महान लोगो की महान मोटिवेशनल स्पीच – भगवान गौतम बुद्ध

महान लोगो की महान मोटिवेशनल स्पीच – भगवान गौतम बुद्ध
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आज आपको मोटिवेशनल भाषण अर्थात Motivational Speech in Hindi Language में पढ़ने को मिलेगी, जिसको आप मोटिवेशनल स्पीच के तौर पर इस्तेमाल में ला सकते हैं.

दुनिया का हर एक व्यक्ति फिर चाहे हम अमीर इंसान की बात करे या फिर गरीब की, सभी अपनी जिंदगी में जब असफलता या नकामियाबी से मिलते हैं तो बहुत दुखी होते हैं.

स्कूल जाने वाले बच्चो के लिए नकामियाबी तब मानी जाती है जब वो किसी परीक्षा में अच्छे अंक नहीं ला पाते हैं|

वही एक बड़े युवा या फिर हम किसी ऐसे इंसान की बात करे जो नौकरी या बिज़नस कर अपने घर का खर्च उठाते हैं तो उनके अनुसार वो जिस भी चीज को पाना चाहते हैं और वो नहीं मिल पाती है तो वो उनके लिए जीवन का एक ऐसा पल होता है जब वो हारा हुआ महसूस करते हैं.

अब ऐसे परिस्थिति में, यदि उन बच्चो के माता-पिता, शिक्षक या उनके बड़े भाई उनको किसी कहानी की मदद से उनकी हिम्मत जुटाएँ और ठीक उसी तरह से वर्किंग इंसान को उनका बॉस समझाएं तो उन लोगो के लिए उस परिस्थिति में अपने आपको संभाल पाना और भी आसान हो जाता है.

टिप्स ⇒ यदि आप स्कूल जाने वाले एक छात्र हैं, तो आप इस कहानी को अपने विद्यालय में प्रार्थना सभा के वक्त स्टेज पर जा कर सुना सकते हैं.

तो चलिये दोस्तों, समय को बचाते हुए आगे बढ़ते हैं और पढ़ते हैं इस प्रेरणादायक कहानी को| इस कहानी को पढ़ने के बाद आपको क्या सीखने को मिला आप कमेंट कर बताना मत भूलिएगा.

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Motivational Speech in Hindi – मोटिवेशनल स्टोरी

मेरी यह कहानी भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों से जुड़ी हुई है, आशा करता हूँ इस मोटिवेशनल स्टोरी से आपको प्रेरणा मिले और आप इसको अपने दोस्तों के साथ भी शेयर जरूर करें.

Life Management Lessons From Gautam Buddha in Hindi

Best Motivational Speech in Hindi For Students

गौतम बुद्ध हमेशा अपने शिष्यों को कुछ अच्छा एवं कुछ नया सिखाने में लगे रहते थे| एक दिन की बात है, सुबह के समय जब गौतम बुद्ध अपने शिष्यों को पढ़ाने के लिए पहुचे|

उनके शिष्य जो उनके इंतज़ार में बैठे थे, वो उनको देख कर हैरान हो गए क्यूंकि ऐसा पहली बार हुआ था कि गौतम बुद्ध अपने साथ अपने हाथ में कुछ लेकर आए थे|

जब वे बच्चों के समीप पहुंचे तो बच्चों ने देखा की उनके हाथ में रस्सी है|

गौतम बुद्ध ने बिना कुछ कहे ही अपना आसन ग्रहण किया और फिर उस रस्सी में गिठ लगाने लग गए| वहाँ उपस्थित उनके शिष्य यह सोच रहे थे कि गौतम बुद्ध ऐसा क्यों कर रहे हैं और उनका अगला स्टेप क्या होने वाला है|

तभी गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों से एक प्रश्न किया – मैंने इस रस्सी में 3 गाँठ लगा दी है, अब मैं आपसे यह जानना चाहता हूँ कि क्या यह अब भी वही रस्सी है जो गीठ लगाने से पूर्व थी या फिर अब बदलाव आ गया है?

वहाँ उपस्थित उनके शिष्यों में से एक शिष्य ने उत्तर दिया कि – गुरु जी इसका उत्तर देना थोड़ा कठिन है, यह वास्तव में हमारे उस रस्सी को देखने के तरीके पर निर्भर करता है|

एक दृष्टिकोण से देखे तो यह अब भी वही रस्सी है, जो गीठ लगाने से पूर्व थी| लेकिन वही अगर हम इसे दूसरे तरीके से देखे तो अब इस रस्सी में 3 गीठ पड़ चुकी है, जो कि पहले नहीं थी|

अतः हम यह बोल सकते हैं कि इसमे बदलाव आया है पर यह भी ध्यान देने वाली बात है कि बाहर से देखने में भले यह बदली हुई प्रतीत होती हो परंतु अंदर से तो यह अब भी वही है जो पहले थी|

इसका बुनियादी स्वरूप परिवर्तित है, – सत्य है, यह कह कर गौतम बुद्ध ने बोला अब मैं इन गाठ को खोल देता हूँ और फिर वह रस्सी के दोनों सिरो को पकड़ कर एक दूसरे से दूर खिचने लगे|

फिर कुछ समय बाद गौतम बुद्ध ने फिर से सवाल किया – क्या मेरे ऐसे प्रयास करने से इस रस्सी में लगी गांठ खुल जाएगी?

तभी एक शिष्य ने जवाब दिया – नहीं, नहीं ऐसा करने से तो यह गाँठे और भी कस जाएंगी, और फिर इन्हे खोलना और भी मुश्किल हो जाएगा|

गौतम बुद्ध ने बोला – ठीक है और एक आखिरी प्रश्न – इन गांठ को खोलने के लिए हमे क्या करना होगा?

एक शिष्य ने जवाब दिया – इसके लिए तो हमे इन गांठ को ध्यानपूर्वक देखना होगा कि यह गांठ किस तरह से लगाई गई है और फिर हमे उसको धीरे-धीरे प्रयास करके खोलना होगा|

उस जवाब को सुनते ही गौतम बुद्ध ने कहा – मैं यही तो सुनना चाहता था, मूल प्रश्न यही है कि जिस समस्या में तुम फसे हो, वास्तव में उसका कारण क्या है?

बिना कारण जाने निवारण करना मुश्किल है, मैं देखता हूँ कि कई लोग बिना कारण जाने ही निवारण करना चाहते हैं, कोई भी मुझसे यह सवाल नहीं करता कि मुझे क्रोध क्यों आता है, बल्कि लोग पूछते हैं मैं अपने क्रोध का अंत कैसे करू?

कोई मुझसे यह नहीं पूछता कि मेरे अंदर अहंकार का बीज़ आया कहा से, लोग हमेशा मुझसे पूछते हैं मैं अपना अहंकार खत्म कैसे करू?

तो मेरे प्रिय शिष्यों जिस प्रकार रस्सी में गांठ लगने से उसकी बुनियादी स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं आता है, ठीक उसी प्रकार से किसी मनुष्य के अंदर किसी एक खराब आदत के आ जाने से उसकी अच्छाई कभी भी समाप्त नहीं होती|

जिस प्रकार हम इस रस्सी में लगी गाँठ को खोल सकते हैं, ठीक उसी प्रकार से हम अपनी ज़िंदगी की समस्या का भी हल निकाल सकते हैं|

इस बात को आपको समझना जरूरी है कि जीवन है तो समस्या का होना भी निश्चित है और फिर उसका समाधान भी आवश्य ही होगा|

अगर किसी चीज की जरूरत है तो वो यह है कि हमे उस समस्या के कारण का पता लगाना, यदि हम उसको अच्छी तरीके से जान लें तो उसका निवारण अपने-आप ही प्राप्त हो जाएगा|

यह कह कर गौतम बुद्ध ने अपने उस दिन के शिक्षा सभा की समाप्ती की, और अब मैं भी इसी तरह से अपने लेख की समाप्ती भी कर रहा हूँ|

यदि इस लेख से जुड़ी कोई समस्या है तो आप बेझिझक होकर कमेंट या मेल कर के सवाल कीजिए, मैं जल्द से जल्द आपको उत्तर दूंगा|

आशा है आपको मोटिवेशनल स्टोरी का यह लेख पसंद आया होगा, इस Motivational Speech in Hindi को शेयर करना ना भूले.

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Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमे आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

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