ईद पर निबंध – Essay on Eid in Hindi | (बकरा और मीठी ईद की कहानी)

ईद पर निबंध के इस आर्टिकल में आज में आपको बकरा ईद क्यों मानते है और मीठी ईद क्यों मानते है उसके बारे में बताने जा रहा हूँ.

ईद मुसलमानों का पवित्र व महत्वपूर्ण पर्व है. यह प्रेम मेल व भाई-चारे का पर्व है.

ईद की शाब्दिक अर्थ होता है – ख़ुशी

ईद आने पर यह सबके दिलों को खुशियों से भर देता है, रमजान के बाद आती है पवित्र ईद.

ईद कितने प्रकार की होती है?

ईद दो प्रकार की होती है:-

  1. मीठी ईद
  2. बकरा ईद

मीठी ईद को ईद-उल-फितर कहते है. 30 दिन रमजान के बाद मीठी ईद आती है.

इस दिन प्रात: नये वस्त्र पहनकर मुसलमान ईदगाह में नमाज पढ़ने जाते हैं उसके बाद सब एक दूसरे को बधाई देते हुए गले मिलते हैं.

इस अवसर पर मुसलमान घरों में मीठे पकवान बनाते है और सम्बन्धियों को मिठाई व सेवई बाँटते है व ईद मुबारक देते है.

बकरा ईद को ईद-उल-जुहा कहते हैं. यह पर्व मीठी ईद के ठीक सत्तर दिन बाद मनायी जाती है. इस दिन का अपना अलग महत्व होता है.

यह दिन कुर्बानी का दिन है. इस दिन अपने प्रिय पशु की कुर्बानी दी जाती है.

परम्परा के अनुसार इब्राहीम नामक एक पैगम्बर थे. भगवान् के दूत के आदेश पर वे अपने प्रिय पुत्र को कुर्बानी देने के लिए ले गये.

कुर्बानी देते समय भगवान् ने उसका हाथ रोक दिया. वहाँ पर उसके पुत्र के स्थान पर एक बकरा आ गया, फिर वहाँ पर बकरे की कुर्बानी दी गयी.

तब से इस दिन बकरे की कुर्बानी की कुर्बानी देने की प्रथा बन गई.

इस दिन प्रात: नमाज अदा कर लोग घरों पर आते हैं. सभी लोग गले मिलकर एक दूसरे को ईद मुबारक कहते हैं.

ईद पर निबंध का यह आर्टिकल अब यही पर खत्म होता है और मुझे पूरी उम्मीद है की आपको जो जानकारी चाहिए थी आपको मिली होगी.

आपको यह आर्टिकल केसा लगा, या आप ईद के बारे में हमारे साथ कुछ शेयर करना चाहते हो तो आप कमेंट के माध्यम से हमारे साथ शेयर कर सकते हो.

इस आर्टिकल को अपने सभी दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करें. आपको HimanshuGrewal.com की और से ईद मुबारक!

4 Comments

  1. nitish chaudhary April 22, 2017
  2. Akshat Jain April 25, 2017
    • Himanshu Grewal April 25, 2017

Leave a Reply