बसंत पंचमी

बसंत पंचमी पर निबंध 2021

बसंत पंचमी पर निबंध और महत्व
Written by Himanshu Grewal

बसंत पंचमी पर निबंध और इस त्योहार से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी आपको यहां पढ़ने को मिलेगी।

वसंत पंचमी हिन्दू त्योहारों में से एक है। इसे श्री पंचमी भी कहते है। बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा बड़े हर्ष और उल्लास से भारत वर्ष में मनाई जाती है। इस दिन स्त्री पीले वस्त्र धारण करती है। यह त्यौहार माघ शुक्ल पंचमी को आता है। भारत में सभी मौसमों में सब का मनपसंद मौसम वसंत का मौसम हैं। वसंत के मौसम में फूल का खिलना, खेतों में सरसों का सोने जैसा चमकना, जौ और गेहूँ की फसल का उगना, आम के पेड़ पर बोर आ जाना और रंग बिरंगी तितलियों का मंडराने लगना यह वसंत का मौसम बहुत ही सुन्दर मौसम है। वसंत के मौसम का स्वागत करने के लिए माघ के महीने में पांचवें दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु भगवान और भगवान कामदेव की पूजा होती है यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता है।

बसंत पंचमी का अर्थ

हिन्दी कैलेंडर के अनुसार, साल के 11वे महीने अर्थात माघ की शुक्ल पक्ष की शुभ पंचमी तिथि को हिन्दू संस्कृति में एक त्योहार मनाया जाता है और इसका नाम है बसंत पंचमी। जैसा कि आप जानते ही है कि प्रत्येक वर्ष तिथि के अनुसार इंग्लिश कैलेंडर में तारीख बदल जाती है और यहीं कारण है कि वसंत पंचमी जैसे पावन त्योहार की तिथि भी निश्चित नहीं है।

बसंत पंचमी कब है 2021 में

अब मैं आपको बताता हूँ कि बसंत पंचमी कब है 2021 में। बसंत पंचमी कि तिथि जो हिंदी कैलेंडर 2021 की तिथि के अनुसार निकली गई है वह है 16 फरवरी, 2021 और ये शुभ दिन मंगलवार का दिन पड़ रहा है। अर्थात वर्ष 2021 में बसंत पंचमी 16 फरवरी, मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। बसंत पंचमी भारत के हिन्दुओं के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। इस त्योहार को मनाने के विभिन्न कारण है।

  • पहला कारण: इस दिन खास तौर से विद्या की देवी सरस्वती माँ की पूजा की जाती है। यह पूजा सम्पूर्ण भारत में बड़े उल्लास के साथ की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पीले कपड़े पहने जाते हैं और यहीं कारण है कि इस दिन स्त्रियां पीले वस्त्र धारण करती हैं
  • दूसरा कारण: इस त्योहार को मनाने का यह है कि बसंत पंचमी के पर्व से ही ‘वसंत ऋतु’ का आगमन होता है, जब शांत, ठंडी, मंद वायु, कटु शीत का स्थान ले लेती है तथा सब को उत्साह का स्पर्श देती है। लोकप्रिय खेल जिसका नाम पतंगबाजी है वह भी बसंत पंचमी से ही जुड़ा हुआ है।

बसंत पंचमी पर निबंध और बसंत पंचमी की कथा

बसंत पंचमी की कथा

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सृष्टि के प्रारंभिक काल में ब्रह्मा जी ने जीवों के साथ साथ मनुष्य योनि की रचना भी की। अपनी इस रचना से ब्रह्मा जी संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गयी है जिसके कारण हर तरफ शांति छाई रहती है। ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु जी से अनुमति लेकर अपने कमंडल से जल छिड़का और जल कण के पृथ्वी पर गिरते ही उसमें कंपन होने लगी। उसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्बुध प्राकट्य हुआ। यह प्राकट्य एक सुन्दर, मनोहर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा थी तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था, अन्य दो हाथ और थे जिनमें पुस्तक व माला थी।

ब्रह्मा जी ने उस देवी से वीणा बजाने को कहा जैसे ही उन देवी ने वीणा की मधुर आवाज निकाली तभी सारे संसार को वाणी मिल गयी। पवन की सरसराहट भी सुनने को मिली, पक्षी चिचियाने लगे, जीव जंतु बोलने लगे तब ब्रह्मा जी ने उन देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा।

सरस्वती जी को वीणावादिनी, वागीश्वरी, भगवती, शारदा आदि कई नामों से उन्हें पुकारा जाने लगा।

माँ सरस्वती विद्या की देवी है। संगीत की देवी होने के कारण इन्हें संगीत की देवी भी कहा जाता है। वसंत पंचमी के दिन को माँ सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाते है। ऋग्वेद में माँ भगवती सरस्वती देवी जी का वर्णन करते हुए कहा गया है। मान्यता अनुसार माँ सरस्वती तो ब्रह्मा की पत्नी सावित्री की पुत्री थीं। दूसरे मत अनुसार वह ब्रह्मा की मानसपुत्र थीं।

बसंत पंचमी के बारे में जानकारी

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। 
प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु

इसका अर्थ है कि ये परम चेतना है। माँ सरस्वती हमारी बुद्धि, प्रज्ञा और मनोवृत्तियों की सरंक्षिका है। हममें जो आचार और गुण, मेधा है उनका आधार माँ सरस्वती ही है। माँ सरस्वती की समृद्धि और वैभव अद्भुत है। पुराणों के अनुसार भगवान कृष्ण ने माँ सरस्वती को एक वरदान दिया था की वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी आराधना की जायेगी। यूँ ही भारत के कई हिस्सों में माँ सरस्वती की पूजा होने लगी। पतंग उड़ाने का इस दिन रिवाज हजारों वर्ष पहले चीन में शुरू हुआ था, फिर जापान के रास्ते होता हुआ यह भारत आया। पतंग तब से इस त्यौहार पर उड़ाई जाती है।


बसंत पंचमी का महत्व (वसंत ऋतु का महत्व)

बसंत पंचमी के आते ही प्रकृति और अद्भुत लगने लगती है मानो चारों तरफ खुशहाली सी छा गयी हो। पशु पक्षी उल्लास से भर जाते है। एक नई उमंग के साथ सूर्योदय होता है और नई चेतना को प्रदान करके अगले दिन फिर इसी प्रकार आने की आशा देकर चला जाता है।

वसंत पंचमी का महीना माघ का महीना होता है यह माघ का पूरा महीना उत्साह का महीना होता है।

प्राचीन काल से वसंत पंचमी को माँ सरस्वती का जन्मदिन के नाम से जाना जाता है। जो लोग शिक्षाविद भारत से प्रेम करते है वो लोग इस दिन माँ सरस्वती की आराधना करते है। कलाकारों के लिए तो बसंत पंचमी पर निबंध का बहुत अधिक महत्व है। कवि, लेखक, गायक इस दिन जरूर माँ सरस्वती की आराधना करते है। इसके साथ ही यह दिन हमें अतीत की कुछ प्रेरक घटनाएं भी याद दिलाता है। बसंत पंचमी के दिन ही श्री राम चंद्र जी दक्षिण से होते हुए शबरी की कुटिया जा पहुंचे थे जहां उन्होंने शबरी के हाथों बेर खाए थे। शबरी ने एक एक बेर चख कर की यह बेर मीठा है या नहीं, तब श्री राम जी को बेर खिलाए थे। उस क्षेत्र के वनवासी आज भी उस जगह को पूजते है जहां श्री राम चंद्र जी जाकर बैठे थे। वहां आज भी माता शबरी का मंदिर है यह घटना वसंत पंचमी की ही है। वसंत पंचमी की महत्वता का अपना ही अनोखा रूप है।

Essay on Basant Panchami in Hindi

Maa Saraswati Mantra

माँ सरस्वती मंत्र

बसंत पंचमी का दिन हमें पृथ्वीराज चौहान की याद भी दिलाता है। उन्होंने मोहम्मद गोरी को सोलह बार हराया था और हर बार अपनी उदारता के कारण मोहम्मद गोरी को जिंदा छोड़ दिया था। परन्तु सत्रहवीं बार मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया और उन्हें अफगानिस्तान लेजाकर पृथ्वीराज चौहान की आंखें फोड़ दी। मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को मृत्यु दण्ड देने से पहले उनके शब्दभेदी बाण का कमाल देखना चाह। पृथ्वीराज चौहान ने अपने साथी चंदरबाई के द्वारा दिए सन्देश और अनुमान लगाकर तीर इस प्रकार मारा की वो तीर सीधा मोहम्मद गोरी के सीने में जा धसा और इसके बाद पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी ने भी एक दूसरे को छुरा भोंककर खत्म कर दिया।

बसंत पंचमी पर भाषण और बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है?

बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है

बसंत पंचमी के दिन का लाहौर के निवासी वीर हकीकत का भी गहरा सम्बन्ध है। एक दिन जब मुल्ला जी किसी काम की वजह से पाठशाला से जल्दी चले गए थे तब सब बच्चे खूब मस्ती कर रहे थे परन्तु वह पढ़ाई कर रहा है। मुस्लिम बच्चे उसे छेड़ रहे थे तो वीर हकीकत ने दुर्गा माँ की कसम देकर उन बच्चों से कहां कि मुझे परेशान मत करो। तब उन बच्चों ने दुर्गा माँ का मजाक उड़ाया और कहा की अगर तुम्हारी बीबी फातिमा का कोई इसी तरह मजाक उड़ाए तो तुम्हें कैसा लगेगा?

उन मुस्लिम बच्चों ने हकीकत की शिकायत मुल्ला जी से की और यह मामला काजी तक पहुंच गया और सजा के रूप में हकीकत को मृत्यु दण्ड मिला और उसकी मासूम शक्ल को देखकर कसाई भी उसका सर काटने से रुक गया। तब हकीकत ने कहा कि मैं बच्चा होकर अपने धर्म से नहीं हट रहा और तुम बड़े होकर भी अपने धर्म से हट रहे हो। अपने धर्म का पालन करो तभी कसाई ने बिना समय व्यर्थ किए हकीकत का सर काट दिया और हकीकत का शरीर उड़कर अम्बर में चला गया और वहीं आकाश मार्ग से सीधा स्वर्ग चला गया।

पाकिस्तान एक मुस्लिम देश है फिर भी हकीकत के आकाशगामी शीश की याद में वहां पतंग उड़ाई जाती है और आज भी वहां पतंग उड़ाई जाती है। वसंत पंचमी के दिन ही कलम के सिपाही हिंदी साहित्य की अमर विभूति महाकवि सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी का जन्म दिन है। त्रिपाठी जी ने कई साहित्य लिखे है वे मन के अच्छे और दिल से बहुत नरम थे। वो हमेशा गरीबों की मदद करते थे और निर्धनों को धन भी देते थे इसलिए लोग उन्हें महाप्राण भी कहते हैं।


बसंत पंचमी कैसे मनाई जाती है?

भारत में हिन्दू संस्कृति का पालन करने वाले अधिकतम व्यक्ति है और जैसा कि आप जानते ही है कि भारत का एक नाम हिंदुस्तान भी है। विविधता भारत की पहचान और यहीं कारण है कि हमारे देश में एक ही त्योहार के कई नाम होते हैं और इसको विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है।

वसंत पंचमी को भारत के कुछ हिस्सों में वसंत पंचमी के नाम से बोल कर मनाया जाता है, वहीं पूर्वी भारत में इस त्योहार को सरस्वती पूजा के नाम से जाना जाता है। इस त्योहार के सरस्वती पूजा के नाम से चर्चित होने के कारण इस दिन रस्वती माता के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। जैसा कि आप जानते ही है कि सरस्वती माता विद्या कि देवी है तो इस प्रकार से यह त्योहार स्कूल में मुख्य तौर पर मनाया जाता है, यदि आप अब अपने स्कूल को पास कर जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं तो नीचे दिए गए टिप्पणी बॉक्स में अपने कमेंट के माध्यम से हमें यह बता सकते है कि आपके स्कूल में सरस्वती पूजा कैसे मनाई जाती थी?

जैसे – जैसे समय बढ़ रहा है सभी संस्कृति के बारे में हम ज्ञान अर्जन करने लगे है और मैं आपको बताना चाहता हूँ कि यह त्योहार शुरुआत में पूर्वी भारत खास कर बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में मनाया जाता था। लेकिन अब यह पर्व समस्त विश्व में हिन्दू त्यौहार के रूप में मनाया जाने लगा है।

इस दिन विशेष रूप से सभी विद्यालय और विश्वविद्यालय में एक पूजा का आयोजन किया जाता है, क्योंकि इस दिन सभी स्कूल बंद होते है तो इस कारण से एक दिन पहले ही माँ सरस्वती पूजा का आयोजन कर दिया जता है। इस शुभ दिन मंदिरों में भी विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है, और घरों में भी खास पूजा का आयोजन किया जाता है। काफी जगह पर इस दौरान विशेष पूजा पंडालों का भी आयोजन देखने को मिलता है जहाँ मां सरस्वती की पूजा की जाती है। क्योंकि मां सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी माना जाता है, और जैसा कि आप जानते ही है कि प्रत्येक पर्व का महत्व है और यहीं कारण है कि इस त्योहार का भी अपना अलग महत्व है और सभी लोग कला, साहित्य, विज्ञान अथवा किसी अन्य क्षेत्र से भी संबंधित क्यों ना हो वे सभी लोग इस बसंत पंचमी के पर्व को जरूर मनाते हैं।

यदि मैं अपने भाव स्पष्ट करूँ तो मेरे हिसाब से जिस भी व्यक्ति को अपने जीवन में सफलता चाहिए उसे खास रूप से वसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की पूजा करनी चाहिए। पुजा पाठ के अलावा वसंत पंचमी के दिन श्रद्धालु गंगा तथा अन्य पवित्र नदियों में डुबकी लगाने के बाद मां सरस्वती की आराधना करते हैं, वहीं उत्तराखंड के हरिद्वार और उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में तो श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ रहती है। इस दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा और संगम के तट पर पूजा अर्चना करने आते हैं। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड व अन्य राज्यों से श्रद्धालु हिमाचल प्रदेश के  तातापानी में एकत्रित होते है और वहां सल्फर के गर्म झरने में स्नान करते हैं। पंजाब में ग्रामीणों को सरसों के पीले खेतों में झूमते तथा पीले रंग की पतंगों को उड़ाते देखा जाता है।

अब हम आगे बढ़ते हैं, जैसा कि आप सभी जानते है कि वर्ष 2021 से एक नया दशक आरंभ हुआ है जिसे हम पूरे तरीके से तकनीकी दशक के रूप में जान सकते हैं। तकनीक आज इतने आगे बढ़ गए है कि हर काम को हम घर बैठे पूरा करने लगे हैं – जैसे शॉपिंग करने से लेकर खाना घर बैठे ऑर्डर करना। इतने अग्रिम समय में हम सभी सोशल मीडिया का इस्तेमाल खुल के करने लगे है और जब भी कोई त्योहार आता है हम अपने सभी जानकारों को हार्दिक शुभकामना सोशल मीडिया के माध्यम से जरूर देते हैं। इसी बात को मध्य नजर रखते हुए मैं आपके साथ अब बसंत पंचमी पर अनमोल वचन साझा करने जा रहा हूँ-

बसंत पंचमी पर अनमोल वचन 2021

पीले पीले सरसों के फूल, पीली उडी पतंग,
रंग बरसे पीले और छाये सरसों की उमंग,
जीवन में आपके रहे हमेशा बसंत के ये रंग,
इसी तरह जीवन में आपके हमेशा बनी रहे खुशियों की तरंग…

Basant Panchami Status in Hindi 2021

गाओ सखी होकर मगन आया है बसंत,
राजा है ये ऋतुओं का आनंद है अनंत,
पीत सोन वस्त्रों से सजी है आज धरती,
आंचल में अपने सौंधी-सौंधी गंध भरती,
तुम भी सखी पीत परिधानों में लजाना,
नृत्य करके होकर मगन प्रियतम को रिझाना,
सीख लो इस ऋतु में क्या है प्रेम मंत्र
गाओ सखी होकर मगन आया है बसंत…

Happy Basant Panchami 2021 Wishes in Hindi

वीणा लेकर हाथ मे,
सरस्वती हो आपके साथ मे,
मिले माँ का आशीर्वाद आपको हर दिन,
मुबारक़ हो आपको सरस्वती पूजा का ये दिन…
बसंत पंचमी 2021 की शुभकामनाएं।

Happy Basant Panchami 2021 Quotes in Hindi

सर्दी को तुम दे दो विदाई, बसंत की अब ऋतु है आई,
फूलों से खुशबू लेकर महकती हवा है आई,
बागों में बहार है आई, भँवरों की गुंजन है लायी,
उड़ रही है पतंग हवा में जैसे तितली यौवन में आई,
देखो अब बसंत है आई…

बसंत पंचमी 2021 की शायरी स्टेटस

इस बसंत पंचमी माँ सरस्वती आपको हर वो विद्या दे
जो आपके पास नहीं है और जो है उस पर चमक दे
जिससे आपकी दुनिया चमक उठे…
बसंत पंचमी इमेज डाउनलोड

आप इस 2021 के वसंत पंचमी के पावन उत्सव पर अपने रिश्तेदारों के साथ सिर्फ कॉपी कर के सोशल मीडिया के माध्यम से पोस्ट कर के त्योहार की शुभकामना शेयर कर सकते हैं। आप चाहे तो बसंत पंचमी इमेज डाउनलोड भी कर के शेयर कर सकते हैं।

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बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती वंदना

बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती वंदना गाया जाता है, भारत के लगभग सभी विद्यालयों में सरस्वती माता के जन्मदिन के पावन उत्सव पर जब पूजा पाठ का कार्यक्रम समाप्त हो जाता है तो उसके बाद सरस्वती वंदना गाया जाता है। दोस्तों आप चाहे तो रोजाना भी जब आप स्नान करने के बाद पूजा करते है तो सरस्वती वंदना एक बार गा सकते हैं, यह बहुत ही छोटी और सरल है-

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥

अर्थ: जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली मां सरस्वती हमारी रक्षा करें।

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥

अर्थ: जिनका रूप श्वेत है, जो ब्रह्मविचार की परम तत्व हैं, जो सब संसार में फैले रही हैं, जो हाथों में वीणा और पुस्तक धारण किये रहती हैं, अभय देती हैं, मूर्खतारूपी अन्धकार को दूर करती हैं, हाथ में स्फटिकमणि की माला लिए रहती हैं, कमल के आसन पर विराजमान होती हैं और बुद्धि देनेवाली हैं, उन आद्या परमेश्वरी भगवती सरस्वती की मैं वन्दना करता हूँ।

Saraswati Vandana in Hindi

बसंत पंचमी पर अच्छी सी कविता

अब मैं आपके साथ बसंत पंचमी पर अच्छी सी कविता शेयर करने जा रहा हूँ, जिसको आप आने वाले वसंत पंचमी के दिन अपने विद्यालय या फिर जहाँ इस पावन दिन पर पंडाल लगा हो वहां पर याद करके सब को सुना सकते हैं।

बसंत पंचमी पर कविता 2020: Basant Panchami Poem in Hindi
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ,
अज्ञानता से हमें तार दे माँ

तू स्वर की देवी ये संगीत तुझ से,
हर शब्द तेरा है हर गीत तुझ से,
हम है अकेले, हम है अधूरे,
तेरी शरण हम हमें प्यार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ...

मुनियों ने समझी, गुनियों ने जानी,
वेदों की भाषा, पुराणों की बानी,
हम भी तो समझे, हम भी तो जाने,
विद्या का हमको अधिकार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ...

तू श्वेत वर्णी कमल पे विराजे,
हाथों में वीणा, मुकुट सर पे साझे,
मन से हमारे मिटाके अंधेरे,
हमको उजालों का संसार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ...
वसन्त पंचमी कथा 2021

अब मैं आपके साथ वसंत पंचमी  2021 कथा साझा करने जा रहा हूँ, जिसको वसंत पंचमी के दिन सुनना आवश्यक होता है। आप चाहे तो इसे खुद भी पढ़ कर अपने दोस्तों और भाई – बहनों को सुना सकते हैं। काफी लोग इस दिन व्रत भी रखते है तो यदि आप भी व्रत करने वाले है तो फिर तो यह आपके लिए बहुत ही अनिवार्य है कि आप इसे जरूर सुने।

वसंत पंचमी की प्रामाणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की आज्ञा से इस संसार के रचयिता ब्रह्मा जी ने मनुष्य योनी बनाई। एक बार वे पृथ्वी पर विचरण कर रहे थे, तो उन्होंने मनुष्यों और अन्य प्राणियों को देखा। तब उन्हें लगा कि इनके होने के बाद भी काफी शांति है। उनको कुछ कमी लग रही थी। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल निकलकर पृथ्वी पर छिड़क दिया। ऐसा करते ही चार भुजाओं वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उनके एक हाथ में वीणा, एक में माला, एक में पुस्तक और एक हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने उनको वाणी की देवी सरस्वती के नाम से पुकारा। उन्होंने मां सरस्वती से अपनी वीणा की मदद से सभी प्राणियों को वाणी प्रदान करने को कहा। मां सरस्वती ने अपनी वीणा के मधुर नाद से संसार के सभी जीवों को वाणी प्रदान की| मुझे यह कथा बहुत अच्छी लगती है, आपको यह कथा कैसी लगी कमेंट कर के बताना मत भूलिएगा-

बसंत पंचमी पर निबंध के इस लेख को आप सोशल मीडिया पर जरूर साझा करें जिससे और व्यक्ति इस त्यौहार के बारे में पढ़ सके। कमेंट करके अपनी राय जरूर दे की आपको यह त्यौहार कैसा लगता है और आप क्या करोगे।

About the author

Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमें आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

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