मेरा प्रिय त्यौहार लोहड़ी पर निबंध

विद्यालय में पढ़ रहे सभी बच्चों, बड़ो, अध्यापकों के लिए मैंने पंजाबियों के प्रमुख त्यौहार लोहड़ी पर मैंने एक शानदार लोहड़ी पर निबंध लिखा है जिससे आप सभी को इस त्यौहार के बारे में अच्छे से पता चल सके.

दोस्तो, प्रति वर्ष हम ना जाने कितने त्योहार मनाते हैं, कुछ तो ऐसे त्योहार होते हैं जो हमारी संस्कृति से जुड़े होते हैं वही कुछ त्योहार हम जानकारी प्राप्त करने के बाद मनाना शुरू करते हैं|

जानकारी प्राप्त होने का अर्थ है जैसे जब हम विद्यालय जाना आरंभ करते हैं तो बाल दिवस, शिक्षक दिवस, गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्र दिवस जैसे कुछ नए त्योहारो के बारे में एक विद्यार्थी को मालूम पड़ता है|

वही जब एक बालक और बड़ा होता है तब उसको और भी कई नए त्योहारों के बारे में मालूम पड़ता है, खास कर विश्व के दक्षिणी देशों में मनाए जाने वाले त्योहारों के बारे में जैसे कि क्रिसमस, न्यू ईयर एवं वालेंटाइन डे इत्यादि|

इसी तरह से जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं हमे और भी कई नयी-नयी चीज़ों के बारे मे मालूम पड़ता है, और हम उन चीज़ों को अपनी ज़िंदगी में उतारने का प्रयतन करते हैं.

सिख धर्म में कई चर्चित त्यौहार है जैसे कि गुरु पर्व, बैसाखी, लोहड़ी और उनके दस गुरु जी के जन्म दिवस पर जयंती|

आइये आज लोहड़ी के त्योहार के बारे मे विख्यात से जानते हैं, मेरे द्वारा अपडेट किए गए लोहड़ी पर निबंध को आप अपने विद्यालयो मे ठंड कि छूटियों के बाद और वर्ष के पहले प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं| तो चलिये आज का अपना लेख अब शुरू करते हैं.

जरुर पढ़े » पंजाबियों का पवित्र त्यौहार लोहड़ी

लोहड़ी पर निबंध हिंदी में – Lohri Essay in Hindi For Class 5

लोहड़ी पर निबंध को शुरू करने से पहले मै अपनी वैबसाइट के सभी पाठको से एक गुजारिस करना चाहता हूँ कि यदि मुझसे इस लेख में कुछ जरूरी बाते छुट जाती है तो आप कृपया कर मुझे कमेंट के माध्यम से बताना ना भूले, आपकी उस मदद के लिए मै आपको पहले ही धन्यवाद बोल रहा हूँ| मै आशा करता हूँ कि आप मेरी मदद ज़रूर करेंगे| 🙂

आप चाहे तो इस निबंध को भाषण के तौर पर भी अपने स्कूल में हो रहे प्रतियोगिता के वक़्त इस्तेमाल कर सकते हैं, और यदि आपको इस निबंध के अलावा लोहड़ी पर भाषण चाहिए तो आप कमेंट करके बता सकते हैं| मै जल्द ही आपके लिए एक लेख लोहड़ी पर स्पीच का भी तैयार करके अपडेट ज़रूर करूंगा.

तो चलिये दोस्तो अब चलते है लेख के उद्देश्य कि और जिसका उद्देश्य है आप तक लोहड़ी पर निबंध पहुचाना.

लोहड़ी पर निबंध – Essay on Lohri in Hindi For Class 3 To 8

मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व यानि 13 जनवरी (क्यूंकी मकर संक्रांति प्रति वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है) उत्तर भारत विशेषत : पंजाब में लोहड़ी का त्यौहार सीख धर्म के व्यक्तियों द्वारा बहुत धूम धाम से मनाया जाता है|

किसी न किसी नाम से मकर संक्रांति के दिन या उससे आस-पास भारत के विभिन्न प्रदेशों में कोई न कोई त्यौहार अवश्य ही मनाया जाता है|

(यदि आप भारत के बाहर से बैठ के मेरे इस लेख को पढ़ रहे हैं तो दोस्तो मै आपको बताना चाहता हूँ कि भारत मे कई ऐसे त्योहार है जिनकी कोई फिक्स दिन नहीं होता है, कहने का अर्थ है डेट फिक्स नहीं है जैसे कि दशहरा, दिवाली, होली आदि परंतु लोहड़ी के त्योहार का दिन फिक्स है)

मकर संक्रांति के दिन यानि 14 जनवरी को तमिल हिंदू पोंगल का त्यौहार मनाते है, वही बिहार और उत्तर-प्रदेश में मकर संक्रांति को तिल सकरात के नाम से दही, तिल से बनी मिठाई जिसको कि तिलकुट कहा जाता है और चिउड़ा को खा कर मनाया जाता है| इस प्रकार लगभग पूर्ण भारत में यह विविध रूपों में मनाया जाता है.

मकर संक्रांति की पूर्व संध्या को पंजाब, हरियाणा व पड़ोसी राज्यों में बड़ी धूम-धाम से लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है| पंजाबियों के लिए लोहड़ी खास महत्व रखती है.

लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही छोटे बच्चे लोहड़ी के गीत गाकर लोहड़ी हेतु लकड़ियां, मेवे, रेवडियां, मूंगफली इकट्ठा करने लग जाते हैं|

लोहड़ी की संध्या को उन जमा की गई लकड़ियों को एक जगह रख कर उनमे आग जलाई जाती है| सभी लोग अग्नि के चरों और चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं व आग में रेवड़ी, मूंगफली, खील, मक्की के दानों की आहुति देते हैं|

आग के चारो और बैठकर लोग आग सेकते हैं व रेवड़ी, खील, गज्जक, मक्का खाने का आनंद लेते हैं| लोहड़ी के त्योहार पर जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चा हुआ हो उन्हें विशेष तौर पर बधाई दी जाती है|

प्राय: घर में नव वधू या और बच्चे की पहली लोहड़ी बहुत विशेष होती है| लोहड़ी को पहले तिलोड़ी कहा जाता था| यह शब्द तिल तथा रोडी (गुड़ की रोड़ी) शब्दों के मेल से बना है, जो समय के साथ बदल कर लोहड़ी के रुप में प्रसिद्ध हो गया|

दोस्तो शायद आपको मालूम हो कि आज दुनिया में जीतने भी त्योहार मनाए जाते हैं उनका कोई ना कोई ऐतिहासिक संदर्भ: जरूर रेहता है, ठीक उसी प्रकार लोहड़ी का भी कुछ न कुछ ऐतिहासिक संदर्भ: जरूर रहा है, आइये अब जानते हैं लोहड़ी का ऐतिहासिक संदर्भ: –

सबकी पसंद » लोहड़ी पर कविता (हिंदी निबंध)

लोहड़ी का ऐतिहासिक संदर्भ – लोहड़ी पर निबंध

किसी समय में सुंदरी एवं मुंदरी नाम की दो अनाथ लड़कियां थी जिनको उनका चाचा विधिवत शादी (यानिकी पूरे रस्मों एवं रिवाजो के साथ) न करके एक राजा को भेंट (यानिकी बेचना) कर देना चाहता था|

उसी समय में दुल्ला भट्टी नाम का एक नामी डाकू हुआ करता था| उसने दोनों लड़कियों, सुंदरी एवं मुंदरी को जालिमों से छुड़ा कर उन की शादियां कीं|

इस मुसीबत की घड़ी में दुल्ला भट्टी ने लड़कियों की मदद की और लड़के वालों को मना कर एक जंगल में आग जला कर सुंदरी और मुंदरी का विवाह करवाया|

दुल्ले ने खुद ही उन दोनो का कन्यादान किया, कहते हैं दुल्ले ने शगुन के रूप में उनको शक्कर दी थी| जल्दी-जल्दी में शादी की धूमधाम का इंतजाम भी न हो सका तो दुल्ले ने उन लड़कियों की झोली में एक सेर शक्कर ड़ालकर ही उनको विदा कर दिया|

भावार्थ यह है कि ड़ाकू हो कर भी दुल्ला भट्टी ने निर्धन लड़कियों के लिए पिता की भूमिका निभाई|

लोहड़ी की एक कहानी तो यह थी वही दूसरी और यह भी कहा जाता है कि संत कबीर की पत्नी लोई की याद में यह पर्व मनाया जाता है, इसीलिए इसे लोई भी कहा जाता है| और इस प्रकार यह त्योहार पूरे उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है|

दोस्तो, यह था लोहड़ी पर निबंध, जिसमे आपको लोहड़ी किस तरह से मनाई जाती है साथ में लोहड़ी मनाने के पीछे की वजह भी मालूम हुई|

मै उम्मीद करता हूँ कि आपको यह लेख पढ़ कर अच्छा लगा होगा साथ ही में आप इस लेख को सोश्ल मीडिया कि मदद से अपने दोस्तों एवं भाई-बहनों के साथ शेयर भी अवश्य ही करेंगे|

इस लेख को अंत तक पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद, आपको यह लेख कैसा लगा हमे कमेंट के माध्यम से बताना मत भूलिएगा| त्यौहार शब्द का अर्थ ही होता है एक साथ मिल जुल के प्यार से खुशियाँ बाटना, तो हसते मुस्कुराते रहिए और सभी त्यौहार को मनाते रहिए.

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Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमे आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

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