Poem on Independence Day in Hindi – Desh Bhakti Kavita

15th अगस्त 2019 के इस खास अवसर पर मैं आप सभी भारत देशवासियों के साथ Poem on Independence Day in Hindi Language में प्रस्तुत करने जा रहा हूँ.

Independence Day को India Independence Day के नाम से भी जाना जाता है जो कि हर साल 15 August 2019 के दिन मनाया जाता है.

Independence Day को हिंदी में स्वतंत्रता दिवस कहते है| सभी भारतियों के लिए स्वतंत्रता दिवस का दिन बहुत ही खास दिन है| 200 साल तक ब्रिटिश साम्राज्य की गुलामी के पश्चात 15 अगस्त 1947 के दिन हमारा भारत देश आजाद हुआ था.

अगर आपको 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करनी है तो आप स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाया जाता है वाला लेख पढ़ सकते हो|

15 अगस्त, 1947 आजादी का वो दिन याद करते हुए आज मैं आप सभी के साथ 15 अगस्त पर देशभक्ति कविता प्रस्तुत करने जा रहा हूँ|

इसे भी पढ़े: हिंदुस्तान देश के महान शहीद वीरों के लिए स्वतंत्रता दिवस पर शायरी

देश भक्ति कविता को पढ़ने से पहले अगर आप छात्र हो, टीचर हो और आपके विद्यालय में भाषण की प्रतियोगिता है तो हमने आप सभी के लिए 15 अगस्त पर भाषण का लेख लिखा हुआ हैं जिसका लिंक आपको नीचे मिलेगा|


Motivational Quotes in Hindi on Independence Day

इन 5 कविताओं से आती है वतन की ‘खुशबू’


Poem on Independence Day in Hindi 2019

नोट: यहाँ पर जितनी भी Happy Independence Day Hindi Poem हैं इनको आप कॉपी करके अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हो और हमको कमेंट करके अवश्य बताये कि आपको यह देशभक्ति पोएम कैसी लगी जिससे हम आप सभी के लिए और पोएम यहाँ ऐड कर सके|

Poem on Indian National Flag in Hindi

आज तिरंगा फहराता है अपनी पूरी शान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी।
लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी।।
व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया।
हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी।।

हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है।
जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है।।
प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर।
हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है।।

लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है।
उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है।।
हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे।
सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है।।

विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।


Short Desh Bhakti Poem in Hindi For Class 1 To 12

Desh Bhakti Kavita in Hindi For Class 6

जब भारत आज़ाद हुआ था|
आजादी का राज हुआ था||

वीरों ने क़ुरबानी दी थी|
तब भारत आज़ाद हुआ था||

भगत सिंह ने फांसी ली थी|
इंदिरा का जनाज़ा उठा था||

इस मिटटी की खुशबू ऐसी थी
तब खून की आँधी बहती थी||

वतन का ज़ज्बा ऐसा था|
जो सबसे लड़ता जा रहा था||

लड़ते लड़ते जाने गयी थी|
तब भारत आज़ाद हुआ था||

फिरंगियों ने ये वतन छोड़ा था|
इस देश के रिश्तों को तोडा था||

फिर भारत दो भागो में बाटा था|
एक हिस्सा हिन्दुस्तान था||

दूसरा पाकिस्तान कहलाया था|
सरहद नाम की रेखा खींची थी||

जिसे कोई पार ना कर पाया था|
ना जाने कितनी माये रोइ थी,
ना जाने कितने बच्चे भूके सोए थे,
हम सब ने साथ रहकर
एक ऐसा समय भी काटा था||

विरो ने क़ुरबानी दी थी
तब भारत आज़ाद हुआ था||


Heart Touching Desh Bhakti Poem on Independence Day in Hindi

सपनों का भारत

आज़ादी के साल हुए कई,
पर क्या हमने पाया है.

सोचा था क्या होगा लेकिन,
सामने पर क्या औया है.

रामराज्य-सा देश हो अपना
बापू का था सपना,
चाचा बोले आगे बढ़ कर
कर लो सब को अपना.

आज़ादी फिर छीने न अपनी
दिया शास्त्री ने नारा,
जय-जयकार किसान की अपनी
जय जवान हमारा.

सोचो इनके सपनों को हम
कैसे साकार करेंगे,
भ्रष्टाचार हटा देंगे हम
आगे तभी बढ़ेंगे.

मुश्किल नहीं पूरा करना
इन सपनों का भारत,
अपने अन्दर की शक्ति को
करो अगर तुम जाग्रत.

आओ मिलकर कसम ये खायें,
ऐसा सभी करेंगे,
शिक्षित हो अगर हर बच्चा,
उन्नति तभी हम करेंगे.


15 August Poem in Hindi for School Students – Independence Day Poem in Hindi

(देश मेरा यह)

देश मेरा यह सबसे न्यारा
कितना सुंदर, कितना प्यारा|

पर्वत ऊँचे ऊँचे इसके
करते हैं रखवाली|

लंबी लंबी नदियाँ इसकी
फैलाएँ हरियाली|

देश मेरा यह सबसे न्यारा
कितना सुंदर, कितना प्यारा|

झर-झर करते निर्मल झरने
गीत ख़ुशी के गाएं|

सर सर करती हवा चले तो
पेड़ खड़े लहराए…

देश मेरा यह सबसे न्यारा
कितना सुंदर, कितना प्यारा|

बारी-बारी रितुए आतीं
अपनी छटा दिखलाती

फल-फूलों से भरे बगीचे
चिड़ियाँ मीठे गीत सुनाती,

देश मेरा यह सबसे न्यारा
कितना सुंदर, कितना प्यारा|

कितना प्यारा देश हमारा
सबको है यह भाता,

इस धरती का बच्चा-बच्चा
गुन इसके है गाता,

देश मेरा यह सबसे न्यारा
कितना सुंदर, कितना प्यारा|


Short Poem on Independence Day in Hindi | Desh Bhakti Kavita

आह्वान: अशफाकउल्ला खां

कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएंगे,
आजाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे
हटने के नहीं पीछे, डरकर कभी जुल्मों से
तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे
बेशस्त्र नहीं हैं हम, बल है हमें चरख़े का,
चरख़े से ज़मीं को हम, ता चर्ख़ गुंजा देंगे
परवाह नहीं कुछ दम की, ग़म की नहीं, मातम की,

है जान हथेली पर, एक दम में गंवा देंगे
उफ़ तक भी जुबां से हम हरगिज़ न निकालेंगे
तलवार उठाओ तुम, हम सर को झुका देंगे
सीखा है नया हमने लड़ने का यह तरीका
चलवाओ गन मशीनें, हम सीना अड़ा देंगे
दिलवाओ हमें फांसी, ऐलान से कहते हैं
ख़ूं से ही हम शहीदों के, फ़ौज बना देंगे
मुसाफ़िर जो अंडमान के, तूने बनाए, ज़ालिम
आज़ाद ही होने पर, हम उनको बुला लेंगे ||


Independence Day Poem in Hindi For Kids – Poem on Freedom Fighters in Hindi

Desh Bhakti Poem in Hindi

चिश्ती ने जिस ज़मीं पे पैग़ामे हक़ सुनाया,
नानक ने जिस चमन में बदहत का गीत गाया,
तातारियों ने जिसको अपना वतन बनाया,
जिसने हेजाजियों से दश्ते अरब छुड़ाया,
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है॥

सारे जहाँ को जिसने इल्मो-हुनर दिया था,
यूनानियों को जिसने हैरान कर दिया था,
मिट्टी को जिसकी हक़ ने ज़र का असर दिया था
तुर्कों का जिसने दामन हीरों से भर दिया था,
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है॥

टूटे थे जो सितारे फ़ारस के आसमां से,
फिर ताब दे के जिसने चमकाए कहकशां से,
बदहत की लय सुनी थी दुनिया ने जिस मकां से,
मीरे-अरब को आई ठण्डी हवा जहाँ से,
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है॥

बंदे किलीम जिसके, परबत जहाँ के सीना,
नूहे-नबी का ठहरा, आकर जहाँ सफ़ीना,
रफ़अत है जिस ज़मीं को, बामे-फलक़ का ज़ीना,
जन्नत की ज़िन्दगी है, जिसकी फ़िज़ा में जीना,
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है॥

गौतम का जो वतन है, जापान का हरम है,
ईसा के आशिक़ों को मिस्ले-यरूशलम है,
मदफ़ून जिस ज़मीं में इस्लाम का हरम है,
हर फूल जिस चमन का, फिरदौस है, इरम है,
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है॥


Happy Independence Day Poem in Hindi For Kids – Poem on Independence Day in Hindi

Desh Bhakti Poem in Hindi For Kids

भारत मेरा प्यारा देश,
सब देशो से न्यारा देश|
भारत मेरा प्यारा देश,
सब देशो से न्यारा देश|

हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई
मिलकर रहते सिख-ईसाई|
हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई
मिलकर रहते सिख-ईसाई|

इसकी धरती उगले सोना,
ऊँचा हिमगिरी बड़ा सलोना|
इसकी धरती उगले सोना,
ऊँचा हिमगिरी बड़ा सलोना|

सागर धोता इसके पाँव,
हैं इसके अलबेले गाँव|
सागर धोता इसके पाँव,
हैं इसके अलबेले गाँव|

भारत मेरा प्यारा देश,
सब देशो से न्यारा देश|


Hindi Poem on Independence Day of India – स्वतंत्रता दिवस पर कविता हिंदी में

हम भारतीय कहलाते हैं

हम बच्चे हँसते गाते हैं|
हम आगे बढ़ते जाते हैं|

पथ पर बिखरे कंकड़ काँटे,
हम चुन चुन दूर हटाते हैं|

आयें कितनी भी बाधाएँ,
हम कभी नही घबराते हैं|

धन दोलत से ऊपर उठ कर,
सपनों के महल बनाते हैं|

हम ख़ुशी बाँटते दुनिया को,
हम हँसते और हँसाते हैं|

सारे जग में सबसे अच्छे,
हम भारतीय कहलाते हैं|


भारत का गणतंत्र दिवस

मैं आशा करता हूँ कि यहाँ पर जितनी भी Poem on Independence Day in Hindi Language में हैं आपको पसंद आई होगी और आप इन सभी पोएम का इस्तेमाल जरुर करेंगे.

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आप सभी भारतीयों को स्वतंत्रता दिवस को शुभकामना 🙂

Indian Independence Day
Poem on Independence Day in Hindi - Desh Bhakti Kavita

Independence Day is annually celebrated on 15 August, as a national holiday in India commemorating the nation's independence from the United Kingdom on 15 August 1947, the UK Parliament passed the Indian Independence Act 1947 transferring legislative sovereignty to the Indian Constituent Assembly.

Editor's Rating:
4.8
Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमे आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

9 thoughts on “Poem on Independence Day in Hindi – Desh Bhakti Kavita”

  1. जब भारत आज़ाद हुआ था|
    आजादी का राज हुआ था||

    वीरों ने क़ुरबानी दी थी|
    तब भारत आज़ाद हुआ था|

    भगत सिंह ने फांसी ली थी|
    इंदिरा का जनाज़ा उठा था||

    इस मिटटी की खुशबू ऐसी थी
    तब खून की आँधी बहती थी||

    वतन का ज़ज्बा ऐसा था|
    जो सबसे लड़ता जा रहा था||

    लड़ते लड़ते जाने गयी थी|
    तब भारत आज़ाद हुआ था||

    फिरंगियों ने ये वतन छोड़ा था|
    इस देश के रिश्तों को तोडा था||

    फिर भारत दो भागो में बाटा था|
    एक हिस्सा हिन्दुस्तान था||

    दूसरा पाकिस्तान कहलाया था|
    सरहद नाम की रेखा खींची थी||

    जिसे कोई पार ना कर पाया था|
    ना जाने कितनी माये रोइ थी,
    ना जाने कितने बच्चे भूके सोए थे,
    हम सब ने साथ रहकर
    एक ऐसा समय भी काटा था||

    विरो ने क़ुरबानी दी थी
    तब भारत आज़ाद हुआ था||

    Sir,
    Poem is very fine but I want to know that भगत सिंह ने फांसी ली थी|
    इंदिरा का जनाज़ा उठा था||what is this C, I want to know about this para. at the time of independence Smt. Indira gandhi is alive then why you write in your poem इंदिरा का जनाज़ा उठा था . please clear other wise I am going to take action against you.

  2. घायल पड़ा शेर है, फिर भी जज़्बा कमाल का है
    जेल में सड़ी गली रोटियाँ है फिर भी आज़ादी की बिंगुल बजा रहा है
    पानी को तरसा है पर खून में उफ़ान है
    ऐसे शहीदों को हम देशवासियो का नमन बारम्बार है।

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