हनुमान जयंती पर निबंध, पूजाविधि, कथा, महत्व और कहानी

हनुमान जयंती पर निबंध, पूजाविधि, कथा, महत्व और कहानी
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हनुमान जयंती एक हिन्दू पर्वों में से एक है| हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है| इस पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म हुआ था इसीलिए इसे हनुमान जयंती कहते है.

भगवान् हनुमान की माता अंजनी देवी थी और पिता महाराज केसरी थे| इन्हे पवन पुत्र भी खा जाता है| हनुमान जी के कई नाम है जैसे:-

  • केसरी नंदन
  • बजरंग बली
  • मारुति
  • शंकर सुवन
  • संकटमोचन

आदि कई नाम है|

रामायण युग में दिव्य शक्तियों से परिपूर्ण राम भक्त हनुमान जी को कौन नहीं जानता और कौन नहीं समझता है?

राम भक्त हनुमान जी सर्वगुण सम्पन्न, बाल ब्रह्मचारी, हर प्रकार के कठिन से कठिन कार्य को करने के लिए सदा तत्पर रहने वाले हैं हनुमान जी एक महान देवता हैं.

हनुमान जयंती के दिन लोग मंदिर में दर्शन के लिए जाते है| लोग इस दिन व्रत भी रखते है और विधि अनुसार पूजा भी करते है.

हनुमान जी बाल भर्म चारि थे इसी कारण वष ये जनेऊ भी पहनते है| भगवान हनुमान जी की मूर्ति पर चांदी और सिंदूर चढ़ाया जाता है|

कहते है की श्री राम जी की लम्बी उम्र के लिए भगवान हनुमान जी ने पुरे शरीर पर सिंदूर चढ़ा लिया था इसी कारण इनके भक्त हनुमान जी के ऊपर सिंदूर भी चढ़ते है जिसे चोला भी कहते है.

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हनुमान जी की पूजा विधि – हनुमान जी को प्रसन्न करने के उपाय

हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है

हनुमान जी भगवान शिव के 11वे अवतार के रूप में माने जाते है और भगवान हनुमान जी श्री राम जी के सबसे बड़े भक्त है|

हनुमान जी की पूजा प्रत्येक सप्ताह मंगलवार के दिन जरूर की जाती है| कई भक्तजन अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मंगलवार के दिन विधि वट पूजा पथ और व्रत करते है.

हनुमान जी की पूजा के लिए एक चोकी और एक लाल कपड़ा भगवान राम जी की मूर्ति और कच्चे टूटे चावल, कुछ तुलसी की पत्तिया, धुप या अगरबत्ती, गहि या सरसो के तेल से भरा हुआ एक दिया, कुछ ताजे फूल चन्दन और रोली गंगा जल और गुड़ थोड़े भुने हुए चने|

इस पूरी सामग्री को पूजा घर में रखे और चोकी को एक निश्चित स्थान पर रखकर उसपे लाल कपड़ा बिछाये|

चोकी पर हनुमान जी की मूर्ति या फोटो लगाये और ध्यान रहे की कोई भी पूजा भगवान गणेश जी को नमन किये बिना पूरी नही होती है इसीलिए सबसे पहले भगवान गणेश जी को नमन करे और उनकी मूर्ति के सामने दिया व धूप जलाये.

अब आप हनुमान जी की प्रार्थना करे और उन्हें अपने यहां आने का नियंत्रण दे| सबसे पहले दिया जलाये और फिर धूप लगाये इसके बाद जल अर्पण करे, इसके बाद हनुमान जी को तिलक करे और चावल भी चढ़ाए.

हनुमान मंत्र ॐ हं हनुमते नमः का 108 बार जाप करें।

मंत्र का उच्चारण करते हुए हनुमान जी के सामने बैठने की मुद्रा में आ जाएं और हनुमान जी के कवच का पाठ करे|

इस कवच से भूत, प्रेत, चांडाल, राक्षश व अन्य बुरी आत्माओं से बचाव किया जा सकता है| यह कवच आपको टोनो टोटको से बचाता है और आपकी रक्षा करता है| काला जादू इस पर पूरी तरह पराजित हो जाता है.

इस कवच का पूर्ण लाभ से जीवन के सभी शोक मिट जाते है, अत: इसे शोकनाशं भी पुकारा जाता है| साथ ही जीवन में जो भी कष्ट होते हैं, वो कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाते हैं.

मंत्रोच्चारण के बाद हनुमान जी से अपनी पूजा स्वीकार करने की प्रार्थना करे और अब हनुमान जी से पूजा विधि में हुई कोई भी गलती हुई हो तो उसके लिए माफ़ी मांगे और हनुमान जी का आशीर्वाद ले.

हनुमान जी की कथा हिंदी में – हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है ?

हनुमान जी की पूजा विधि

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की महानिशा में ांझना के उदर से हनुमान जी उत्पन्न हुए और दो प्रहर के बाद सूर्य उदय होते ही हनुमान जी को भूख लग गयी तब उनकी माता उनके लिए कुछ फल लाने गई इतने में हनुमान जी ने एक डिअर से लाल उदित सूर्य देखा और वो सूर्य देव को फल समझ उनकी और चल पड़े.

भगवान हनुमान सूर्य देव को ग्रहण करने की इच्छा से आकाश मार्ग से भगवान सूर्य की और जाने लगे| उस दिन अमावस्या थी.

उस दिन भगवान सूर्य को ग्रहण करने के लिए राहु भी सूर्य देव की और जा रहा था परन्तु हनुमान जी को लगा की राहु उनका फल खा लेगा इसीलिए उन्होने राहु को डरा कर भगा दिया और अपने फल को पाने की इच्छा से फिर से सूर्य देव की और चल पड़े.

तब इंद्र देव ने हनुमान जी को रोकने का प्रयास किया लेकिन हनुमान जी नही रुके तो इंद्र देव ने हनुमान जी की थोड़ी पर अपने वज्र से प्रहार कर दिया और उनकी थोड़ी टेडी हो गई जिससे ये हनुमान जी कहलाये.

तब पवन देव ने गुस्से में आकर पवन का संचालन रोक दिया और पुत्र हनुमान की चिंता में वहीं बैठे रहे… तब शिव जी, विष्णु जी, भरमः जी आदि सभी देवता आये और उन्होने हनुमान जी को अलग अलग शक्तियाँ प्रधान की और आशीर्वाद दिया| तब पवन देव ने वायु संचालन शुरू किया.

इस प्रकार सभी देवी देवताओं के आशीर्वाद से हनुमान जी पराक्रमी और अद्भुत बन गए| उनसे भूत प्रेत आदि सब डरते है| हनुमान जी का आह्वान करने से कोई भी बुरी शक्ति निकट नही आती है.

हनुमान जी आज भी जनमानस के संकटों को दूर कर रहे हैं तथा युवाओं व समाज के लिए अद्भुत प्रेरणास्रोत भी हैं.

मान्यता है कि हनुमान जी बुद्धि, बल, वीर्य प्रदान करके भक्तों की रक्षा करते हैं| हनुमान जी के स्मरण से रोग, शोक व कष्टों का निवारण होता है| मानसिक कमजोरी व दुर्बलता के दौर में हनुमान जी का स्मरण करने मात्र से जीवन में नये उत्साह का संचार होता है.

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प्रिय भक्ति, हनुमान जयंती का यह लेख यही पर खत्म होता है| मुझे उम्मीद है की आपको हनुमान जी के बारे में जानकारी जानकर अच्छा लगा होगा|

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Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमे आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

5 thoughts on “हनुमान जयंती पर निबंध, पूजाविधि, कथा, महत्व और कहानी”

  1. Jai bjrangbli.
    सर आप even blogging के जानकार हो इसलिए प्लिज बताए कि मै 15 अगस्त के लिए ब्लाग बना रहा हू । तो मुझे किस नाम से डोमेन लेना चाहिए और कब ब्लॉग स्टार्ट करना चाहिए ?

    • काम अभी से शुरू करदे|

      1 हफ्ते में 1 आर्टिकल लिखे पर अच्छा लिखे| सारी जानकारी लिखे|

      1 हफ्ते में 1 आर्टिकल लिखोगे तो अच्छा भी लिख पाओगे और 15 अगस्त तक काफी आर्टिकल हो जायेंगे|

      जितने भी आर्टिकल लिखो सब को शेयर करो और सब पर लिंक बनाओ|

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