प्रेरणादायक कहानी

पैसों की दिखावटी दुनिया – Episode 1

Shri Krishna Gyan
Written by Himanshu Grewal

पैसों की दिखावटी दुनिया – Shri Krishna Gyan


आज हम बात करेंगे आडंबर या दिखावे की जो हमारे जीवन में बिन बुलाए ही आ जाता है।

जैसे मान लीजिए हमारा पड़ोसी लाखों रुपए महीना कमाता है। वह अक्सर नए नए ढंग के फोन और महंगी गाड़ियां लेकर आता है। हम उसके बराबर की आमदनी नहीं करते लेकिन हमारे मन में उसे यह दिखाने की लालसा जागती है कि हम तुम से कम नहीं है।

हम उसी तरह की घड़ियां और फोन खरीदने निकल पड़ते हैं। हम कभी नहीं सोचते कि जाने-अनजाने हमें दिखावे या आडंबर की महाघातक बीमारी ने चपेट में ले लिया है।

क्या आपने कभी इस दिखावे के बारे में सोचा है?

यह दिखावा और कुछ नहीं एक मानसिक बीमारी है।

हमने अक्सर समझदार लोगों को इसके फंदे में पाया है, यह और कुछ नहीं करती बस इतना ही करती है कि आपसे विवेचना और समझ की शक्ति छीन लेती है और एक ऐसी अंधी दौड़ में कूद जाने के लिए तैयार कर देती है जिसका कोई सार्थक अंत नहीं दिखता।

मैं एक उदाहरण देता हूं…

आपकी आमदनी लगभग ₹100000 महिना है लेकिन आपके पड़ोसी की आमदनी ₹500000 महीना है और आपका पड़ोसी हर महीने लाख रुपए का दिखावटी सामान खरीदता है, हर हफ्ते महंगे होटलों में खाना खाता है।

आप बिना विचार किए देखा देखी या आडंबर के जाल में आकर अपने पड़ोसी की राह चल निकलते हैं, उनकी नकल में आप यही नहीं रुकते बल्कि साधारण तरीके से रेल की यात्रा ना करके हवाई यात्रा करने लगते हैं…

आप अपनी आमदनी और अपने खर्च के अनुपात को भूलकर केवल पड़ोसी के खर्च की प्रतियोगिता पर उतर आते है और आडंबर को ध्यान में रखते हैं। आप वैसे ही जीना चाहते है जैसे पड़ोसी या संबंधी जीते हैं।

महीने, 2 महीने या 3 महीने के बाद होने वाली आपकी उलझन का हर कोई सरलता से अंदाजा लगा सकता है…

ऐसा नहीं कि इस दिखावे के जंजाल से आप बच नहीं सकते हैं बस पड़ोसी या संबंधी क्या खरीद रहे हैं इस पर ध्यान देने के स्थान पर आप इस पर ध्यान दें कि उनकी खरीद के पीछे कितना उनका धनबल है और कितना आडंबर….

एक बार अगर आपने इस सरल गणित को समझ लिया तो जीवन में आप कभी भी किसी तरह के आडंबर के खेल में नहीं फसेंगे।

What do we mean by Motivation?

  • प्रेरणा क्या है?

अभिप्रेरणा शब्द  ‘प्रेरणा’ शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ है व्यक्तियों के भीतर आवश्यकताएं, इच्छाएं, चाहतें हैं। यह लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लोगों को कार्यों के लिए उत्तेजित करने की प्रक्रिया है। कार्य लक्ष्य संदर्भ में लोगों के व्यवहार को उत्तेजित करने वाले मनोवैज्ञानिक कारक हो सकते हैं। जैसे-

  1. पैसे की इच्छा
  2. सफलता
  3. मान्यता
  4. कार्य संतुष्टि
  5. टीम का काम, आदि

प्रबंधन के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक यह है कि कर्मचारियों के बीच अपनी क्षमताओं का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की इच्छा पैदा करना। इसलिए एक नेता की भूमिका उनकी नौकरियों में कर्मचारियों के प्रदर्शन में रुचि जगाना है। प्रेरणा की प्रक्रिया में तीन चरण होते हैं:-

  1. When needs are satisfied, the satisfaction or accomplishment of goals.
  2. A stimulus in which needs have to be aroused
  3. A felt need or drive

इसलिए, हम कह सकते हैं कि प्रेरणा एक मनोवैज्ञानिक घटना है जिसका अर्थ है कि एक प्रोत्साहन योजना तैयार करके व्यक्तियों की जरूरतों और इच्छाओं से निपटना होगा।

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About the author

Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमे आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

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