लोहड़ी माता की कथा – Happy Lohri Story in Hindi

सभी भक्तों को लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएँ, आज मै आप सभी को बहुत ही महत्वपूर्ण लोहड़ी माता की कथा और कहानी बताने जा रहा हूँ जिसको सुन कर आप सभी के मन में माता लोहड़ी के लिए प्रेम जाग उठेगा.

लोहड़ी का पर्व पंजाबी त्यौहार है, एक खुशियाँ मनाने का सबसे ज्यादा लोकप्रिय त्यौहार माना जाता है| पंजाबियों के साथ साथ हिन्दू धर्म के लोग भी इस त्यौहार को मनाने से पीछे नहीं होंगे.

उम्मीद करूंगा की आपको लोहड़ी माता की कथा का ये लेख बहुत ही अच्छा लगेगा, और अगर अच्छा लगे तो इसको व्हाट्सएप्प, ट्विटर, फेसबुक पर शेयर करने से पीछे मत हटना.

लोहड़ी का त्यौहार माता सती की याद में मनाया जाता है| लोहड़ी के त्यौहार के पीछे एक बहुत ही बड़ी कहानी है जिसे आप नीचे पड़ेंगे|

लोहड़ी के पीछे दुल्ला भट्टी नामक खूंखार डाकू की कहानी भी है, लेकिन ये दुल्ला भट्टी डाकू केवल गलत लोगों के लिए ही गलत थे.

लोहड़ी का त्यौहार रेवड़ियों, गज्जक, मूंगफलियों को बांटने का त्यौहार होता है| ढेर सारी खुशियों को बांटने का त्यौहार है.

वैसे तो भारत में अनेकों त्यौहार मनाए जाते हैं ठीक उसी तरह लोहड़ी का त्यौहार भी मनाया जाता है, लोहड़ी का त्यौहार पंजाबी धर्म के लोगों में मनाया जाता है, लोहड़ी का त्यौहार जनवरी के मास में मनाया जाता है.

लोहडी का त्यौहार उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है| यह मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है| मकर संक्रांति की शाम को इस त्यौहार का उल्लास रहता है.

रात्रि में खुले स्थान में परिवार और आस-पड़ोस के लोग मिलकर कुछ सूखी लकड़ियां, गोबर के उपले, आदि की आग लगाते है और उस आग के किनारे घेरा बना कर बैठते हैं| इस समय रेवड़ी, मूंगफली, लावा आदि खाए जाते हैं.

लोहड़ी का त्यौहार कब मनाया जाता है ?

लोहड़ी पूजा विधि

लोहड़ी का त्यौहार जनवरी में प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है| ये वर्ष के सबसे ज्यादा ठंडे मौसम में मनाई जाती है| लोहड़ी का त्यौहार पौष मौसम के आखिरी दिन, सूरज डूबने के बाद, माघ संक्रांति से पहली रात को मनाया जाता है| लोहड़ी का त्यौहार प्रत्येक वर्ष 12 से 13 जनवरी को ही पड़ता है.

सभी धर्मो के लोगों के अलग अलग त्यौहार मनाए जाते हैं ठीक उसी तरह ही लोहड़ी का त्यौहार पंजाब में मनाया जाने वाला त्यौहार है, लोहड़ी का त्यौहार पंजाबी मनाते है.

लोहड़ी द्योतार्थक (एक्रॉस्टिक) शब्द लोहड़ी की पूजा के समय व्यवहृत होने वाली वस्तुओं के द्योतक वर्णों का समुच्चय सुनाई पड़ता हैं.

लोहड़ी में ल (लकड़ी) + ओह (गोहा = सूखे उपले) + ड़ी (रेवड़ी) = “लोहड़ी” के प्रतीक हैं| लोहड़ी का त्यौहार बड़ी ही मान्यताओं से जुड़ा हुआ है|

लोहड़ी क्यों मनाई जाती है – Why We Celebrate Lohri Festival in Hindi

लोहड़ी माता की कथा पढ़ने से पहले आईये जानते है की क्यों हम लोहड़ी का पर्व मनाते है ?

लोहड़ी का त्यौहार लोगों के बीच प्रेम संबंध को बनाए रखने का त्यौहार है| लोहड़ी से सम्बंध परम्पराओं और रीति रिवाजों से पता चलता है की इतिहास गाथाएँ कहानियाँ इससे जुड़ी हुई है.

दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि दहन की याद में ही यह अग्नि जलाई जाती है| जी हाँ सती जी ये कोई और नहीं हमारे भोले बाबा की पत्नी ही थी जो की अपने पिता दक्ष के सभी यज्ञ में आहुति दे दी थी.

हुआ ये था की राजा दक्ष ने उस यज्ञ में सब को बुलाया था लेकिन भोले बाबा को नहीं बुलाया क्योंकि वो बोले बाबा को पसंद नहीं करते थे| अब इतने बड़े यज्ञ में भगवान शंकर को न बुलाये जाने पर सती माता ने इसे बहुत बड़ी बेइज्जती समझा और अपने पिता के यज्ञ में जाकर हवन कुंड में आहूत दे दी| जिसे आज के समय में लोहड़ी कहा जाता है.

लोहड़ी पर विवाहिता पुत्रियों को माँ के घर से “त्योहार” (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फलादि) भेजा जाता है|

यज्ञ के समय अपने जामाता शिव का भाग न निकालने का दक्ष प्रजापति का प्रायश्चित्त ही इसमें दिखाई पड़ता है| उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में “खिचड़वार” और दक्षिण भारत के “पोंगल” पर भी-जो “लोहड़ी” के समीप ही मनाए जाते हैं| बेटियों को भेंट जाती है.

क्यों और कैसे मनाई जाती है लोहड़ी – Essay on Lohri Festival in Hindi

भारत में अन्य त्यौहारों की तरह लोहड़ी का त्यौहार भी हजारों लाखों लोग मनाते हैं| करीब 15-20 दिन पहले ही घरों के बालक, बालिकाएँ लोहड़ी के गाने, गाने के लिए प्रकटीस शुरू कर देती है.

लकड़ियाँ इकट्ठी करने में उपले इखट्टी करने में लग जाते हैं| संचित सामग्री से चौराहे या मोहल्ले के किसी खुले स्थान पर आग जलाई जाती है| मोहल्ले या गाँव भर के लोग अग्नि के चारों और आसन जमा लेते हैं.

घर और व्यवसाय के कामकाज से निपटकर प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार अग्नि की परिक्रमा करता है|

रेवड़ी (और कहीं कहीं मक्की के भुने दाने) अग्नि की भेंट किए जाते हैं तथा ये ही चीजें प्रसाद के रूप में सभी उपस्थित लोगों को बाँटी जाती हैं| घर लौटते समय “लोहड़ी” में से दो चार दहकते कोयले, प्रसाद के रूप में, घर पर लाने की प्रथा भी है.

कहा जाता है की जिन घरों में परिवारों में लड़के का विवाह होता है या जिनको पुत्र प्राप्ति होती है, उनसे पैसे लेकर मोहल्ले या गाँव भर में बच्चे ही बराबर रेवड़ी बांटते हैं.

लोहड़ी के दिन या उससे दो चार दिन पूर्व बालक बालिकाएँ दुकानदार तथा पथिकों से “मोहमया” या महामाई (ये दोनों लोहड़ी के ही दूसरे नाम है) के पैसे माँगते हैं और इकट्ठे हुए पैसों से लकड़ी और उपलों रेवड़ियों, गज्जक, मूंगफलियों आदि को खरीदकर लोगों में मोहल्ला में बांटते हैं.

लोहड़ी व्याहना क्या होता है – Lohri Essay in Hindi For School Student

गाँव शहर में लोहड़ी का त्यौहार लोग बड़ी ही धूम धाम से मनाते हैं, शहर गाँव के शरारती बच्चे दूसरे की लोहड़ी की आग निकाल कर अपने घर लेकर भाग जाते है| यह “लोहड़ी व्याहना” कहलाता है.

कई बार छीना झपटी में सिर फुटौवल भी हो जाती है| मँहगाई के कारण पर्याप्त लकड़ी और उपलों के अभाव में दुकानों के बाहर पड़ी लकड़ी की चीजें उठाकर जला देने की शरारतें भी चल पड़ी हैं.

ऐसे तो लोहड़ी का त्यौहार पंजाबियों हरयानियों में बड़ी ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है| यह लोहड़ी का त्यौहार लगभग भारत के सभी राज्यों में मनाया जाने लगा है| लेकिन अधिकतर ये त्यौहार पंजाब, हरयाणा, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर और हिमाचल में बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है.

लोहड़ी का त्यौहार उत्पत्ति के बारे में घड़ी मान्यता है जो की पंजाब के त्यौहार से जुड़ी हुई मानी जाती है.

घर के बड़े बुजुर्गों का मानना है की यह लोहड़ी का त्यौहार जाड़े की ऋतु के आने का द्योतक के रूप में मनाया जाता है| आज के समय में ये लोहड़ी का त्यौहार सिर्फ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू कश्मीर और हिमाचल में ही नहीं बल्कि बंगाल और उडिया लोगों द्वारा भी मनाया जा रहा है.

अब तो बाहर अमेरिका, न्यूजीलैंड, कनाडा जैसे देशों में लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाने लगा है| पंजाबी लोगों का यह त्यौहार देश विदेशों में बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाने लगा है.

लोहड़ी माता की कथा – दुल्ला भट्टी की कहानी हिंदी में

लोहड़ी का त्यौहार जो की एक बड़ी ही कहानी की हकदार है| लोहड़ी का त्यौहार एक कहानी दुल्ला भट्टी की एक कहानी से जुड़ी हुई है| लोहड़ी की सभी गानों को दुल्ला भट्टी से ही जुड़ा हुआ माना गया है| दुल्ला भट्टी मुगल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था.

दुल्ला भट्टी एक प्रसिद्ध डाकू था जो की डकैती की राशि से गरीब लड़कियों की शादी कराया करता था| दुल्ला भट्टी को उस समय का नायक घोषित कर दिया गया था.

उस समय संदल बार की जगह पर लड़कियों को गुलामी के बल पूर्वक अमीर लोगों को बीच जाता था जिसे दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत लड़कियों को केवल छुड़ाया ही नहीं उनकी शादी हिन्दू लड़कों से करवा दी और शादी की पूरी व्यवस्था करा दी थी.

दुल्ला भट्टी एक विद्रोही डाकू था| जिसकी वंशवली भट्टी राजपूत थे| दुल्ला भट्टियों के शासक थे जो की संदल बार में था आज के समय में संदल बार पाकिस्तान में है.

दुल्ला भट्टी के डाकू होने पर भी लोग उन्हे अपना नायक मानते है| लोगों को दुला भट्टी के अच्छे इरादे से कोई भी नुकसान नहीं पहुंचता था.

तो दोस्तों उम्मीद करता हूँ की आपको लोहड़ी माता की कथा का ये लेख बहुत ही पसंद आया होगा| लोहड़ी का त्यौहार खुशियों का त्यौहार है लोहड़ी के इस लेख में आपको सभी जानकरी मिल ही गयी होगी.

लोहड़ी के इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर कर दीजिये| हो सके तो इसे इतना शेयर कीजिये की भारत के कोने कोने तक लोगों को ये पता चल जाये की लोहड़ी का त्यौहार क्यों मनाया जाता है.

लोहड़ी का त्यौहार दिलवालों का त्यौहार है| प्यार से मनाइए, थोड़ी सी लोहड़ी उनके घर भी भिजवाए जहां तक लोहड़ी की एक किरण तक नहीं पहुँच पा रही हो| “धन्यवाद”

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Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमे आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

4 thoughts on “लोहड़ी माता की कथा – Happy Lohri Story in Hindi”

  1. बहुत ही अच्छी जानकारी Share की है आपने लोहरी के बारे में Thunks For Share This Post
    और आपको भी Happy लोहरी

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