Independence Day (India)

स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर कविता (देशभक्ति पोएम)

15 अगस्त पर कविता
Written by Himanshu Grewal
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Independence Day Poem in Hindi

सभी भारतियों के लिए स्वतंत्रता दिवस का दिन बहुत ही ख़ास दिन होता है और उस ख़ास दिन के उपलक्ष में आज मैं आप सभी भारतियों के लिए स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर कविता प्रस्तुत करने जा रहा हूँ.

200 साल ब्रिटिश साम्राज्य की गुलामी के पश्चात 15 अगस्त 1947 के दिन हमारा भारत देश आजाद हुआ था.

हालाँकि भारत देश को आजाद कराना बहुत ही कठिन और असम्भव था परन्तु भारत के कुछ महान देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानियों की वजह से ब्रिटिश साम्राज्य को भारत देश को छोरकर जाना पढ़ा और 15 अगस्त के दिन भारत पूर्णत: स्वतंत्रता हो गया.

अगर आपको स्वतंत्रता दिवस के इतिहास के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करनी है तो आप 15 अगस्त भारत का स्वतंत्रता दिवस पर क्लिक करके जानकारी प्राप्त कर सकते हो.

राष्ट्रीय गान : Jana Gana Mana Lyrics in Hindi

यह तो थी थोड़ी बहुत जानकारी स्वतंत्रता दिवस की अब हम अपने इस आर्टिकल को आगे बढ़ाते है और स्वतंत्रता दिवस पर बाल कविता को पढ़ना शुरू करते हैं.

यह जो Swatantra Diwas Par Desh Bhakti Kavita मैं आपके साथ शेयर करने जा रहा हूँ इसको आप अपने स्कूल या कॉलेज में बोल कर सुना सकते हो और देश के प्रति अपना प्यार जाहिर कर सकते हो.

तो आईये दोस्तों अब हम देशभक्ति कविता को पढ़ना शुरू करते है:-


नोट: अगर आपके विद्यालय में भाषण की प्रतियोगिता है तो आप नीचे दिए गये लिंक पर क्लिक करके स्वतंत्रता दिवस का भाषण डाउनलोड कर सकते हो|

15 अगस्त पर कविता

independence day poem in hindi

नोट: इस Desh Bhakti Poem को पढ़ने के बाद हमको कमेंट करके जरूर बताए कि आपको 15 अगस्त पर कविता कैसी लगी और अगर आपको Independence Day Hindi Poem पसंद आये तो इस कविता को आप सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें. 🙂

2021 Independence Day Poem in Hindi

15 अगस्त पर देशभक्ति कविता

आज विदा की वेला आई,
सरहद मुझे पुकारती|
आज विदा की वेला आई,
सरहद मुझे पुकारती|

भरत भारती का मैं बैटा
शेरों के संग पला बढ़ा हूँ,

माँ का मान बचाने को मैं
इन शिखरों पर सदा चढ़ा हूँ|

अरिदल चढ़ आया सीमा पर
विकल हुई माँ भारती,
अरिदल चढ़ आया सीमा पर
विकल हुई माँ भारती,

आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती| (2)

नन्दन-वन के शेरों को
एक गीदड़ ने धमकाया है,

घर में बैठे-बैठे उसने
अपना काल बुलाया है|
घर में बैठे-बैठे उसने
अपना काल बुलाया है|

उस कायर की करतूतों को
सारी दुनिया धिक्कारती (2)

आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती|
आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती|

उसके सीने की चोड़ाई
मेरी गोली नापेगी,

ऐसी दूंगा मोत, नरक में
उसकी रूह भी कांपेगी|
ऐसी दूंगा मोत, नरक में
उसकी रूह भी कांपेगी|

'बन जाऊँगी काल'
'बन जाऊँगी काल'
मेरी बंदूक की नाल दहाड़ती,

आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती|
आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती|

बनकर लावा अब फूटेगा
ठंडा बर्फ हिमालय का,
बनकर लावा अब फूटेगा
ठंडा बर्फ हिमालय का,

मेरा शोणित घोण करेगा
भारत माँ की जय-जय का| (2)

अरिमुंडो की माला के संग
भाव भरी हो आरती,
आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती| (2)

कश्मीर की क्यारी को अब
अपने खून से सिचुंगा,
कारगिल के रश्मि-रंथो को
अन्त समय तक खीचूँगा|

अब तो मुझको बनना ही है
कृष्ण सरीखा सारथी,
अब तो मुझको बनना ही है
कृष्ण सरीखा सारथी,

आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती| (2)

माँ के चरणों के वन्दन को
अपना शीश चढ़ा दूंगा,
माँ के चरणों के वन्दन को
अपना शीश चढ़ा दूंगा,

जननी का जो दूध रगों में
उसका कर्ज चूका दूंगा| (2)

चलती जो हर सांस,
इसी माता ने मुझे उधार दी, (2)

आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती|
आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती|

|| जय हिन्द – स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति कविता ||


Short Poem on Independence Day in Hindi For Class 1 To 8

“मेरा देश”

प्यारा प्यारा मेरा देश,
सबसे न्यारा मेरा देश।

दुनिया जिस पर गर्व करे,
ऐसा सितारा मेरा देश।

चांदी सोना मेरा देश,
सफ़ल सलोना मेरा देश।

गंगा जमुना की माला का,
फूलोँ वाला मेरा देश।

आगे जाए मेरा देश,
नित नए मुस्काएं मेरा देश।

इतिहासों में बढ़ चढ़ कर,
नाम लिखायें मेरा देश।

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15 August Poem in Hindi For School Students

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा लिरिक्स | Vijayi Vishwa Tiranga Pyara Jhanda Uncha Rahe Hamara Hindi Song

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

सदा शक्ति बरसाने वाला,
प्रेम सुधा सरसाने वाला
वीरों को हर्षाने वाला
मातृभूमि का तन-मन सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

स्वतंत्रता के भीषण रण में,
लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में,
काँपे शत्रु देखकर मन में,
मिट जाये भय संकट सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

इस झंडे के नीचे निर्भय,
हो स्वराज जनता का निश्चय,
बोलो भारत माता की जय,
स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

आओ प्यारे वीरों आओ,
देश-जाति पर बलि-बलि जाओ,
एक साथ सब मिलकर गाओ,
प्यारा भारत देश हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

इसकी शान न जाने पावे,
चाहे जान भले ही जावे,
विश्व-विजय करके दिखलावे,
तब होवे प्रण-पूर्ण हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

– श्यामलाल गुप्त पार्षद की रचना


Independence Day Patriotic Poems in Hindi

“आज़ादी”

भागी परतंत्रता,
आयी स्वतंत्रता,
दिखलायी वीरता,
वीरों की ललकार,
देशभक्त की पुँकार,
आगे बढ़े तरुणाई
भारत को सजायेंगे
रक्षक हम आज़ादी के
गौरव को बढ़ायेंगे
रह्स्त्र गीत गाएंगे,
तिरंगा लहरायेंगे..!

हिंदी कविता 15 अगस्त पर: 15 August Patriotic Poems in Hindi

ऐ मेरे प्यारे वतन लिरिक्स इन हिंदी | Aye Mere Pyare Watan Lyrics in Hindi

ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन
तुझ पे दिल क़ुरबान
तू ही मेरी आरज़ू, तू ही मेरी आबरू
तू ही मेरी जान

(तेरे दामन से जो आए उन हवाओं को सलाम
चूम लूँ मैं उस ज़ुबाँ को जिसपे आए तेरा नाम ) - २
सबसे प्यारी सुबह तेरी
सबसे रंगीं तेरी शाम
तुझ पे दिल क़ुरबान ...

(माँ का दिल बनके कभी सीने से लग जाता है तू
और कभी नन्हीं सी बेटी बन के याद आता है तू ) - २
जितना याद आता है मुझको
उतना तड़पाता है तू
तुझ पे दिल क़ुरबान ...

(छोड़ कर तेरी ज़मीं को दूर आ पहुंचे हैं हम
फिर भी है ये ही तमन्ना तेरे ज़र्रों की क़सम ) - २
हम जहाँ पैदा हुए
उस जगह पे ही निकले दम
तुझ पे दिल क़ुरबान...

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर कविता

भारत देश हमारा प्यारा गीत | Bharat Desh Hamara Pyara Poem

भारत देश हमारा प्यारा।
सारे विश्व में हैं न्यारा।

अलग अलग हैं यहाँ रूप रंग।
पर सभी एक सुर में गाते।

झेंडा ऊँचा रहे हमारा।
हर परदेश की अलग जुबान।

पर मिठास की उनमे शान।
अनेकता में एकता पिरोकर।

सबने मिल जुल कर देश संवारा।
लगा रहा हैं भारत सारा।
‘हम सब एक हैं’ का नारा।

15 अगस्त पर कविता: Independence Day Poem in Hindi For Nursery

Sare Jahan Se Achha Hindustan Hamara Lyrics in Hindi

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा।।

ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में।
समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा।। सारे...

परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का।
वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा।। सारे...

गोदी में खेलती हैं, उसकी हज़ारों नदियाँ।
गुलशन है जिनके दम से, रश्क-ए-जिनाँ हमारा।। सारे....

ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा! वो दिन है याद तुझको।
उतरा तेरे किनारे, जब कारवाँ हमारा।। सारे...

मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना।
हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्ताँ हमारा।। सारे...

यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा, सब मिट गए जहाँ से।
अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशाँ हमारा।। सारे...

कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी।
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा।। सारे...

'इक़बाल' कोई महरम, अपना नहीं जहाँ में।
मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहाँ हमारा।। सारे...

प्रश्न: सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा किसने लिखा था?
उत्तर: मुहम्मद इक़बाल


स्वतंत्रता दिवस पर कविता: Hindi Poems Independence Day 2020

“ध्वजा वंदना”

नमो, नमो, नमो।
नमो स्वतंत्र भारत की ध्वजा, नमो, नमो!

नमो नगाधिराज – शृंग की विहारिणी!
नमो अनंत सौख्य – शक्ति – शील – धारिणी!
प्रणय – प्रसारिणी, नमो अरिष्ट – वारिणी!
नमो मनुष्य की शुभेषणा – प्रचारिणी!
नवीन सूर्य की नई प्रभा, नमो, नमो!

हम न किसी का चाहते तनिक अहित, अपकार।
प्रेमी सकल जहान का भारतवर्ष उदार।
सत्य न्याय के हेतु, फहर-फहर ओ केतु
हम विचरेंगे देश-देश के बीच मिलन का सेतु
पवित्र सौम्य, शांति की शिखा, नमो, नमो!

तार-तार में हैं गुँथा ध्वजे, तुम्हारा त्याग!
दहक रही है आज भी, तुम में बलि की आग।
सेवक सैन्य कठोर, हम चालीस करोड़
कौन देख सकता कुभाव से ध्वजे, तुम्हारी ओर
करते तव जय गान, वीर हुए बलिदान,
अंगारों पर चला तुम्हें ले सारा हिंदुस्तान!
प्रताप की विभा, कृषानुजा, नमो, नमो!

~ रामधारी सिंह ‘दिनकर’


Hindi Poetry Independence Day

नारी चेतना (अज्ञात रचनाकार)

जो कुछ पड़ेगी मुझ पे मुसीबत उठाऊंगी,
खि़दमत करूंगी मुल्क की और जेल जाऊंगी।

घर-भर को अपने खादी के कपड़े पिन्हाऊंगी,
और इन विदेशी लत्तों को लूका लगाऊंगी।

चरख़ा चला के छीनूंगी उनकी मशीनगन,
आदा-ए-मुल्को-क़ौम को नीचा दिखाऊंगी।

अपनी स्वदेशी बहनों को ले-ले के साथ में,
भट्टी पे हर कलाल के धरना बिठाऊंगी।

जाकर किसी भी जेल में कूटूंगी रामबांस,
और कै़दियों के साथ में चक्की चलाऊंगी।

स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर कविता:  Short Desh Bhakti Poem in Hindi For Class 3

अयि! भुवन मन मोहनी (रवीन्द्रनाथ ठाकुर)

अयि! भुवन मन मोहनी
निर्मल सूर्य करोज्ज्वल धरणी
जनक-जननी-जननी।। अयि...

अयि! नली सिंधु जल धौत चरण तल
अनिल विकंपित श्यामल अंचल
अंबर चुंबित भाल हिमाचल
अयि! शुभ्र तुषार किरीटिनी।। अयि...

प्रथम प्रभात उदय तव गगने
प्रथम साम रव तव तपोवने
प्रथम प्रचारित तव नव भुवने
कत वेद काव्य काहिनी।। अयि...
चिर कल्याणमयी तुमि मां धन्य
देश-विदेश वितरिछ अन्न
जाह्नवी, यमुना विगलित करुणा
पुन्य पीयूष स्तन्य पायिनी।। अयि...

अयि! भुवन मन मोहिनी।

रचनाकाल: सन् 1930

जिस प्रकार आजादी की कहानियां, गीत-गाथा हमें उन स्वतंत्र सेनानियों अमर शहीदों के बलिदान की याद दिलाती हैं। इसी प्रकार आजादी की कविताओं में वह क्षमता है जो किसी भी देश प्रेमी के दिल को स्पर्श कर जाती हैं। वतन के लिए मरने मिटने वाले लोगों के लिए आजादी की यह कविताएं उन्हें देश के लिए सर्वस्व त्यागने एवं देश के लिए जीवन जीने को प्रेरित करती है। असल में एक देश प्रेमी ही उस देश का एक सच्चा नागरिक है।

प्रस्तुत है आपके लिए आजादी पर रचित कुछ शानदार कविता जिनसे वतन की खुशबू आती है

Poem on Independence in Hindi

रचनाकार:- अशफाक उल्ला खां
शीर्षक :- आह्वान

कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएंगे,
आजाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे,
हटने के नहीं पीछे, डरकर कभी जुल्मों से,
तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे,
बेशस्त्र नहीं हैं हम, बल है हमें चरख़े का,
चरख़े से ज़मीं को हम, ता चर्ख़ गुंजा देंगे,
परवाह नहीं कुछ दम की, ग़म की नहीं, मातम की,
है जान हथेली पर, एक दम में गंवा देंगे,
उफ़ तक भी जुबां से हम हरगिज़ न निकालेंगे,
तलवार उठाओ तुम, हम सर को झुका देंगे,
सीखा है नया हमने लड़ने का यह तरीका,
चलवाओ गन मशीनें, हम सीना अड़ा देंगे,
दिलवाओ हमें फांसी, ऐलान से कहते हैं,
ख़ूं से ही हम शहीदों के, फ़ौज बना देंगे,
मुसाफ़िर जो अंडमान के, तूने बनाए, ज़ालिम,
आज़ाद ही होने पर, हम उनको बुला लेंगे।

Independence Day Poem in Hindi for Class 1, 2, 3, 4, 5

रचनाकार:- शैलेन्द्र
शीर्षक:- जिस देश में गंगा बहती है:

होठों पे सच्चाई रहती है, जहां
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है
मेहमां जो हमारा होता है, वो जान से प्यारा होता है
ज़्यादा की नहीं लालच हमको, थोड़े मे गुज़ारा होता है
बच्चों के लिये जो धरती माँ, सदियों से सभी कुछ सहती है
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

कुछ लोग जो ज़्यादा जानते हैं, इन्सान को कम पहचानते हैं
ये पूरब है पूरबवाले, हर जान की कीमत जानते हैं
मिल जुल के रहो और प्यार करो, एक चीज़ यही जो रहती है
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

जो जिससे मिला सिखा हमने, गैरों को भी अपनाया हमने
मतलब के लिये अन्धे होकर, रोटी को नही पूजा हमने
अब हम तो क्या सारी दुनिया, सारी दुनिया से कहती है
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है..

Hindi Poem on Freedom Fighters of India

रचनाकार: इकबाल
शीर्षक: मेरा वतन वही है

चिश्ती ने जिस ज़मीं पे पैग़ामे हक़ सुनाया
नानक ने जिस चमन में बदहत का गीत गाया
तातारियों ने जिसको अपना वतन बनाया
जिसने हेजाजियों से दश्ते अरब छुड़ाया
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है

सारे जहां को जिसने इल्मो-हुनर दिया था,
यूनानियों को जिसने हैरान कर दिया था
मिट्टी को जिसकी हक़ ने ज़र का असर दिया था
तुर्कों का जिसने दामन हीरों से भर दिया था
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है
टूटे थे जो सितारे फ़ारस के आसमां से
फिर ताब दे के जिसने चमकाए कहकशां से
बदहत की लय सुनी थी दुनिया ने जिस मकां से
मीरे-अरब को आई ठण्डी हवा जहां से
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है।

Short Poem on Freedom Fighters and Patriotism in Hindi

रचनाकार: अज्ञेय
शीर्षक: मेरे देश की आंखें

नहीं, ये मेरे देश की आंखें नहीं हैं
पुते गालों के ऊपर
नकली भवों के नीचे
छाया प्यार के छलावे बिछाती
मुकुर से उठाई हुई
मुस्कान मुस्कुराती
ये आंखें
नहीं, ये मेरे देश की नहीं हैं...

तनाव से झुर्रियां पड़ी कोरों की दरार से
शरारे छोड़ती घृणा से सिकुड़ी पुतलियां
नहीं, ये मेरे देश की आंखें नहीं हैं...
वन डालियों के बीच से
चौंकी अनपहचानी
कभी झांकती हैं
वे आंखें,
मेरे देश की आंखें,
खेतों के पार
मेड़ की लीक धारे
क्षिति-रेखा को खोजती
सूनी कभी ताकती हैं
वे आंखें...

उसने
झुकी कमर सीधी की
माथे से पसीना पोछा
डलिया हाथ से छोड़ी
और उड़ी धूल के बादल के
बीच में से झलमलाते
जाड़ों की अमावस में से
मैले चांद-चेहरे सुकचाते
में टंकी थकी पलकें
उठाईं
और कितने काल-सागरों के पार तैर आईं
मेरे देश की आंखें...

Independence Day Poems in Hindi

रचनाकार: राम प्रसाद बिस्मिल
शीर्षक: आजादी

इलाही ख़ैर! वो हरदम नई बेदाद करते हैं,
हमें तोहमत लगाते हैं, जो हम फ़रियाद करते हैं,
कभी आज़ाद करते हैं, कभी बेदाद करते हैं,
मगर इस पर भी हम सौ जी से उनको याद करते हैं,
असीराने-क़फ़स से काश, यह सैयाद कह देता,
रहो आज़ाद होकर, हम तुम्हें आज़ाद करते हैं,
रहा करता है अहले-ग़म को क्या-क्या इंतज़ार इसका,
कि देखें वो दिले-नाशाद को कब शाद करते हैं,
यह कह-कहकर बसर की, उम्र हमने कै़दे-उल्फ़त में,
वो अब आज़ाद करते हैं, वो अब आज़ाद करते हैं,
सितम ऐसा नहीं देखा, जफ़ा ऐसी नहीं देखी,
वो चुप रहने को कहते हैं, जो हम फ़रियाद करते हैं,
यह बात अच्छी नहीं होती, यह बात अच्छी नहीं करते,
हमें बेकस समझकर आप क्यों बरबाद करते हैं?
कोई बिस्मिल बनाता है, जो मक़तल में हमें ‘बिस्मिल’
तो हम डरकर दबी आवाज़ से फ़रियाद करते हैं।

वीर सेनानियों पर देशभक्ति कविता

देश का इतिहास देखे तो अनेक ऐसे वीर सेनानी पैदा हुए है जिन्होंने भारत माता की रक्षा हेतु अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए हैं। उन वीर सेनानियों के बलिदान का कर्जा सदा हम देशवासियों पर है, जिनकी बदौलत आज हम इस खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं। वीर सेनानियों द्वारा देश के लिए दिए गए इस बलिदान के लिए वे सदा हमारे दिल में बसे रहेंगे और उन्हीं की याद में प्रस्तुत है वीर सेनानियों पर कुछ कविताएं।

Desh Bhakti Poem in Hindi for Kids

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा संभालो
चट्टानों की छाती से दूध निकालो
है रुकी जहाँ भी धार शिलाएं तोड़ो
पीयूष चन्द्रमाओं का पकड़ निचोड़ो
चढ़ तुंग शैल शिखरों पर सोम पियो रे
योगियों नहीं विजयी के सदृश जियो रे।

जब कुपित काल धीरता त्याग जलता है
चिनगी बन फूलों का पराग जलता है
सौन्दर्य बोध बन नयी आग जलता है
ऊँचा उठकर कामार्त्त राग जलता है

अम्बर पर अपनी विभा प्रबुद्ध करो रे
गरजे कृशानु तब कंचन शुद्ध करो रे।

जिनकी बाँहें बलमयी ललाट अरुण है
भामिनी वही तरुणी नर वही तरुण है
है वही प्रेम जिसकी तरंग उच्छल है
वारुणी धार में मिश्रित जहाँ गरल है

उद्दाम प्रीति बलिदान बीज बोती है
तलवार प्रेम से और तेज होती है।

छोड़ो मत अपनी आन, सीस कट जाये
मत झुको अनय पर भले व्योम फट जाये
दो बार नहीं यमराज कण्ठ धरता है
मरता है जो एक ही बार मरता है

तुम स्वयं मृत्यु के मुख पर चरण धरो रे
जीना हो तो मरने से नहीं डरो रे।

स्वातंत्र्य जाति की लगन व्यक्ति की धुन है
बाहरी वस्तु यह नहीं भीतरी गुण है

वीरत्व छोड़ पर का मत चरण गहो रे
जो पड़े आन खुद ही सब आग सहो रे।

जब कभी अहम पर नियति चोट देती है
कुछ चीज़ अहम से बड़ी जन्म लेती है
नर पर जब भी भीषण विपत्ति आती है
वह उसे और दुर्धुर्ष बना जाती है

चोटें खाकर बिफरो, कुछ अधिक तनो रे
धधको स्फुलिंग में बढ़ अंगार बनो रे।

उद्देश्य जन्म का नहीं कीर्ति या धन है
सुख नहीं धर्म भी नहीं, न तो दर्शन है
विज्ञान ज्ञान बल नहीं, न तो चिंतन है
जीवन का अंतिम ध्येय स्वयं जीवन है

सबसे स्वतंत्र रस जो भी अनघ पियेगा
पूरा जीवन केवल वह वीर जियेगा।

∼ रामधारी सिंह ‘दिनकर’

Desh Bhakti Kavita in Hindi for Class 5

भारत माता के शीश मुकुट की शान हूँ मैं,
करोडों भारतीयों का अभिमान हूँ मैं।
वैसे तो बहुत दयावान हूँ मैं,
पर दुश्मन की मौत का सामान हूँ मैं।
माँ भारती की रक्षा में प्राण न्यौछावर करता,
देश का वीर जवान हूँ मैं।

एक माँ से दूर हूँ तो एक मां के पास हूँ मैं।
हर देशवासी की सुरक्षित रहने की आस हूँ मैं।
दुश्मन के दिल में भरता त्रास हूँ मैं,
भारत माँ के चरणों में शीश नवाता एक दास हूँ मैं।
दुश्मन के विफल करता हर प्रयास हूँ मैं,
हर एक भारतवासी का अखण्ड विश्वास हूँ मैं।

बस तू रो मत माँ, दूर होकर भी तेरे आसपास हूँ मैं,
जानता हूँ तेरे लिए सबसे ख़ास हूँ मैं।
माँ बस उदास ना हो मैं वापिस जरूर आऊंगा,
तुझसे किया जो वादा उसे निभाऊंगा।
ज़िंदा ना सही तिरंगे में लिपटा लाया जाऊंगा,
पर वादा है तुझसे मैं वापिस जरूर आऊंगा।

Poem on Independence Day in Hindi 2021 for Students

युद्ध में जख्मी सैनिक साथी से कहता है: 
‘साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरी माता पूछे तो, जलता दीप बुझा देना! 
इतने पर भी न समझे तो दो आंसू तुम छलका देना!! 
यदि हाल मेरी बहना पूछे तो, सूनी कलाई दिखला देना! 
इतने पर भी न समझे तो, राखी तोड़ दिखा देना !! 
यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो, मस्तक तुम झुका लेना! 
इतने पर भी न समझे तो, मांग का सिन्दूर मिटा देना!! 
यदि हाल मेरे पापा पूछे तो, हाथों को सहला देना! 
इतने पर भी न समझे तो, लाठी तोड़ दिखा देना!! 
यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो, सर उसका सहला देना! 
इतने पर भी न समझे तो, सीने से उसको लगा लेना!! 
यदि हाल मेरा भाई पूछे तो, खाली राह दिखा देना! 
इतने पर भी न समझे तो, सैनिक धर्म बता देना!!

Short Poem on 15 August in Hindi

माना की घर से दूर हूं,
यूं ना समझो कि मैं मजबूर हूं।
तीर्थान्कर काशी गंगा सा पावन हूं,
जो पतझड़ में हरियाली लाए वो सावन हूं।।
बेटे के घर आने की आस संजोती,
बुढी मां की आस हूं।
विरह वेदना में तड़पती,
नववधू की प्यास हूं॥
राहों को तकती आंखों का पानी हूं,
मजबूरी में की गई मनमानी हूं।
विरह-मिलन की रसहीन कहानी हूं,
श्रृंगार सजी दुल्हन की तन्हा जवानी हूं॥
भाई-बहन का सम्मान हूं,
बाबा का अभिमान हूं।
चौपालों में सजी मंडली का अंग हूं,
होली में उड़ता गुलाबी रंग हूं॥
अभी मैं आ नहीं सकता मां,
बस थोड़ी सी मजबूरी है।
मां तुम चिन्ता मत करना,
बस कुछ कोसों की ही दूरी है॥
वादा है अबकी बार मैं,
होली पर आऊंगा।
गुडिया को अपने हाथ से,
झूला झुलाऊंगा।
पापा की खातिर मखमली,
कम्बल लाऊंगा।
मां तेरी खातिर कश्मीरी,
स्वेटर लाऊंगा॥
जाने कितने ही वादे हम,
वधुओं से किए जाते।
ना जाने फिर क्यूं तिरंगे में,
संग खत के लिपट आते॥
मैं भारत मां के,
शीश मुकुट की शान हूं।
कठिनाई से लड़ता सहता,
मैं सेना का जवान हूं॥

स्वतंत्रता दिवस पर बाल कविता

कलम, आज उनकी जय बोल
जला अस्थियाँ बारी-बारी
चिटकाई जिनमें चिंगारी,
जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर
लिए बिना गर्दन का मोल
कलम, आज उनकी जय बोल.

जो अगणित लघु दीप हमारे
तूफानों में एक किनारे,
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन
माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल
कलम, आज उनकी जय बोल.

पीकर जिनकी लाल शिखाएँ
उगल रही सौ लपट दिशाएं,
जिनके सिंहनाद से सहमी
धरती रही अभी तक डोल
कलम, आज उनकी जय बोल.

अंधा चकाचौंध का मारा
क्या जाने इतिहास बेचारा,
साखी हैं उनकी महिमा के
सूर्य चन्द्र भूगोल खगोल
कलम, आज उनकी जय बोल.

हमें यह सभी कविताएं सोशल मीडिया एवं इंटरनेट के माध्यम से प्राप्त हुई है। हमें नहीं पता कि इनके रचनाकारों के नाम क्या है। यदि आपको इनमें से किसी रचनाकार का नाम पता है तो हमें बेहद खुशी होगी उनका नाम इस रचना के साथ शामिल करने में। आप कमेंट करके हमें सूचित कर सकते हैं।

15 अगस्त पर जोश भरी कविताएँ

कभी कभी जिंदगी में इंसान काफी निराश-हताश हो जाता है। ऐसे में उसे ऐसे विचारों को अपने दिमाग में भरने की आवश्यकता होती है जो उसको सकारात्मक ऊर्जा दें। अब हम इस लेख में आपके साथ जोश भरी कविताएं शेयर कर रहे हैं। जब भी आप निराश हताश होते हैं या अपने लक्ष्य के प्रति आपका मन भटकता है या आपको आलस आता है तो आप इन कविताओं को पढ़कर अपने अंदर स्फूर्ति ला सकते हैं।

कर्म करने की प्रेरणा देने वाली कविता: चट्टान सी मुसीबतें
चट्टान सी खड़ी रही मुसीबतें,
मैं सागर की लहरें बन टकराता रहा।
कठोर छाती ढकेल देती वापस मुझे,
बटोर हिम्मत मैं बार-बार वापिस आता रहा।

धूल धुल गई जब सच के आइने से,
मेरी कोशिशों का असर रंग दिखाता रहा।
टूट रहा था वो पत्थर भी धीरे-धीरे,
साध निशाना मैं वार हर बार बरसाता रहा।

बिखर रहा था वो इस चोट से ज़र्रा-ज़र्रा,
देख साहिल मैं उस पार रास्ता बनाता रहा।
कट गया पत्थर मेरी रुकावटों का,
धुन उमंग के गीतों की मैं गाता रहा।
चट्टान सी खड़ी रही मुसीबतें
मैं सागर की लहरें बन टकराता रहा।

Desh Bhakti Kavita in Hindi for Kids

मजबूत हौसला

कमज़ोर दिल नहीं हूं मैं,
जो सहारों की तलाश करूं
बैसाखियाँ बना बहानों की
मदद की फरियाद नहीं कर सकता

टूट कर बिखर जाते हैं
अकसर ठोकरों से,
जो बता खुद को मजलूम
बर्बाद किया करते हैं।
गर जीना है शान से
तो सीना तान ले,
कर मज़बूत हौंसला
काबिलियत अपनी पहचान ले।

ऊंचाइयों पर जाने वालों का
ये दुनिया इस्तकबाल करती है,
पहुँच जाए जो बुलंदियो पर
ए “गुमनाम”
ये झुक-झुक कर
सलाम करती है।

15 August Speech in Hindi 2021

मुश्किलें जरुर है, मगर ठहरा नही हूँ मैं

मुश्किलें जरुर है, मगर ठहरा नही हूं मैं
मंज़िल से जरा कह दो, अभी पहुंचा नही हूं मैं
कदमो को बांध न पाएंगी, मुसीबत कि जंजीरें

रास्तों से जरा कह दो, अभी भटका नही हूं मैं
सब्र का बांध टूटेगा, तो फ़ना कर के रख दूंगा,
दुश्मन से जरा कह दो, अभी गरजा नही हूं मैं
दिल में छुपा के रखी है, लड़कपन कि चाहतें,

मोहब्बत से जरा कह दो, अभी बदला नही हूं मैं
साथ चलता है, दुआओ का काफिला
किस्मत से जरा कह दो, अभी तनहा नही हूं मैं....

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हौसला बुलंद

अपने मनोबल को इतना सशक्त कर,
कठिनाई भी आने से न जाए डर।
आत्मविश्वास रहे तेरा हमसफर,
बड़े-बड़े कष्ट न डाल पाएं कोई असर।।

हौसला अपना बुलंद कर लो,
साहस व हिम्मत को संग कर लो।
निर्भय होकर आत्मविश्वास से बढ़ो,
संयम व धैर्य से सफलता की सीढ़ी चढ़ो।

जब कभी कर्तव्य के मार्ग पर,
विपत्ति व विघ्न तुम्हें सताएंगे।
जब कभी हारकर या विवश होकर,
निराशा के बादल छा जाएंगे।

हार न मानने का जज्बा तुम्हें उठाएगा,
तुम्हारा अडिग हौसला तुम्हें बढ़ाएगा।
आखिरकार देखना तुम्हारे आगे,
धरती हिल जाएगी, आसमां झुक जाएगा।

भय-विस्मय का अब अंत करो,
आते हुए दुखों को पसंद करो।
कर्म ज्यादा व बातें चंद करो,
हौसला अपना इतना बुलंद करो।

दुखों का पहाड़ टूटने पर भी,
सीना ताने खड़ा रह पाएगा।
दर्द का अंबार फूटने पर भी,
सर उठाकर सतत् चलता जाएगा।

जो अपने पक्के इरादों के आगे,
मुसीबतों के घुटने टिका जाएगा।
वही सुदृढ़ मनोबल वाला मनुष्य,
जिंदगी की यह जंग जीत पाएगा।

Patriotic Poem in Hindi for School Competition
अंगुलियों वाला कभी कलाकार नहीं बन पाएगा, डर तुझे ये समझाएगा
मगर तू आत्मविश्वास दिखाएगा, तू डर से आंख मिलाएगा
डर से मत डर, कुछ अलग कर
डर का सामना कर, आगे बढ़, कुछ अलग कर
जिंदगी के हर मोड़ पर तुझे डर सताएगा
उसी डर का फायदा बिना झुके ये डर उठाएगा
तुझसे कहेगा कि तू आगे कुछ नहीं कर पाएगा
पर क्या वो लिखकर दे पाएगा कि तू हार जाएगा
तेरी हर कमजोरी पर ये डर घर बनाएगा
पर तू अपना हुनर दिखाएगा
उसी कमजोरी को तू अपनी ताकत बनाएगा
उस दिन ये डर तुझसे डर जाएगा
डर का खेल निडर होकर खेल, डर से मत डर
आगे बढ़, भुला दे डर, कुछ अलग कर...
देशभक्ति पर कविता हिंदी में

एक सच्चे देशभक्त के पास देश के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छा होती होती है। एक देशभक्त के लिए सबसे बढ़कर उसका देश होता है और उन्हीं देशभक्तों के लिए देशभक्ति की कुछ कविताएं नीचे प्रस्तुत की गई है। देश भक्ति की कविता एक देशभक्त की दिल को स्पर्श कर जाएंगी।


यारा प्यारा मेरा देश
यारा प्यारा मेरा देश,
सजा – संवारा मेरा देश॥
दुनिया जिस पर गर्व करे,
नयन सितारा मेरा देश॥
चांदी – सोना मेरा देश,
सफ़ल सलोना मेरा देश॥
सुख का कोना मेरा देश,
फूलों वाला मेरा देश॥
झुलों वाला मेरा देश,
गंगा यमुना की माला का मेरा देश॥
फूलोँ वाला मेरा देश
आगे जाए मेरा देश॥
नित नए मुस्काएं मेरा देश
इतिहासों में नाम लिखायें मेरा देश॥

मैं क्यों नहीं लिखता
मनोज चारण “कुमार”
मन तो मेरा भी करता है, 
कविता लिखूं, चारों दिशाओं पर, 
मुस्कुराती फिजाओं पर, 
महकती हवाओं पर, झूमती लताओं पर,
बल-खाती नदियों पर, कल-कल बहते झरनों पर,

हिमालय के चरणों पर ।

पर जब भी देखता हूं,
आतंकी मंजर को, धमाकों के खंजर को,
लुटती-पिटती कलियों को,
धुंए भरी गलियों को,

नक्सलवादी नारों को, खुले फिरते हत्यारों को।

जब भी देखता हूं,
सिसकते हुए बचपन को, बिकते हुए यौवन को, 
धक्के खाते बुढ़ापे को, भारत में फैले हुए स्यापे को। 
देखता हू्ं जब भी,
फांसी लटकते हुए किसान को, समय से पहले बुढ़ाते जवान को,
धक्के खाते बेरोजगार को,घोटालों के अंबार को।

मैं लिख नहीं पाता हूं,
कामिनी के केशों पर, दामिनी के भेषों पर,
बल खाती चोटी पर। 
नहीं लिख पाता मैं,
कुर्ती और कमीज पर, सावन वाली तीज पर,
आंखों वाले काजल पर, पांवों की खनकती पायल पर।

मुझे दिखती है,
सिर्फ सिसकती मां भारती, जो हरदम मुझे पुकारती । 
इसलिए, मैं लिखता हूं केवल,
सैनिक की सांसों को,
मां के उर में चुभती फांसों को,
बच्चों के बचपन को,
बूढ़ों की उम्र पचपन को,

मैं लिखता हूं,सीता- सतवंती को,
सावित्री-सी लाजवंती को,
द्रौपदी और दमयंती को।

युग-धर्म पर लिखना मेरा काम है,
तुम्हें मुबारक हो श्रंगार,
देश-धर्म पर लिखना ही,
मेरी शान है।

हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी।
लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी।।
व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया।
हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी।।
हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है।
उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है।।
हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे।
सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है।।
विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

तिरंगा गीत
चाँद, सूरज-सा तिरंगा
प्रेम की गंगा तिरंगा
विश्व में न्यारा तिरंगा
जान से प्यारा तिरंगा
सारे हिंदुस्तान की
बलिदान-गाथा गाएगा
ये तिरंगा आसमाँ पर
शान से लहराएगा।
शौर्य केसरिया हमारा
चक्र है गति का सितारा
श्वेत सब रंगों में प्यारा
शांति का करता इशारा
ये हरा, खुशियों भरा है
सोना उपजाती धरा है
हर धरम, हर जाति के
गुलशन को ये महकाएगा।
ये है आज़ादी का परचम
इसमें छह ऋतुओं के मौसम
इसकी रक्षा में लगे हम
इसका स्वर है वंदेमातरम
साथ हो सबके तिरंगा
हाथ हो सबके तिरंगा
ये तिरंगा सारी दुनिया
में उजाला लाएगा।

देशभक्तों नमन
जान पे खेला बचाया है तुमने वतन
ज़ुल्म सहते रहे गोली खाते रहे
बीच लाशों के तुम मुस्कुराते रहे
कतरे-कतरे से तुमने ये सींचा चमन
आज करता हूँ मैं देशभक्तों नमन
साँप बनकर जो आए थे डसने हमें
कुचला पैरों से तुमने मिटाया उन्हें
कर दिया पल में ही दुश्मनों का दमन
आज करता हूँ मैं देशभक्तों नमन
सर झुकाया नहीं सर कटाते रहे
देख बलिदान दुश्मन भी जाते रहे
माँ ने बाँधा था सर पे तुम्हारे कफ़न
आज करता हूँ मैं देशभक्तों नमन
सर झुकाया नहीं सर कटाते रहे
देख बलिदान दुश्मन भी जाते रहे
माँ ने बाँधा था सर पे तुम्हारे कफ़न
आज करता हूँ मैं देशभक्तों नमन।

भारतीय गणतंत्रता दिवस

गणतंत्र दिवस पर भाषण

गणतंत्र दिवस पर शायरी

गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है?

गणतंत्र दिवस पर छोटी कविता


मुझे उम्मीद है कि 15 अगस्त पर कविता आपको पसंद आई होगी और इसको आप शेयर साझा करेंगे।

आपको कविता कैसी लगी हमको कमेंट करके जरूर बताए और अगर आपके पास भी कोई कविता है तो उसको भी आप हम सबके साथ शेयर कर सकते हो। देश भक्ति के इस लेख को जितना हो सके उतना शेयर करें।

आपको HimanshuGrewal.com की तरफ से स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं !

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Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमें आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

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