Lohri

मेरा प्रिय त्यौहार लोहड़ी पर निबंध

मेरा प्रिय त्यौहार लोहड़ी पर निबंध हिंदी में
Written by Himanshu Grewal
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विद्यालय में पढ़ रहे सभी बच्चों, बड़ो, अध्यापकों के लिए मैंने पंजाबियों के प्रमुख त्यौहार लोहड़ी पर मैंने एक शानदार लोहड़ी पर निबंध लिखा है जिससे आप सभी को इस त्यौहार के बारे में अच्छे से पता चल सके।

प्रति वर्ष हम ना जाने कितने त्योहार मनाते हैं, कुछ तो ऐसे त्योहार होते हैं जो हमारी संस्कृति से जुड़े होते हैं वही कुछ त्योहार हम जानकारी प्राप्त करने के बाद मनाना शुरू करते हैं।

जानकारी प्राप्त होने का अर्थ है जैसे जब हम विद्यालय जाना आरंभ करते हैं तो बाल दिवस, शिक्षक दिवस, गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्र दिवस जैसे कुछ नए त्योहारों के बारे में एक विद्यार्थी को मालूम पड़ता है।

वही जब एक बालक और बड़ा होता है तब उसको और भी कई नए त्योहारों के बारे में मालूम पड़ता है, खास कर विश्व के दक्षिणी देशों में मनाए जाने वाले त्योहारों के बारे में जैसे कि क्रिसमस, न्यू ईयर, वेलेंटाइन डे इत्यादि।

इसी तरह से जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं हमे और भी कई नयी-नयी चीज़ों के बारे में मालूम पड़ता है, और हम उन चीज़ों को अपनी ज़िंदगी में उतारने का प्रयतन करते है।

सिख धर्म में कई चर्चित त्यौहार है जैसे कि गुरु पर्व, बैसाखी, लोहड़ी और उनके दस गुरु जी के जन्म दिवस पर जयंती।

आइए, आज लोहड़ी के त्योहार के बारे मे विख्यात से जानते हैं, मेरे द्वारा अपडेट किए गए लोहड़ी पर निबंध को आप अपने विद्यालयों में ठंड कि छुट्टियों के बाद और वर्ष के पहले प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

Lohri Essay in Hindi 10 Lines

लोहड़ी पर निबंध को शुरू करने से पहले मैं अपनी वेबसाइट के सभी पाठकों से एक गुजारिश करना चाहता हूँ कि यदि मुझसे इस लेख में कुछ जरूरी बातें छूट जाती है तो आप कृपया कर मुझे टिप्पणी के माध्यम से बताना ना भूले, आपकी एक मदद के लिए मैं आपको पहले ही धन्यवाद बोल रहा हूँ। मैं आशा करता हूँ कि आप मेरी मदद जरूर करेंगे।

आप चाहे तो इस Lohri Essay को Speech on Lohri के तौर पर भी अपने स्कूल में हो रहे प्रतियोगिता के वक्त इस्तेमाल कर सकते हैं, और यदि आपको इस लोहड़ी पर निबंध के अलावा लोहड़ी पर भाषण चाहिए तो आप टिप्पणी करके बता सकते हैं। मैं जल्द ही आपके लिए एक लेख लोहड़ी पर स्पीच का भी तैयार करके अपडेट जरूर करूंगा।

तो चलिये अब चलते है लेख के उद्देश्य कि और जिसका उद्देश्य है आप तक लोहड़ी पर निबंध पहुँचाना।


Essay on Lohri in Hindi

Essay on Lohri in Hindi

Essay on Lohri in Hindi

पंजाब के लोग लोहड़ी को हर साल 13 जनवरी को पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि त्योहार उस दिन मनाया जाता है जब दिन छोटे होने लगते हैं और रातें लंबी होने लगती हैं।

यह त्यौहार फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है और इस दिन लोग दुलारी बत्ती के सम्मान में खुशी में अलाव जलाते हैं, गाते हैं और नाचते हैं। हालाँकि, यह पंजाबियों का प्रमुख त्यौहार है, लेकिन भारत के कुछ उत्तरी राज्य भी इस त्यौहार को मनाते हैं जिसमें हिमाचल प्रदेश और हरियाणा शामिल हैं।

सिंधी समुदाय के लोग इस त्योहार को “लाल लोई” “Lal Loi” के रूप में मनाते हैं। दुनिया के विभिन्न कोनों में रहने वाले पंजाबी लोग भी लोहड़ी को उसी उत्साह के साथ मनाते हैं।

यहाँ लोहड़ी पर निबंध दिए गए हैं जो हमारे पाठकों को लोहड़ी उत्सव के विभिन्न पहलुओं को सिखाएंगे:

1. लोहड़ी मनाने के पीछे का कारण

पंजाब में लोहड़ी के त्यौहार को मनाने के बारे में लोगों की कई धारणाएँ हैं, जिनमें से कुछ शामिल हैं:

  • माना जाता है कि लोहड़ी शब्द “लोई” से लिया गया है, जो महान संत कबीर की पत्नी थी।
  • जबकि कुछ लोगों का मानना ​​है कि यह शब्द “लोह” से उत्पन्न हुआ है जो कि चपातियों को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण है।
  • राज्य के कुछ हिस्सों में लोगों का यह भी मानना ​​है कि त्योहार का नाम होलिका की बहन के नाम से उत्पन्न हुआ, जो आग से बच गई जबकि होलिका की मृत्यु हो गई।
  • इसके अलावा, कुछ लोगों का यह भी मानना ​​है कि लोहड़ी शब्द की उत्पत्ति तिलोरी शब्द से हुई है जो रोरी और तिल शब्द के मेल से आता है।

यह त्योहार देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है और लोग इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

आंध्र प्रदेश में इसे भोगी नाम से मनाया जाता है। इसी तरह असम, तमिलनाडु और केरल में यह त्योहार क्रमशः माघ बिहू, पोंगल और ताई पोंगल के नाम से मनाया जाता है। दूसरी ओर यूपी और बिहार के लोग इसे मकर संक्रांति का उत्सव कहते हैं।

2. पंजाब में लोहड़ी कैसे मनाई जाती है?

भारत के लोग लोहड़ी को कई अन्य त्योहारों की तरह खुशी के साथ मनाते हैं। यह उन त्योहारों में से एक है जो परिवार और दोस्तों को एक साथ इकट्ठा होने और कुछ गुणवत्ता समय बिताने का अवसर देता है।

लोहड़ी पर लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ जाते हैं और मिठाई बांटते हैं। यह त्यौहार किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे फसल का मौसम माना जाता है।

लोग अलाव जलाकर और नाचते-गाते और अलाव जलाते हुए त्योहार मनाते हैं। आग के चारों ओर गाते और नाचते समय, लोग पॉपकॉर्न, गुड़, रेवड़ी, चीनी-कैंडी और तिल फेंकते हैं।

इस दिन, शाम को हर घर में एक पूजा समारोह आयोजित किया जाता है। यह वह समय होता है जब लोग परिक्रमा करके और पूजा अर्चना करके सर्वशक्तिमान से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

रीति-रिवाजों के अनुसार इस दिन लोग सरसो के साग, गुड़, गजक, तिल, मूंगफली, फूलिया और प्रसाद के साथ मक्की की रोटी जैसे खाद्य पदार्थ खाते हैं। इसके अलावा लोग इस दिन नए कपड़े भी पहनते हैं और भांगड़ा करते हैं जो पंजाब का लोक नृत्य है।

किसानों के लिए, यह दिन एक नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।

नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए भी यह त्योहार बहुत महत्व रखता है। इस दिन नवविवाहित दुल्हनों को परिवार के सभी सदस्यों से उपहार मिलते हैं और वे सभी गहने पहनने वाले होते हैं जो दुल्हन आमतौर पर अपने विवाह के दिन पहनते हैं।

3. Lohri Celebration in Hindi

पहले लोग एक दूसरे को गजक गिफ्ट करके लोहड़ी मनाते थे, जबकि समकालीन दुनिया में अब धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है और लोग गजक के बजाय चॉकलेट और केक गिफ्ट करना पसंद करते हैं।

बढ़ते प्रदूषण एजेंटों के साथ पर्यावरण के लिए बढ़ते खतरे के साथ लोग अधिक जागरूक हो गए हैं और वे अलाव नहीं जलाना पसंद करते हैं। लोहड़ी पर आग जलाने के लिए लोग अधिक पेड़-पौधों को काटने से बचते हैं। इसके बजाय वे अधिक से अधिक पेड़ लगाकर लोहड़ी मनाते हैं ताकि वे लंबे समय में पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकें।

मैंने आपके लिए Lohri Festival Essay in Hindi Language में लिख दिया है। अब मैं आपके साथ लोहड़ी पर दूसरा निबंध साझा करने जा रहा हूँ।


लोहड़ी पर निबंध – Essay on Lohri in Hindi For Class 3 To 8
Lohri Festival Essay in Hindi

Lohri Festival Essay in Hindi

मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व यानि 13 जनवरी (क्योंकि मकर संक्रांति प्रति वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है) उत्तर भारत विशेषत: पंजाब में लोहड़ी का त्यौहार सीख धर्म के व्यक्तियों द्वारा बहुत धूम धाम से मनाया जाता है।

किसी न किसी नाम से मकर संक्रांति के दिन या उससे आस-पास भारत के विभिन्न प्रदेशों में कोई न कोई त्यौहार अवश्य ही मनाया जाता है।

(यदि आप भारत के बाहर से बैठ के मेरे इस लेख को पढ़ रहे हैं तो दोस्तो मैं आपको बताना चाहता हूँ कि भारत में कई ऐसे त्योहार है जिनकी कोई फिक्स दिन नहीं होता है, कहने का अर्थ है तिथि फिक्स नहीं है जैसे कि दशहरा, दिवाली, होली आदि परंतु लोहड़ी के त्योहार का दिन फिक्स है।)

मकर संक्रांति के दिन यानि 14 जनवरी को तमिल हिंदू पोंगल का त्यौहार मनाते है, वही बिहार और उत्तर-प्रदेश में मकर संक्रांति को तिल सकरात के नाम से दही, तिल से बनी मिठाई जिसको कि तिलकुट कहा जाता है और चिउड़ा को खाकर मनाया जाता है। इस प्रकार लगभग पूर्ण भारत में यह विविध रूपों में मनाया जाता है।

मकर संक्रांति की पूर्व संध्या को पंजाब, हरियाणा व पड़ोसी राज्यों में बड़ी धूम-धाम से लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है। पंजाबियों के लिए लोहड़ी खास महत्व रखती है।

लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही छोटे बच्चे लोहड़ी के गीत गाकर लोहड़ी हेतु लकड़ियां, मेवे, रेवडियां, मूंगफली इकट्ठा करने लग जाते हैं।

लोहड़ी की संध्या को उन जमा की गई लकड़ियों को एक जगह रख कर उनमें आग जलाई जाती है। सभी लोग अग्नि के चारों और चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं व आग में रेवड़ी, मूंगफली, खील, मक्की के दानों की आहुति देते हैं।

आग के चारों और बैठकर लोग आग सेकते हैं व रेवडी, खील, गज्जक, मक्का खाने का आनंद लेते हैं। लोहड़ी के त्योहार पर जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चा हुआ हो उन्हें विशेष तौर पर बधाई दी जाती है।

प्राय: घर में नववधू या और बच्चे की पहली लोहड़ी बहुत विशेष होती है। लोहड़ी को पहले तिलोड़ी कहा जाता था। यह शब्द तिल तथा रोडी (गुड़ की रोड़ी) शब्दों के मेल से बना है, जो समय के साथ बदल कर लोहड़ी के रुप में प्रसिद्ध हो गया।

शायद आपको मालूम हो की आज दुनिया में जीतने भी त्योहार मनाए जाते हैं उनका कोई ना कोई ऐतिहासिक संदर्भ: जरूर रहता है, ठीक उसी प्रकार लोहड़ी का भी कुछ न कुछ ऐतिहासिक संदर्भ: जरूर रहा है, आइए अब जानते हैं लोहड़ी का ऐतिहासिक संदर्भ:

लोहड़ी का ऐतिहासिक संदर्भ (लोहड़ी पर निबंध)

किसी समय में सुंदरी एवं मुंदरी नाम की दो अनाथ लड़कियां थी जिनको उनका चाचा विधिवत शादी (यानी कि पूरे रस्मों एवं रिवाजों के साथ) न करके एक राजा को भेंट (यानिकी बेचना) कर देना चाहता था।

उसी समय में दुल्ला भट्टी नाम का एक नामी डाकू हुआ करता था। उसने दोनों लड़कियों, सुंदरी एवं मुंदरी को जालिमों से छुड़ा कर उन की शादियां की।

इस मुसीबत की घड़ी में दुल्ला भट्टी ने लड़कियों की मदद की और लड़के वालों को मना कर एक जंगल में आग जला कर सुंदरी और मुंदरी का विवाह करवाया।

दूल्हे ने खुद ही उन दोनों का कन्यादान किया, कहते हैं दूल्हे ने शगुन के रूप में उनको शक्कर दी थी। जल्दी-जल्दी में शादी की धूमधाम का इंतजाम भी न हो सका तो दूल्हे ने उन लड़कियों की झोली में एक सेर शक्कर डालकर ही उनको विदा कर दिया।

भावार्थ यह है कि ड़ाकू हो कर भी दुल्ला भट्टी ने निर्धन लड़कियों के लिए पिता की भूमिका निभाई।

लोहड़ी की एक कहानी तो यह थी वही दूसरी और यह भी कहा जाता है कि संत कबीर की पत्नी लोई की याद में यह पर्व मनाया जाता है, इसीलिए इसे लोई भी कहा जाता है और इस प्रकार यह त्योहार पूरे उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है।

यह था लोहड़ी पर निबंध, जिसमे आपको लोहड़ी किस तरह से मनाई जाती है साथ में लोहड़ी मनाने के पीछे की वजह भी मालूम हुई।

मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको Speech on Lohri का लेख पढ़ कर अच्छा लगा होगा साथ ही में आप इस लेख को सोशल मीडिया की मदद से अपने दोस्तों एवं भाई-बहनों के साथ शेयर भी अवश्य ही करेंगे।

Essay on Lohri Festival के इस लेख को अंत तक पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद, आपको यह लेख कैसा लगा हमे कमेंट के माध्यम से बताना मत भूलिएगा।

त्यौहार शब्द का अर्थ ही होता है एक साथ मिल जुल के प्यार से खुशियाँ बाँटना, तो हंसते मुस्कुराते रहिए और सभी त्यौहार को मनाते रहिए।

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About the author

Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमें आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

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