स्वामी विवेकानंद की जीवनी, शिक्षा, योगदान और उनकी मृत्यु का कारण

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नाम : नरेंद्रनाथ दत्त
जन्म : 12 जनवरी 1863 कलकत्ता (अब कोलकाता)
मृत्यु : 4 जुलाई 1902 (उम्र 39) बेलूर मठ, बंगाल रियासत, ब्रिटिश राज (अब बेलूर, पश्चिम बंगाल में)
पिता : विश्वनाथ दत्त
माता : भुवनेश्वरी देवी
गुरु/शिक्षक : श्री रामकृष्ण परमहंस
साहित्यिक कार्य : राज योग, कर्म योग, भक्ति योग, ज्ञान योग, माई मास्टर
कथन : “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये”
धर्म : हिन्दू
राष्ट्रीयता : भारतीय
शिक्षा : 1884 मे बी. ए. परीक्षा उत्तीर्ण
विवाह : विवाह नहीं किया

स्वामी विवेकानंद की जीवनी

स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 में हुआ था| स्वामी जी का वास्तविक नाम नरेंद्र नाथ दत्त था.

उन्होंने अमेरिका में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की और से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया| भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदांत दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानंद के द्वारा ही पहुंचा.

स्वामी जी ने राम कृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना कार्य उसी प्रकार कर है| इनके गुरु का नाम श्री रामकृष्ण परमहंस है| उन्हें प्रमुख रूप से उनकी भाषण करते समय “मेरे अमरीकी भाइयो और बहनो” बोलने की वजह से जाना जाता था.

उनके बोलने के इस कथन ने सबका दिल जित लिया था| वे बंगाली परिवार ने जन्मे थे और वे आध्यात्मिकता की और झुके हुए थे.

स्वामी जी अपने गुरु रामकृष्ण देव जी से बहुत प्रभावित थे उन्होंने सीखा की सारे जिव परमात्मा का ही अवतार है इसलिए मानव जाति की सेवा द्वारा परमात्मा की भी सेवा की जा सकती है.

रामकृष्ण जी की मृत्यु के बाद विवेकानंद ने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया और ब्रिटिश भारत में मौजूदा स्तिथियो का ज्ञान हासिल किया बाद में विश्व धर्म संसद में भारत का प्रतिनिधित्व करने और संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए कूच की|

स्वामी जी ने अमेरिका, यूरोप और इंग्लैंड में भारतीय हिन्दू दर्शन का प्रसार किया| कई सार्वजनिक और निजी व्याख्यानों का आयोजन किया.

स्वामी विवेकानंद जी के जन्म दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है|

बचपन से ही स्वामी जी कुशाग्र बुद्धि के साथ साथ नटखट भी थे| अपने साथी और दोस्तों के साथ मिलकर खूब शरारत करते थे और मौका मिलने पर अध्यापको के साथ भी शैतानी करने से नहीं चूकते थे.

स्वामी विवेकानंद की माता धार्मिक परवर्ती की थी उन्हें रामायण, भगवत गीता और महाभारत का पाठ सुनने का शौंक था और घर में रोज नियमपूर्वक पूजा हुआ करती थी.

कथावाचक उनके घर आकर भी कथा करते थे| धार्मिक तथा आध्यात्मिक परिवार के होने की वजह से स्वामी जी के लक्षण भी बिलकुल धार्मिक परवर्ती के थे.

माता पिता के संस्कार स्वामी जी में पूर्ण रूप से थे| धार्मिक परवर्ती के होने के कारण बचपन में ही उनके मन में ईश्वर को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई जिसकी वजह से वो माता पिता से प्रश्न ही पूछते रहते थे.

कभी कभी तो स्वामी जी ऐसे प्रश्न पूछते थे जिससे पंडित जी भी सोच में पड जाया करते थे| स्वामी विवेकानंद जी को शास्त्रीय संगीत का भी ज्ञान था वे नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम और खेलो में भी भाग लिया करते थे स्वामी विवेकानंद जी|

स्वामी विवेकानन्द की शिक्षा – Swami Vivekananda Education

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय

स्वामी विवेकानंद जी ने सन् 1871 में आठ साल की उम्र में ईश्वर चंद विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन संसथान में दाखिला लिया जहाँ उन्होंने स्कूल जाना प्रारम्भ किया.

सन् 1877 में उनका परिवार रायपुर चला गया| सन् 1879 में उनका परिवार वापस कलकत्ता आ गया| उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज प्रवेश परीक्षा में प्रथम डिवीज़न से अंक प्राप्त करने वाले वे एकमात्र छात्र थे.

वे दर्शन, धर्म, इतिहास तथा समाजिक विज्ञान आदि कई विषयो के उत्साही पाठक थे| स्वामी जी की वेद, उपनिषद, रामायण, गीता और कई पुराणों में तथा हिन्दू शास्त्रों में गहन रूचि थी.

स्वामी विवेकानंद जी को शास्त्रीय संगीत का भी ज्ञान था| वे नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम और खेलो में भी भाग लिया करते थे| स्वामी जी ने यूरोपीय इतिहास का अध्ययन जेनेरल असेम्ब्ली इंस्टीटूशन में किया.

सन् 1881 में उन्होंने ललित कला की परीक्षा उत्र्तीण की| 1884 में कला स्तानक की डिग्री पूरी कर ली.

स्वामी जी ने स्पेंसर की किताब एजुकेशन का बंगाली में अनुवाद किया ये हर्बट स्पेंसर की किताब से काफी प्रभावित थे.

विलयम हेस्टी महासभा संस्था के प्रिंसिपल ने लिखी “नरेन्द्रनाथ वास्तव में एक जीनियस है मेने काफी बड़े इलाको में यात्रा की है लेकिन नरेन्द्रनाथ जैसी प्रतिभा वाला एक भी एक भी बालक नहीं देखा” अनेक बार इन्हे श्रुतिधर भी कहा गया है.

विवेकानंद जी के योगदान – Swami Vivekananda Biography in Hindi

स्वामी विवेकानंद की जीवनी : उन्तालीस वर्ष की उम्र में स्वामी विवेकानंद जी जो जो कार्य कर गए है आज की पीढ़ी को इतना कार्य करने में कई वर्ष लग जायेंगे उनके द्वारा तिस वर्ष की उम्र में स्वामी विवेकानंद जी ने अमेरिका के विश्व धर्म सम्मेलन में हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व किया.

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ जी ने एक बार कहा था यदि आप भारत को जानना चाहते है तो विवेकानंद को पढ़िए उनमे आप सब  कुछ सकरात्मक ही पाएंगे नकरात्मक कुछ भी नहीं|

रोमा रोला ने कहा है की स्वामी जी का द्रितीय होने की कल्पना भी करना असंभव है| स्वामी जी जहा भी गए है हमेशा प्रथम ही आये है हर कोई उनमे एक नेता और गुरु का दिग्दर्शन करता था.

स्वामी जी ईश्वर के प्रतिनिधि थे और सब पर प्रभुत्व पाना उनकी विशिष्टता थी हिमालय में एक बार एक यात्री स्वामी जी को देखकर रुक गया और देखते ही चिल्ला कर बोला “शिव” मानो स्वामी जी में उसने अपने आराध्य को देखा हो.

स्वामी जी केवल संत ही नहीं बल्कि वो एक महानदेशभकत, वक्ता, विचारक, लेखक और मानव प्रेमी थे| स्वामी जी का विश्वास था भारत पवित्र धर्म और दर्शन की भूमि है क्युकी इसी भारत देश की भूमि पर बड़े बड़े महात्मा और ऋषियों का जन्म हुआ.

यह भूमि त्याग और सन्यास की भूमि है और उनका मानना था की यही इसी धरती पर मनुष्य के लिए सर्वोच्च जीवन तथा मुक्ति का द्वार खुला है.

उनका कथन “उठो जागो और ओरो को भी जगाओ अपने मनुष्य जन्म को सफल करो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाय”

उनके इस कथन ने लोगो की सोच बदल दी और उन्हें उनके जीवन में कुछ करने की एक राह मिली उन्नीसवीं सदी के आखरी वर्षो में विवेकानंद जी हिंसक क्रांति से भारत को आजाद करना चाहते थे फिर उन्होंने “एकला चलो” की निति को अपना कर भारत और दुनिया को खंगाल डाला.

स्वामी जी ने कहा था की मुझे बहुत से युवा सन्यासी चाहिए जो पुरे भारत में फैलकर देशवासियो की सेवा में लग जाय.

स्वामी विवेकानंद जी धार्मिक आडंबरो और रूढ़ियों के शख्त खिलाफ थे स्वामी जी का कहना है की धरती की गोद में भारत ही एक ऐसा देश है जहा मनुष्य  हर तरह है बेहतरी के लिए हर ईमानदार कोशिश करता हैं.

स्वामी विवेकानंद की मृत्यु कैसे हुई ? – Swami Vivekananda Death

स्वामी विवेकानंद की मृत्यु का कारण ?

अपने जीवन के अंतिम दिनों में स्वामी जी ने “शुक्ल यजुर्वेद” की व्याख्या की और कहा एक और विवेकानंद चाइये.

इस विवेकानंद को समझने के लिए की इस विवेकानंद ने अब तक क्या किया| 5 जुलाई 1902 अपनी जिंदगी के अंतिम दिन को भी उन्होंने अपनी रोज की दिनचर्या को नहीं बदला ध्यान करने बैट गए और ध्यान करने की मुद्रा में ही समाधी लेली|

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स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार – Swami Vivekananda Quotes in Hindi

Swami Vivekananda Quotes in Hindi

#1. उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये|

#2. ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं| वो हमीं हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है|

#3. जिस तरह से विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न धाराएँ अपना जल समुद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा भगवान तक जाता है|

#4. किसी की निंदा ना करें: अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं| अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये|

#5. अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है|

#6. हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिये कि आप क्या सोचते हैं| शब्द गौण हैं| विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं|

#7. सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा|

#8. विश्व एक व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं|

#9. यदि स्वयं में विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता|

#10. एक विचार लो. उस विचार को अपना जीवन बना लो – उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो, उस विचार को जियो| अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो| यही सफल होने का तरीका है|

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Himanshu Grewal

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1 thought on “स्वामी विवेकानंद की जीवनी, शिक्षा, योगदान और उनकी मृत्यु का कारण”

  1. बहुत ही बडिया जानकारी प्रदान करने के लिये आपको धन्यवाद भैया जी ।

    जय सियाराम जी ।

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