ईसा मसीह कौन थे – ईसा मसीह की कहानी

ईसा मसीह कौन थे ? यह बहुत ही बड़ा सवाल है, जिस पर ना जाने कितने लोगो ने कई बार बहस भी की है| आइये आज इस लेख के माध्यम से मैं आपको इस सवाल का जवाब देता हूँ.

क्रिसमस का त्यौहार आज पूरे विश्व में बहुत चर्चित है और इसे विश्व के लगभग सभी देशो में बहुत ही धूम – धाम से मनाया जाता है.

बच्चा – बच्चा जानता है कि हम क्रिसमस पर्व को ईसा मसीह के जन्मदिवस की खुशी में मनाते है, लेकिन शायद 90% लोगो को यह मालूम ना हो कि आखिर ईसा मसीह कौन थे ?

भारत में आज ज्यादातर जनता हिन्दू धर्म से है इसलिए मैं हिन्दू के उदाहरण से ही आपको एक बात समझाता हूँ.

जिस प्रकार हिन्दू धर्म में करीबन 3 लाख से भी ज्यादा देवी देवता है, और आज हम अलग – अलग समय पर सभी की पुजा, अर्चना, वर्त रख कर, मिठाइयाँ खा कर एवं खुशियाँ बाट कर त्योहार को मनाते है.

लेकिन क्या आपको यह मालूम है कि सभी देवी देवता के भले ही रूप अलग – अलग हैं लेकिन वास्तव में वो सब एक ही है| मेरे कहने का अर्थ है कि भगवान एक ही हैं, बस उन्होंने हर बार एक नए शरीर में अपनी रूह को डाला और एक नए रूप से इस पृथ्वी पर कुछ नया रचने के लिए आए.

यदि आप ध्यान दें, तो लगभग सभी प्रभु ने अपने जीवन में बुराई को नष्ट कर उसे खत्म ही किया है| अर्थात हम यह बोल सकते हैं कि भगवान हर बार नए-नए रूप में जन्म ले कर हमे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीत ही दर्शाया है.

ठीक इसी तरह जैसे हिन्दू धर्म के रामायण में प्रभु श्री राम जी, गीता में प्रभु श्री कृष्ण जी, मुस्लिम धर्म के कुरान में अल्लाह, सिख धर्म के गुरु ग्रन्थ साहिब में 10 गुरु एवं ईसाई धर्म के बाइबिल में ईसा मसीह का उल्लेख है.

शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसने यही सभी किताबे पढ़ी हो और ना ही मैंने पढ़ी है, लेकिन मैं इतना आपको बता सकता हूँ कि इन सभी में सिर्फ बुराई को खत्म कर, एकता की ही बात कही गई है.

तो दोस्तों हम यह तो कह सकते हैं, कि ऊपर वाला एक ही है बस उसने अपनी रूह को अलग – अलग इंसान में समाया और फिर इस पृथ्वी की सर्चना की.

मैं आपको यह भी बता दूँ कि भगवान ने कभी भी धर्म की बात नहीं की है, हम इंसान ही है जो धर्म के नाम पर एक दूसरे को काटने को दौड़ते हैं| तो चलिये अब हम टॉपिक पर आते हैं और ईसा मसीह के बारे में जानकारी (प्रभु यीशु की कहानी) के ज्ञान को बढ़ाते हैं.

ईशा मसीह हमारी ही तरह एक आम इन्सान थे पर उनमे कुछ अलग बात थी एक अलग खूबी थी जिससे उनको आम नही मानती थी| ऐसे कैसे? वो हम नीचे लेख में जानेंगे| तो आईये पढ़ना शुरू करते है.

ईसा मसीह कौन थे – Jesus Story in Hindi

Jesus Story in Hindi

ईसा मसीह का जीवन परिचय : आज से 2019 वर्ष पूर्व 25 दिसम्बर को ईसा मसीह का जन्म यरुशलम के बेतलहम नामक गाँव में हुआ था| ईसा मसीह के पिता का नाम जोसफ था और ईसा मसीह की माता का नाम मरियम था.

जिस प्रकार महाभारत में माता कुंती को कुंआरेपन में महर्षि दुर्वासा के द्वारा एक वरदान दिया गया था जिसमें कुंती किसी भी देवता का आवाहन कर सकती थी और उन देवताओं से संतान प्राप्त कर सकती थी|

विवाह से पूर्व उन्होंने अपने उस वरदान का जाँच किया और कर्ण को जन्म दिया और फिर उससे दुनिया के नजरों से बचा कर ताकि उन्हे कोई गलत ना समझ लें उन्होने उस बच्चे को एक टोकरी में रख कर बहते नदी में बहा दिया.

विवाह के बाद उन्होंने अपने पति पाण्डु (जिनको कि बीमारी की वजह से physical relation (योनसंबंध) बनाने के लिए मना किया गया था, अन्यथा उनकी मौत हो सकती थी) के अनुमति से उस वरदान का प्रयोग किया एवं धर्मराज, वायु एवं इंद्र देवता का आवाहन किया और 3 वीरो को जन्म दिया.

युधिष्ठिर यमराज और कुंती का पुत्र था। भीम वायु और कुंती का पुत्र था और अर्जुन तीसरे पुत्र थे जो देवताओं के राजा इंद्र से हुए|

यदि आप इससे विशेष जानकारी पाना चाहते हैं तो नीचे दिये गए लिंक को खोल कर पढ़ सकते हैं.

तो जिस प्रकार माता कुंती को वरदान मिला था, ठीक उसी तरह से जोसफ और मरियम को बच्चा नहीं हो सकता था और ईशा मसीह भी भगवान द्वारा रचयित ही एक बालक शरीर का रूप ले कर उनके घर जन्मे थे.

उनके माता पिता राजा के आदेश पर जनगणना के लिए यरुशलम गये थे| वे रात्रि को एक अस्तबल में ठहरे हुए थे| वहीं पर अर्द्धरात्रि में ईसू का जन्म (Yeshu Khrist) हुआ. उनका नाम क्राइस्ट था| ईसू के जन्म होते ही उनके पिता उन्हें छिपाकर मिश्र ले गये थे.

ज्यों ज्यों ईसा बड़े होते गये उनका ध्यान सांसारिक कृतियों से हटकर ईश्वर की ओर लगने लगा| तीस वर्ष की आयु में उन्हें ‘जान’ नामक महात्मा ने ज्ञान दिया| तब से वह सत्य ज्ञान के प्रचार में लग गये.

ईसा मसीह लोगों से कहते थे (ईसा मसीह का उपदेश था की) ईश्वर की आराधना करो, सब मनुष्यों से प्यार करो, दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करो, जैसा तुम चाहते हो की वो तुम्हारे साथ करे.

वे ह्रदय की सरलता व पवित्रता को महत्व देते थे, लोगो को उनकी बाते ठीक उसी प्रकार से पसंद आती थी जिस प्रकार आज कल कई लोग सत्संग और अलग-अलग गुरु की दीक्षा लेते हैं और उनको सुनने के लिए जाते हैं.

ईसा मसीह की मृत्यु कैसे हुई – ईसा मसीह कौन थे एवं ईसा मसीह का सच

जब लोगो को उनकी बाते पसंद आने लगी तो ईसा मसीह की लोकप्रियता भी बढ़ने लगी और इसी कारण से वहाँ स्थित कुछ लोगों को अनसे ईर्ष्या होने लगी.

जो लोग इनसे चिढ़ते थे, उनका मानना था कि भगवान या ईश्वर कुछ भी नहीं है| सभी लोग ईशा की बात को ना सुने बस और उनकी बातों को माने एवं उनको फॉलो करें.

इसी वजह से उन्होंने यरूशलम में शासकों को ईसा के विरुद्ध भड़काया की ईसा धर्म व राज्य के विरुद्ध जनता को संगठित कर रहा है.

फलत ईसा को प्राण दंण्ड दिया गया, इतना ही नहीं उनके हाथ व पैरों में कीलें ठोककर उन्हें कूस पर लटका दिया गया| सोच कर भी रूह काँप जाती है, सोचिए उनको कितना दर्द हुआ होगा.

ईसा मसीह की मृत्यु की पीड़ा के समय भी ईसा ने अपने विरोधियों के बारे में ईश्वर से प्राथना करते हुए कहा (ईसा मसीह के वचन) – “प्रभु इन्हें शमा करना क्योंकि ये नही जानते की ये क्या कर रहे है.”

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ईसा मसीह कौन थे इसकी मैंने आपको पूरी जानकारी बता दी है| अगर आपको ईसा मसीह भगवान को धन्यवाद बोलना है तो आप कमेंट करके बोल सकते हो और इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर भी कर सकते हो. 🙂

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