कंप्यूटर का इतिहास क्या है?

कंप्यूटर क्या है (What is Computer in Hindi) और कंप्यूटर का इतिहास क्या है (History of Computer in Hindi) यह एक बहुत ही आम प्रश्न है जो कभी भी आपसे पूछा जा सकता है, इसलिए आज मैं आपके साथ Computer का इतिहास और विकास शेयर करने जा रहा हूँ.

दोस्तों, ज़रा सोचिए कि आपके पास ना तो कैलकुलेटर है और ना ही आपका smartphone है और तब आपको बड़ी संख्या का कैलकुलेशन करने के लिए दे दिया जाए तो आप उसका हल कैसे निकालेंगे?

मुझे पता है आप में से कुछ तो इस calculator को देखना भी पसंद नहीं करेंगे और जिनकी गणित अच्छी होगी वो एक बार उत्तर निकालने का प्रयास ज़रूर करेंगे.

यह तो बात हो गई कि आपसे आपका मोबाइल और calculator दोनों ले लिया जाए और तब आपको calculator करने को कहा जाएँ, लेकिन आज तो दुनिया का सबसे बेहतर यंत्र हमारे हाथ में हमेशा मौजूद रहता है जिससे हम कितनी भी बड़ी कैलकुलेशन को कुछ सेकंड में solve कर उत्तर का पता लगा सकते हैं.

ठीक इसी प्रकार से एक समय हुआ करता था जब लोगो को गणितीय गणना करने में कठिनाई आती थी क्योंकि calculation काफी बड़ी हुआ करती थी और उनके पास कोई भी यंत्र नहीं था.

इस तरह की और भी कई समस्या का सामना करने के पश्चात एक यंत्र का निर्माण किया गया जिसका नाम computer है, आज के समय में कंप्यूटर का इस्तेमाल बहुत ही आसान हो गया है लेकिन कई वर्ष पूर्व ऐसा नहीं था और आज ऐसा मुमकिन हो पाया इसके पीछे की वजह है कंप्यूटर का विकास.

तो आइए, अब हम समय को बचाते हुए आगे बढ़ते है क्योंकि समय एक अनमोल रत्न है, और जानते हैं कि कंप्यूटर का इतिहास क्या है और कैसे कंप्यूटर का विकास हुआ है.

कंप्यूटर का इतिहास (Computer History in Hindi)

कंप्यूटर का इतिहास आज से करीबन 300 वर्ष पुराना है, जैसा कि मैं आपको पहले भी बता चुका हूँ कि computer ka vikas गणितीय गणनाओ को बड़ी संख्या में करने के लिए किया गया था ताकि समय को बचाया जा सके और calculation को आसान बनाया जा सके.

जब आप इस लेख को अंत तक पढ़ लेंगे तो यकीनन ही आपको यह ज्ञात हो जाएगा कि computer के इतिहास में काफी कठोर प्रयास किया गया है जिसमे विभिन्न प्रणालियों को जन्म दिया जैसे-

बेबीलोनियन प्रणाली, यूनानी प्रणाली, रोमन प्रणाली और भारतीय प्रणाली, मगर इन सभी प्रणालियों में से भारतीय प्रणाली को स्वीकार कर लिया गया है.

भारतीय प्रणाली (Indian system of Numeration) आधारित है modern decimal system of numeration की, जो कि होती है – 0,1,2,3,4,5,6,7,8,9.

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि processing के लिए computer decimal system को नहीं समझ सकते हैं, यही वजह है कि इसके लिए binary system of numeration का इस्तेमाल किया जाता है.

तो आइए दोस्तों अब हम कुछ ऐसे कंप्यूटिंग डिवाइस (Computing devices) के बारे में बात करते हैं जिनका कंप्यूटर के निर्माण के दिशा में बड़ा योगदान है.

History of Computer in Hindi

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  • Calculating Machines

क्या आप जानते हैं कि हमारे पूर्वजों को करीब हजारों वर्ष लग गए ऐसे डिवाइस का निर्माण करने में जिससे कि बड़े नंबर को आसानी से और बहुत ही कम समय के भीतर ही काउंट किया जा सकता है.

  • Abacus

कंप्यूटर की शृंखला में सबसे पहला calculating device है Abacus, जिसका अर्थ है Calculating board.

मुझे याद है जब हम प्राथमिक कक्षा 3 – 4 में थे तो हमे गणित के विषय में Abacus नाम का मॉडल बनाने को दिया गया था, जिससे कैलकुलेशन करना और आसान हो गया था.

इसमे कुछ डंडे होते हैं horizontal position में जिसमे की छोटे – छोटे आकार के पत्थर को फसा कर लगाया जाता है, जो कि मूव कर सके.

यह Horizontal Bars units, tens, hundreds और thousands के जगह पर अंको को दर्शाते हैं.

यदि मैं इसके निर्माण करता के बारे में बात करू तो इसका निर्माण एवं विकास Egyptian and Chinese लोगो के द्वारा किया गया है.

  • Napier’s Bones

इसका निर्माण English Mathematician John Napier ने 1617AD में किया था और इसी वजह से इसका नाम यह है.

यह एक ऐसा Mechanical device है जिसे कि Multiplication के उद्देश्य को मध्य नज़र रख कर बनाया गया था.

  • Slide Rule

यह एक ऐसी मशीन थी जो बहुत ही आसानी से बहुत से ऑपरेशन को पूर्ण रूप से सफल कर सकती थी, जैसे कि – Addition, Subtraction, Multiplication & Division.

English mathematician Edmund Gunter ने इसका निर्माण किया था और 16th century में इस मशीन का यूरोप में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया था.

  • Adding Machine – Blaise (1642 A.D) Pascal – Prance

मात्र 19 वर्ष की उम्र में French Scientist & mathematician, Blaise pascal ने इस मशीन का निर्माण किया था.

इस मशीन की खासियत यह थी कि यह मशीन आसानी से digits को जोड़ कर automatically carry भी कर लिया करती थी.

दोस्तों मैं आपको बता दूँ कि इनकी वह मशीन बहुत ज्यादा revolutionary थी, इतना ही नहीं आज भी इसके principle बहुत से mechanical counters में इस्तेमाल किए जाते हैं.

  • Multiplying Machine – GOTTFRIED LEIBNIZ – GERMANY (1692 A.D)

इन्होने Pascal की मशीन को और ज्यादा बेहतर किया और उस मशीन को सक्षम बनाया कि वो automatic multiplication कर सके.

इसके बाद Sir Isaac Newton and Leibniz ने साथ मिल कर गणित की एक नई ब्रांच का निर्माण किया, जिसे आज Calculus के नाम से जाना जाता है.

उन्होने ही Calculator का निर्माण भी किया था जो कि addition, subtraction, multiplication and division को कम समय के भीतर एक दम सही तरीके से solve कर सके, इसके साथ ही वह Square root function भी करने में सक्षम था.

  • Early 1800’s JACQUARD LOOM – Joseph Marie Jacquard

18th century में French के Joseph Marie Jacquard ने एक ऐसे programmable loom को बनाया, जो कि बड़े कार्ड और holes का इस्तेमाल किया करता था, और फिर उन्हें बहुत ही कंट्रोल के साथ पंच करता था जिससे कि अंत में वो automatically एक Pattern को बना कर तैयार करता था.

इसमे जो Output बन कर तैयार होता था वो एक thick rich cloth होता था जिसमे कि repetitive oral या geometric patterns होते थे.

Primary form of Input को इस्तेमाल में लाने के तौर पर punched cards को भी adapt कर लिया गया इसके साथ ही Jacquard Patterns को अब भी इस्तेमाल में लाया जाता है.

  • Difference engine – CHARLES BABBAGE – England (1813 A.D)

Father of Computer & Englishman Scientist Charles Babbage ने 19वी सदी के शुरुआत में एक ऐसी मशीन को बनाया जो कि बहुत ही आसानी से Complex Calculation Perform कर सकता था.

सन् 1813 A.D में उन्होने “Difference engine” का निर्माण किया जो कि बहुत ही Complex Calculation को Perform कर सकती थी और इसके साथ ही उसे प्रिंट भी कर सकती थी. यह मशीन एक Steam powered machine कहलाई.

हिन्दी में कंप्यूटर का इतिहास : 19th Century

अब हम इस modern समय के कंप्यूटर के इतिहास के विषय में जानते हैं, जिसका विकास 19वी सदी के समय में हुआ था.

Jacquard Loom

  1. इसमे Weaving Process को guide कर punched holes करने के लिए मेटल कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था।
  2. यह मेटल कार्ड में पहला stored program था।
  3. यह एक पहला Computer Manufacturing Unit भी था।
  4. इसका इस्तेमाल आज भी बहुत जगह किया जाता है।

Difference Engine c. (1822)

  1. यह एक बहुत ही बड़ा Calculator था, जो कि कभी भी पूर्ण नहीं हो सका।
  2. इस इंजन के पीछे Charles Babbage (1792-1871) का बड़ा हाथ था।

Analytical Engine 1833

  1. यह मशीन खास तौर पर नंबर को स्टोर करने में सक्षम थी।
  2. इसके calculation प्रक्रिया में instruction देने के लिए punched metal cards का इस्तेमाल किया जाता था।
  3. यह एक stream powered machine था।
  4. यह Accurately six decimal places तक calculate कर सकता था।
  5. Ada Augusta दुनिया के पहले Programmer थे।
  6. उन्होने Charless Babbage के साथ काम किया हुआ था।
  7. उन्होने Analytical Engine को भी programmed किया था।

Vacuum Tubes – (1930 – 1950s)

  1. First Generation Electronic computer में Vacuum Tubes का इस्तेमाल हुआ था।
  2. Vacuum tubes असल में glass tubes होते हैं जिनकी circuits उनकी भीतर ही होती है।
  3. Vacuum tubes के भीतर कोई भी air नहीं होती है, जो कि इसकी circuitry की रक्षा करती है।

UNIVAC – 1951

  1. यह पहला commercially available computer था।
  2. इसे Census Bureau को बेचा गया था।
  3. यह एक प्रकार का बहुत ही बड़ा Pocket Calculator था।
  4. यह सन् 1970 तक एक standard computer ही था, लेकिन इसकी कीमत बहुत ही ज्यादा थी।

First Computer Bug – 1945

  1. जो cards information carry करती है उनको यह relay कर सकता था।
  2. Grace Hopper ने ही पहले एक actual moth (कीड़ा) को उस card में लगे हुए पाया, जिसके कारण ही कार्ड इस प्रकार से malfunction का रहा था।
  3. इसलिए उस समय से ही computer में “debugging” शब्द का इस्तेमाल होने लगा।

First Transistor

  1. यह सिलिक्न का इस्तेमाल करता था।
  2. यह सन् 1948 में बनाया गया था, जिसके लिए इसके निर्माण करता को नोबल प्राइज़ से नवाजा गया था।
  3. इसमे ऑन – ऑफ स्विच भी था।
  4. फिर Second generation computers ने इन Transistor का इस्तेमाल सन 1956 से करना शुरू किया।

Integrated Circuits

  1. इन Integrated Circuits (chips) का इस्तेमाल third generation computers में हुआ था।
  2. Integrated Circuits असल में transistors, resistors & capacitors का समाहार होता है जिन्हे की एक साथ integrate किया जाता है एक single “chip” में|

तो दोस्तों कंप्यूटर का इतिहास कुछ इस प्रकार से था आइए अब जानते हैं कि कंप्यूटर का विकास कब हुआ और कैसे हुआ?

History of Computer in Hindi

जिस प्रकार से Counting Technology का निर्माण हुआ ठीक वैसे ही नई calculating mechanical device का भी जन्म हुआ.

वैज्ञानिको ने अपने रिसर्च के द्वारा ऐसे यंत्र का निर्माण किया जो कि हमारे complex calculation को बड़ी ही आसानी से solve कर सकते थे.

तो चलिये, अब हम personal computer में हो रहे विकास के विषय पर नज़र डालते हैं.

Personal Computers का जन्म हुआ (Kenbak 1 – 1971)

  • यह सबसे Primitive थी, जिसमे केवल flashing lights और button थे।
  • इसकी कीमत $750 थी।

MITS Altair – 1975

  • 256-byte इसकी memory थी।
  • इसमे 2 MHz की Intel 8080 chips इस्तेमाल में आती थी।
  • यह केवल एक बॉक्स था जिसमे Flashing lights थी।
  • इसके Kit की कीमत $395 थी, वही इसे assemble कर देने के बाद यह कीमत $495 हो जाती थी।

First Microprocessor – 1971

  • Intel 4004 में 2,250 Transistors थे।
  • Four-bit chunks (four 1’s or 0’s)
  • 108Khz
  • 0.6 Mips (million instructions/sec)
  • Pentium 133 – 300 Mips
  • इन्हे ही Microchips का नाम दिया गया था।

Generations of Electronic Computers

GenerationTechnologySize
  • First Generation I
Vacuum TubesFilled Whole Buildings
  • Second Generation II
TransistorsFilled half a room
  • Third Generation III
Integrated Circuits (multiple transistors)Smaller
  • Fourth Generation IV
Microchips (millions of transistor)Tiny – Palm Pilot is as powerful as old building sized computer
History of Computer in India (Computer Ka Itihas)

Political administration, Government policy advisers bureaucrats and technocrats इन सभी मेजर फोर्स ने जब मिल कर कार्य को करने का तय किया तभी भारत के computer technology का विकास मुमकिन हो पाया.

आइए अब हम भारत के computer evolution को अलग – अलग phases में बाट कर देखते हैं इससे आपको समझने में भी आसानी होगी.

  • Phase – 1

सन् 1950 में कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (digital computer) का इतिहास बनना शुरू हो पाया, इसका administration मुंबई में R Narasimhan जी के leadership के अंतर्गत हो पाया और कंपनी का नाम Tata Institute of Fundamental Research (TIFR) था.

यह TIFRAC (TIFR Automatic Computer) को बनाने की प्रक्रिया 1955 में शुरू किया गया और वर्ष 1959 में यह पूर्ण भी हो गया था.

2048 शब्दों तक TIFRAC अपनी मेमोरी (40-bit word, 15 microsecond cycle time) में आसानी से कार्य को कर सकता था.

वही यह Display output के तौर पर cathode ray tube का इस्तेमाल किया करता था. इसका निर्माण करने से यह physics problems को आसानी से सॉल्व करने में भी मदद मिली.

वही सन् 1960 के दौरान पूरी दुनिया में non-foreign exchange outflow की पहल computer industries में हो गई थी| लेकिन फिर भी भारत में उस वक्त IBM & British Tabulation Machine को establish किया गया जो कि mechanical accounting machines को बेच रहे थे.

IBM & ICL को licenses और agreements issue किए गए जिससे कि वो भारत में कंप्यूटर manufacturing plant बना सके, वही ने फिर पंच कार्ड मशीन बनाना शुरू भी कर दिया और उन्हे बाहर के देशों में export किया जाने लगा.

Phase – 2

सन् 1970 में Department of Electronics को establish किया गया जिसका उद्देश्य था कि कैसे electronics technologies को enhance किया जा सके और जो बाद में PSU company ECIL के computer division को establish करने में सहायक हुआ.

(Electronics Corporation of India Limited)

ECIL ने design किया TDC-12 जोकि एक 12 bit real time minicomputer था और उसे बाद में upgrade किया गया TDC-312 में, वही बाद में TDC-316 में भी जो कि एक 16 bit computer था जिसे सन् 1975 में बनाया गया था.

वही वर्ष 1978 में ECIL ने MICRO-78 system को बनाया जो कि purely based था microprocessor के ऊपर.

ECIL ने वर्ष 1971 से 1978 तक करीब 98 computer की सरचना की जिन्हे की उन्होने government laboratories को बेचा अलग – अलग universities के research के लिए.

वही ECIL का एक major contribution जब था जब उन्होने Indian Air Force को प्रदान किया Air Defense Ground Environment Systems.

Phase – 3

सन् 1984 में जब राजीव गाँधी प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने minicomputers के ऊपर एक liberalized policy बनाया जो कि private sector companies को allow करता था computer manufacture करने में.

Private sector companies ने इसके साथ manufacture किया assembled boards microprocessors & interface electronics के साथ जिन्हे की उन्होने import किया application software के साथ, जिसमे की कम imported duty लगती थी.

Liberalization Policy के कारण कंप्यूटर का ग्रोथ 100% तक बढ़ गया और वही इसके कीमत में करीब 50% की कमी हुई.

इतना ही नहीं सन् 1984 से भारतीय रेल्वे में सीट रिजर्वेशन की पूरी प्रक्रिया भी कंप्यूटर के माध्यम की जाने लगी.

दोस्तों मैं आपको यह भी बताना चाहता हूँ कि Seat reservation system की entire software को Indian programmers के द्वारा ही बनाया गया था.

Phase – 4

सन् 1991 में भारत के ऊपर एक बहुत ही बड़ा financial crisis आ पड़ा, इससे बचने के लिए world bank ने India को उसके external debt और trading (import & export) के ऊपर कुछ conditions लागू किए जिसके चलते Indian Government को बाध्य होकर अपने economy को liberalize करना पड़ा.

सन् 1990-91 में सॉफ्टवेयर को export कर Indian Software Companies ने earn करना शुरू किया, जिसकी estimated value US
$125 million थी, वही  earning भी बढ़ी जो कि सन् 1997-98 के दौरान US $1.70 million से भी ज्यादा थी.

Indian Software Companies ने अपने लिए तय कर लिए थे इंडस्ट्री से काम करने के लिए.

Indian Software Companies ने GDM (Global Delivery Model) की खोज की जो कि 24-hour working hours IT Industry के लिए सरचना करे.

और दोस्तों यही वजह है कि आज भी पूरे विश्व में भारत को IT Industry का प्रमुख माना जाता है.

तो दोस्तों यह थे लेख जिसमे मैंने आपको कंप्यूटर का इतिहास और विकास दोनों बताया, आशा है आपको इस लेख के माध्यम से कंप्यूटर हिस्ट्री के बारे में जानकारी मिल गई होगी.

दोस्तों मेरी यही कोशिश रहती है कि मैं हमेशा आपके लिए पूरी जानकारी अपडेट करू जिससे कि आपको एक ही साइट पर सारी जानकारी मिल जाए, ताकि आपका समय और डाटा दोनों की बचत हो जाए.

यदि Computer History in Hindi से जुड़ा कोई डाउट आपके मन में आता है तो नीचे दिये गए कमेंट बॉक्स का इस्तेमाल करें और कमेंट कर अपने डाउट को क्लियर ज़रूर करें.

History of Computer in Hindi के इस लेख को अंत तक पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद, इस लेख को अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर करना ना भूले ताकि उन्हे भी कंप्यूटर का इतिहास के बारे में ज्ञात हो सके.

History of Computer in English
कंप्यूटर का इतिहास क्या है?

Brief History Of Computer. The computer as we know it today had its beginning with a 19th century English mathematics professor name Charles Babbage

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Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमे आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

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