माइक्रोसॉफ्ट और बिल गेट्स की सच्ची कहानी

माइक्रोसॉफ्ट पूरी दुनिया की सबसे बड़ी और जानी मानी कंपनी है जो मुख्यत: संगणक अभियान्त्रिकी के क्षेत्र मे काम करती है. Microsoft विश्व की सबसे बड़ी software company है. 100 से ज्यादा देशों में microsoft company की शाखा खुली हुई है जिसमे अधिकतम 114,000 से ज्यादा लोग काम करते है.

कंपनी का मुख्यालय अमेरिका में  रेडमण्ड, वॉशिंगटन मे स्थित है. माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना बिल गेट्स ने 4 अप्रैल 1975 के दिन करी थी. इस कंपनी का मुख्य उत्पादक विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम (Windows operating system) है. इसके अतिरिक्त कंपनी नाना प्रकार के सॉफ्टवेर भी बनाती है.

Information about Microsoft in hindi

  1. प्रकार : सार्वजनिक
  2. उद्मोग : कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल वितरण, कंप्यूटर हार्डवेयर, वीडियो गेम, आईटी परामर्श, ऑनलाइन,, विज्ञापन, खुदरा स्टोर, ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर
  3. स्थापना : 4 अप्रैल 1975, न्यू मेक्सिको, Albuquerque
  4. संस्थापक : बिल गेट्स, पॉल एलन
  5. मुख्यालय : माइक्रोसॉफ्ट रेडमंड कैंपस, वॉशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका
  6. प्रोडक्ट : विंडोज, ऑफिस, सर्वर्स, स्काइप, विसुअल स्टूडियो, डायनामिक्स, अजुरे, एक्सबॉक्स, सरफेस, मोबाइल, इत्यादि…
  7. कर्मचारी : 114,000 (जून 30, 2016)
  8. कुल इक्विटी : 86 बिलियन डॉलर (2017)
  9. वेबसाइट : microsoft.com

Information about Bill Gates in hindi

  1. पूरा नाम : बिल गेट्स (विल्लिम हेनरी गेट्स)
  2. बिल गेट्स का जन्म : 28 अक्टूबर 1955 (सीऐटल, वॉशिंगटन राज्य, संयुक्त राज्य अमेरिका)
  3. आवास : संयुक्त राज्य अमेरिका
  4. शिक्षा : हार्वर्ड विश्वविद्यालय (स्नातक नहीं हुए)
  5. व्यवसाय : माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सह अध्यक्ष
  6. पत्नी : मेलिण्डा गेट्स (1994–वर्तमान)
  7. बच्चे : तीन

पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए बिल गेट्स की जीवनी पर क्लिक करें.

माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का इतिहास

सन् 1975 में माइक्रोसॉफ्ट के प्रारंभ से ही बिलगेट्स इसकी उत्पात-नीति के प्रमुख रहे हैं. उनकी क्रय-विक्रय क्षमताओं और उत्पादों के ज्ञान ने कंपनी की उत्पादन-श्रंखला का विस्तार किया है.

बिल सदैव ही उस सीमा तक कार्य करने के लिए तैयार रहते थे, जिससे माइक्रोसॉफ्ट को गौरव प्राप्त हो.

वस्तुत: सन् 1998 के यूनाइटेड स्टेट्स बनाम माइक्रोसॉफ्ट केस में शरमन अधिनियम की अवहेलना करते हुए एकाधिकार प्राप्त करने के लिए छल करने और प्रतिस्पर्धा को रोकने का प्रयास करने के लिए उन पर दोषारोपण किया गया.

प्रतिस्पर्धा, आलोचना और कंपनी के प्रति साख विरोधी अधिनियमों का बहादुरी से सामना करते हुए उन्होंने आक्रामक रूप से माइक्रोसॉफ्ट का बचाव किया और उसकी उन्नत स्थिति का पोषण किया. इसके अलावा, वे एक कठोर मालिक भी थे.

बैठकों के दोरान वे अत्यंत आक्रामक समझे जाते थे, विशेष रूप से उन स्थितियों में, जब वे समझते थे की कंपनी के कुछ निर्णयों ने माइक्रोसॉफ्ट का भविष्य खतरे में डाल दिया है.

दूसरी ओर, अपने प्रबंधकों के साथ निश्छल व सीधी बातचीत की वे सराहना करते थे और अक्सर उन तकनीकी व्यवधानों को स्वयं दूर करने का प्रयास करते थे, जिनसे उनके प्रंबधक जूझ रहे होते थे.

बिल गेट्स ने माइक्रोसॉफ्ट में मुख्य रूप से व्यवस्थापक और प्रशासक की भूमिका का निर्वाह किया हैं. किंतु आरंभिक दिनों में उन्होंने एक सक्रीय सॉफ्टवेर डेवलपर के रूप में विशेष रूप से उत्पाद सम्बन्धी प्रोग्रामिंग भाषा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान भी दिया है.

15 जून, 2006 को बिल गेट्स ने यह घोषणा की कि वे माइक्रोसॉफ्ट में अपनी नियमित जिम्मेदारियो से मुक्त होकर लोकहित के कार्यों में अधिक समय देना चाहते हैं.

परिणामत: उन्होंने रे ओजी को नया मुख्य सॉफ्टवेर आर्किटेक्ट नियुक्त किया और स्वयं कंपनी के अध्यक्ष बने रहकर कंपनी की प्रमुख में योजनाओं में अपनी सलाह देते रहे. चलते-चलते उन्होंने कंपनी में रोबोटिक्स ग्रुप का निर्माण कर माइक्रोसॉफ्ट को एक उपहार दिया.

एकाधिपत्य का खेल

सन माइक्रोसिस्टम के अध्यक्ष स्कॉट मैकेनली और नेट्सकेप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिप क्लार्क से मिलकर सन् 1988 में बिल गेट्स ने एकाधिपत्य का एक खेल शुरू किया, जिससे उन्हें एक और गौरव-स्थान प्राप्त हुआ.

अपनी कार्य-कुशलता और उत्कृष्ट व्यापारिक अंतदृष्टि का उपयोग करते हुए बिल गेट्स ने जल्दी ही बोर्ड-वांक और पार्क प्लेस पर अपना नियंत्रण कर लिया. परिणाम यह हुआ की इस खेल में उन्हें प्रभुक्त हासिल हो गया.

वास्तव में, मैकेनली और क्लार्क ने यह आरोप लगाया कि बिल गेट्स ने अपनी योजनाओं को सफल बनाने के लिए बार-बार छल-युक्त कार्य किए और जब भी वे माइक्रोसॉफ्ट की सॉफ्टवेर विशिष्टताओं का उपयोग करते पाए गए तो उन्होंने इन्टरनेट एक्सप्लोलर की प्रतियों को खरीदने के लिए उन्हें बाध्य किया.

बैंकर की तरह कार्य करते हुए उन्होंने स्वयं ही ब्याज-रहित ऋण इस तर्क के साथ ले लिया की मैकेनली एव क्लार्क को कोई पैसा उस स्थिति में नही मिलना चाहिए, जब वे नि:शुल्क पार्किंग करते है; क्योंकि शासकीय नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

उन्होंने बैटिलशिप को भी विनियुक्त कर लिया, यघपि जिम क्लार्क ने ही उसका नामकरण किया था. अंत में बिल गेट्स ने क्लार्क को दिवालिया बना दिया.

परिणामत: बिल गेट्स के खिलाफ अविश्वास का मुकदमा दायर किया गया. उन्होंने न्यायालय में टाल-मटोल किया और कहा की उन्हें यह याद नहीं है की उनके पास कितने होटल हैं.

नतीजा यह हुआ कि आरंभिक दोर में फैसला माइक्रोसॉफ्ट के विरुद्ध हुआ. बिल गेट्स को दंडित किया गया और न्यायालय ने यह आदेश दिया कि बोर्ड-वार्क या पार्क प्लेस को बेचने पर उन्हें मर्विन गार्डेन्स पर अपना अधिकार छोड़ना होगा.

किंतु बाद में अपील किए जाने पर न्यायालय का यह आदेश उलट दिया गया.

ये थी माइक्रोसॉफ्ट और बिल गेट्स से जुड़ी कुछ ऐतिहासिक बाते. अगर आपको बिल गेट्स से जुड़ी और भी बाते जननी है तो आप फ्यूचर में हमारी साईट HimanshuGrewal.com पर विजिट जरुर करें.

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Himanshu Grewal

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6 thoughts on “माइक्रोसॉफ्ट और बिल गेट्स की सच्ची कहानी”

  1. Dear Sir

    Good Morning Mai +2 , 2015 UP board se pass hu , Bade course ke liye balence nahi hai & Bry -Air (Asia) pvt.ltd
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