह के बाद बारात अपने राज्य अयोध्या लौट आई.

अयोध्याकाण्ड अर्थ सहित – रामायण कथा हिंदी में

राम और सीता एवं उनके तीनों भाइयों के विवाह को 12 वर्ष बीत गए थे और अब राजा दशरथ भी वृद्ध हो गए थे| अपने बाद वह अपने बड़े बेटे राम को अयोध्या के सिंहासन पर बिठाना चाहते थे.

तब एक शाम राजा दशरथ की दूसरी पत्नी का कैकई अपनी एक चतुर दासी मंथरा के बहकावे में आकर राजा दशरथ से दो वचन मांगे.. “जो राजा दशरथ ने कई वर्ष पहले कैकई द्वारा जान बचाने के लिए कैकई को दो वचन देने का वादा किया था”.

कैकई ने राजा दशरथ से अपने पहले वचन के रूप में राम को 14 वर्ष का वनवास और दूसरे वचन के रूप में अपने पुत्र भरत को अयोध्या के राज सिहासन पर बैठाने की बात कही.

अपने दिल पर पठार रखते हुये राजा दशरथ मे अपने प्रिय पुत्र राम को बुलाकर उन्हें 14 वर्ष के लिए वनवास जाने को कहा.

राम ने अपने पिता राजा दशरथ का बिना कोई विरोध किए उनका आदेश स्वीकार कर लिया.

जब सीता और लक्ष्मण को प्रभु राम के वनवास जाने के बारे में पता चला तो उन्होंने भी राम के साथ वनवास जाने का आग्रह किया, और इस प्रकार राम सीता और लक्ष्मण अयोध्या से वन जाने के लिए निकल गए.

अपने प्रिय पुत्र राम के वन जाने से दुखी होकर राजा दशरथ ने अपने प्राण त्याग दिए.

इस दौरान भरत जो अपने मामा के यहां (ननिहाल) गए हुए थे, वह अयोध्या की घटना सुनकर बहुत ही ज्यादा दुखी हुए.

भरत ने अपनी माता कैकई को अयोध्या के राज सिंहासन पर बैठने से मना कर दिया और वह अपने भाई राम को ढूंढते हुए वन में चले गए.

वन में जाकर भरत राम लक्ष्मण और सीता से मिले और उनसे अयोध्या वापस लौटने का आग्रह किया फिर तभी राम ने अपने पिता के वचन का पालन करते हुए अयोध्या वापस नहीं लौटने का प्रण किया.

तब भरत ने अपने बड़े भाई यानि भगवान राम की चरण पादुका अपने साथ ले कर अयोध्या वापस लौट आए, और राम की चरण पादुका को अयोध्या के राजसिंहासन पर रख दिया और भरत ने बोला कि वो उनके एक दास बनकर आयोध्य को उनके वापस आने तक चलाएँगे.

अरण्यकांड चौपाई अर्थ सहित – Full Ramayan Story in Hindi

रामायण कथा : भगवान राम के वनवास को 13 बरस बीत गए थे और वनवास का अंतिम वर्ष चल रहा था| भगवान राम, सीता और लक्ष्मण गोदावरी नदी के किनारे जा रहे थे, गोदावरी के निकट एक जगह सीता जी को बहुत पसंद आई उस जगह का नाम था पंचवटी.

तब भगवान राम अपनी पत्नी की भावना को समझते हुए उन्होंने वनबास का शेष समय पंचवटी में ही बिताने का निर्णय लिया और वहीं पर वह तीनों (राम, लक्ष्मण और सीता) कुटिया बनाकर रहने लगे.

पंचवटी के जंगलों में ही एक दिन शूर्पणखा नाम की राक्षसी औरत वहाँ आई और उसका दिल भगवान राम पर आ गया और वो उनको अपने रूप रंग से लुभाना चाहती थी, जिसमें वह असफल रही.

जब उसको ज्ञात हुआ कि राम कि पत्नी सीता है तो उसने सीता को मारने का प्रयास किया, तब लक्ष्मण ने सूर्पनखा को रोकते हुए उसके नाक और कान काट दिए.

जब इस बात की खबर शूर्पणखा के राक्षस भाई खर को पता चली तो वह अपने राक्षस साथियों के साथ राम, लक्ष्मण सीता जिस पंचवटी में कुटिया बनाकर रह रहे थे वहां पर उसने हमला कर दिया, भगवान राम और लक्ष्मण ने खर और उसके सभी राक्षसों का वध कर दिया.

रामायण सीता हरण की कहानी – Ramayan Sita Haran Story or Katha In Hindi

जब इस घटना की खबर सूर्पनखा के दूसरे भाई रावण तक पहुंची तो उसने राक्षस मारीचि की मदद से भगवान राम की पत्नी सीता का अपहरण करने की योजना बनाई.

रावण के कहने पर राक्षस मरीचि ने स्वर्ण मृग (बकड़ी का बच्चा) बनकर सीता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया.

स्वर्ण मृग की सुंदरता पर मोहित होकर सीता ने राम को उसे पकड़ने को भेज दिया, भगवान राम रावण की इस योजना से अनभिज्ञ थे क्योंकि भगवान राम तो अंतर्यामी थे, फिर भी अपनी पत्नी सीता की इच्छा को पूरा करने के लिए वह उस स्वर्ण मृग के पीछे जंगल में चले गए और माता सीता की रक्षा के लिए अपने भाई लक्ष्मण को बोल दिए.

कुछ समय बाद जब भगवान राम ने उस मृग को तीर मार कर पकड़ने की कोशिश करी और तब मरते मरते उस मृग ने भगवान राम की करुणा भरी मदद की आवाज में “सीते चिल्लाया” जिसे सुनते ही माता सीता ने लक्ष्मण को भगवान राम की सहायता के लिए जबरदस्ती भेजने लगी.

लक्ष्मण ने माता सीता को समझाने की बहुत कोशिश की कि भगवान राम अजय हैं, और उनका कोई भी कुछ नहीं कर सकता, लेकिन फिर भी सीता माता नहीं मानी और उन्होने लक्ष्मण को वचन देकर भगवान राम की सहायता करने के लिए लक्ष्मण को आदेश दे दिया.

लक्ष्मण माता सीता की आज्ञा मानना तो चाहते थे लेकिन वह सीता को कुटिया में अकेला नहीं छोड़ना चाहते थे इसलिए लक्ष्मण कुटिया से जाते वक्त कुटिया के चारों और एक लक्ष्मण रेखा बनाई, ताकि कोई भी उस रेखा के अंदर नहीं प्रवेश कर सके और माता सीता को इस रेखा से बाहर नहीं निकलने का आग्रह किया.

फिर लक्ष्मण भगवान राम की खोज में निकल पड़े, इधर रावण जो घात लगाए बैठा था जब उसने देखा की रास्ता साफ हो गया है तो वह एक साधु का वेश बनाकर माता सीता की कुटिया के आगे पहुंच गया और भिक्षा मांगने लगा.

माता सीता रावण जो कि एक साधु के वेश में था उसकी कुटिलता को नहीं समझ पाई और उसके भ्रमजाल में आकर लक्ष्मण की बनाई गई लक्ष्मण रेखा के बाहर कदम रख दिया और रावण माता सीता को बलपूर्वक उठाकर ले गया.

जब रावण सीता को बलपूर्वक अपने पुष्पक विमान में ले जा रहा था तो जटायु नाम का गिद्ध ने उसे रोकने की कोशिश की, जटायु ने माता सीता की रक्षा करने का बहुत प्रयास किया और जिसमें वह प्राणघातक रूप से घायल हो गया.

रावण सीता को अपने पुष्पक विमान से उड़ा कर लंका ले गया और उन्हें राक्षसी की कड़ी सुरक्षा में लंका के अशोक वाटिका में डाल दिया.

फिर रावण ने माता सीता के सामने उनसे विवाह करने की इच्छा प्रकट की, लेकिन माता सीता अपने पति भगवान राम के प्रति समर्पण होने के कारण रावण से विवाह करने के लिए मना कर दिया.

इधर भगवान राम और लक्ष्मण माता सीता के अपहरण के बाद उनकी खोज करते हुए जटायु से मिले, तब उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी सीता को लंकापति रावण उठाकर ले गया है.

तब वह दोनों भाई सीता को बचाने के लिए लंका की ओर निकल पड़े, भगवान राम और लक्ष्मण जब माता सीता की खोज कर रहे थे तब उनकी मुलाकात राक्षस कबंध और परम तपस्वी साध्वी शबरी से हुई.

उन दोनों ने उन्हें सुग्रीव और हनुमान तक पहुंचाया और सुग्रीव से मित्रता करने की सुझाव दिया.

किष्किन्धाकाण्ड अर्थ सहित – Sampurna Ramayan Kishkindha Kand in Hindi

भगवान राम सीता माता की खोज में अपने सबसे बड़े भक्त भगवान हनुमान से मिले, महाबली हनुमान वानरों में से सबसे महान नायक और सुग्रीव के पक्षपाती थे जिनको की किष्किंधा के सिंहासन से भगा दिया गया था.

हनुमान की मदद से भगवान राम और सुग्रीव की मित्रता हो गई और फिर सुग्रीव ने भगवान राम से अपने भाई बाली को मारने में उनसे मदद मांगी| तब भगवान राम ने बाली का वध किया और फिर से सुग्रीव को किसकिंधा का सिंहासन मिल गया, और बदले में सुग्रीव ने भगवान राम को उनकी पत्नी माता सीता को खोजने में सहायता करने का वचन दिया.

सुग्रीव ने अपने वानर के दलों को संसार के चारों कोनों में माता सीता की खोज में भेज दिया| उत्तर, पश्चिम और पूर्व दल के वानर खोजकर्ता खाली हाथ वापस लौट आए.

दक्षिण दिशा का खोज दल अंगद और हनुमान के नेतृत्व में था, और वह सभी सागर के किनारे जाकर रुक गए|

तब अंगद और हनुमान को जटायु का बड़ा भाई संपती से यह सूचना मिली कि माता सीता को लंकापति नरेश रावण बलपूर्वक लंका ले गया है.

सम्पूर्ण सुंदरकाण्ड अध्याय – Full Story Of Ramayan in Hindi

रामायण कथा कहानी : माता सीता के बारे में खबर मिलते ही हनुमान जी ने अपना विशाल रूप धारण किया और विशाल समुद्र को पार कर लंका पहुंच गए.

हनुमान जी लंका पहुंच कर वहां माता सीता की खोज शुरू कर दी| लंका में बहुत खोजने के बाद हनुमान को सीता अशोक वाटिका में मिली.

जहां पर रावण के बहुत सारी राक्षसी दासियां माता सीता को रावण से विवाह करने के लिए बाध्य कर रही थी| सभी राक्षसी दासियों के चले जाने के बाद हनुमान माता सीता तक पहुंचे और उनको भगवान राम की अंगूठी दे कर अपने राम भक्त होने का पहचान कराया.

हनुमान जी ने माता सीता को भगवान राम के पास ले जाने को कहा, लेकिन माता सीता ने यह कहकर इंकार कर दिया कि भगवान राम के अलावा वह किसी और नर को स्पर्श करने की अनुमति नहीं देगी, माता सीता ने कहा कि प्रभु राम उन्हें खुद लेने आएंगे और अपने अपमान का बदला लेंगे.

फिर हनुमान जी माता सीता से आज्ञा लेकर अशोक वाटिका में पेड़ों को उखाड़ना और तबाह करना शुरू कर देते हैं|

इसी बीच हनुमान जी रावण के 1 पुत्र अक्षय कुमार का भी वध कर देते हैं.

तब रावण का दूसरा पुत्र मेघनाथ हनुमान जी को बंदी बनाकर रावण के समक्ष दरबार में हाजिर करता है| हनुमान जी रावण के दरबार में रावण के समक्ष भगवान राम की पत्नी सीता को छोड़ने के लिए रावण को बहुत समझाते हैं.

रावण क्रोधित होकर हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश देता है, हनुमान जी की पूंछ में आग लगते हैं वह उछलते हुए एक महल से दूसरे महल, एक छत से दूसरी छत पर जाकर पूरी लंका नगरी में आग लगा देते हैं.

वहाँ से वापस आने के लिए वह फिर से विशाल रूप धारण कर किष्किंधा पहुंच जाते हैं, वहां पहुचकर हनुमान जी भगवान राम और लक्ष्मण को माता सीता की सारी सूचना देते हैं.

युद्धकाण्डम् / वाल्मीकि रामायण लंकाकाण्ड / रामायण की कहानी हिंदी में

लंका कांड को युद्ध कांड भी कहा जाता है क्यूंकी उस कांड में भगवान राम की सेना और रावण की सेना के बीच युद्ध को दर्शाया गया है.

जब भगवान राम को अपनी पत्नी माता सीता की सूचना हनुमान से प्राप्त होती है तब भगवान राम और लक्ष्मण अपने साथियों और वानर दल के साथ दक्षिणी समुंद्र के किनारे पर पहुंचते हैं.

नल और नील नामक दो वानरों की सहायता से पूरा वानर दल मिलकर समुद्र को पार करने के लिए रामसेतु का निर्माण करते हैं, ताकि भगवान राम और उनकी वानर सेना लंका तक पहुंच सके.

वहीं पर भगवान राम की मुलाकात रावण के भेदी भाई विभीषण से होती है, जो रावण और लंका की पूरी जानकारी वह भगवान राम को देते हैं.

लंका पहुंचने के बाद भगवान राम और लंकापति रावण का भीषण युद्ध हुआ, जिसमें भगवान राम ने रावण का वध कर दिया.

इसके बाद प्रभु राम ने रामवान के छोटे भाई विभीषण को लंका का सिंहासन पर बिठा दिया। भगवान राम माता सीता से मिलने पर उन्हें अपनी पवित्रता सिद्ध करने के लिए अग्निपरीक्षा से गुजरने को कहते हैं, क्योंकि प्रभु राम माता सीता की पवित्रता के लिए फैली अफवाहों को गलत साबित करना चाहते हैं.

जब माता सीता ने अग्नि में प्रवेश किया तो उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ वह अग्नि परीक्षा में सफल हो गई.

अब भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण वनवास की अवधि समाप्त कर अयोध्या लौट जाते हैं। और अयोध्या में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ भगवान राम का राज्याभिषेक होता है| इस तरह से रामराज्य की शुरुआत होती है.

वाल्मीकिरामायणम् उत्तरकाण्डम् – रामायण कथा श्री राम की कथा

दोस्तों उत्तरकांड महर्षि वाल्मीकि की वास्तविक कहानी का वाद का अंश माना जाता है| इस कांड में भगवान राम के राजा बनने के बाद भगवान राम अपनी पत्नी माता सीता के साथ सुखद जीवन व्यतीत करते हैं.

कुछ समय बाद माता सीता गर्भवती हो जाती हैं, लेकिन जब अयोध्या के वासियों को माता सीता की अग्नि परीक्षा की खबर मिलती है तो आम जनता और प्रजा के दबाव में आकर भगवान राम अपनी पत्नी सीता को अनिच्छा से वन भेज देते हैं.

रामायण लव कुश कांड – जन्म

वन में महर्षि वाल्मीकि माता सीता को अपनी आश्रम में आश्रय देते हैं, और वहीं पर माता सीता भगवान राम के दो जुड़वा पुत्रों लव और कुश को जन्म देती है.

लव और कुश महर्षि वाल्मीकि के शिष्य बन जाते हैं और उनसे शिक्षा ग्रहण करते है|

महर्षि वाल्मीकि ने यही रामायण की रचना की और लव कुश को इस का ज्ञान दिया| बाद में भगवान राम अश्वमेध यज्ञ का आयोजन करते हैं जिसमें महर्षि वाल्मीकि लव और कुश के साथ जाते हैं.

भगवान राम और उनकी जनता के समक्ष लव और कुश महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण का गायन करते हैं| जब गायन करते हुए लव कुश को माता सीता को वनवास दिए जाने की खबर सुनाई जाती है तो भगवान राम बहुत दुखी होते हैं| तब वहां माता सीता आ जाती हैं.

उसी समय भगवान राम को माता सीता लव कुश के बारे में बताती हैं.. भगवान राम को ज्ञात होता है कि लव कुश उनके ही पुत्र हैं और फिर माता सीता धरती ममाँ को अपनी गोद में लेने के लिए पुकारती हैं, और धरती के फटने पर माता सीता उसमें समा जाती हैं.

कुछ वर्षों के बाद देवदूत आकर भगवान राम को यह सूचना देते हैं कि उनके रामअवतार का प्रयोजन अब पूरा हो चुका है, और उनका यह जीवन काल भी खत्म हो चुका है.

तब भगवान राम अपने सभी सगे-संबंधी और गुरुजनों का आशीर्वाद लेकर सरयू नदी में प्रवेश करते हैं| और वहीं से अपने वास्तविक विष्णु रूप धारण कर अपने धाम चले जाते हैं.

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सम्पूर्ण महाभारत ⇓

Himanshu Grewal

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