बसंत पंचमी पर निबंध 2018 – जानिए क्यों मनाया जाता है बसंत पंचमी का यह त्यौहार!

बसंत पंचमी पर निबंध और इस त्यौहार से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी|

वसंत पंचमी हिन्दू त्योहारों में से एक है| इसे श्री पंचमी भी कहते है.

बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती है| यह पूजा बड़े हर्ष और उल्लास से भारत वर्ष में मनाई जाती है|

इस दिन औरते पिले वस्त्र धारण करती है यह त्यौहार माघ शुक्ल पंचमी को आता है| भारत में सभी मौसमों में सबका मनपसंद मौसम वसंत का मौसम है.

वसंत के मौसम में फुल का खिलना, खेतो में सरसो का सोने जैसा चमकना, जौ और गेहू की फसल का उगना, आम के पेड़ो पर बोर आजाना और रंग बिरंगी तितलियों का मंडराने लगना यह वसंत का मौसम बहुत ही सुन्दर मौसम है.

वसंत के मौसम का स्वागत करने के लिए माघ के महीने में पांचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमे विष्णु भगवन और भगवन कामदेव की पूजा होती है यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता है.

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बसंत पंचमी पर निबंध और बसंत पंचमी की कथा

बसंत पंचमी की कथा
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सृष्टि के प्रारंभिक काल में ब्रम्हा जी ने जीवो के साथ साथ मनुष्य योनि की रचना भी की|

अपनी इस रचना से ब्रह्मा जी संतुस्ट नहीं थे उन्हें लगता था की कुछ कमी रह गयी है जिसके कारण हर तरफ शांति छाई रहती है.

ब्रम्हा जी ने भगवान विष्णु जी से अनुमति लेकर अपने कमंडल से जल छिड़का और जलकण के पृथ्वी पर गिरते ही उसमे कम्पन होने लगी.

उसके बाद वृक्षों के बिच से एक अद्बुध प्राकट्य हुआ| यह प्राकट्य एक सुन्दर, मनोहर स्त्री का था जिसके एक हाथ में विणा थी तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था| अन्य दो हाथ और थे जिनमे पुस्तक व माला थी.

ब्रम्हा जी ने उस देवी से विणा बजाने को कहा जैसे ही उन देवी ने विणा की मधुर आवाज निकाली तभी सारे संसार को वाणी मिल गयी.

पवन की सरसराहट भी सुनने को मिली पक्षी चिचियाने लगे जिव जंतु बोलने लगे तब ब्रम्हां जी ने उन देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा|

सरस्वती जी को वीणावादिनी, भागीश्वरी, भगवती, शारदा आदि कई नामो से उन्हें पुकारा जाने लगा|

माँ सरस्वती विद्या की देवी है| संगीत की देवी होने के कारण इन्हे संगीत की देवी भी कहा जाता है.

वसंत पंचमी के दिन को माँ सरस्वती के जन्मोस्तव के रूप में मनाते है| ऋग्वेद में माँ भगवती सरस्वती देवी जी का वर्णन करते हुए कहा गया है| देवी भगवत पुस्तक के अनुसार माँ सरस्वती भगवन ब्रह्मा जी की पुत्री है.

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। 

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इसका अर्थ है की ये परम चेतना है माँ सरस्वती हमारी बुद्धि प्रज्ञा और मनोवृतियों की सरंक्षिका है| हममे जो आचार और गुण, मेधा है उनका आधार माँ सरस्वती ही है| माँ सरस्वती की समृद्धि और वैभव अद्बुध है|

पुराणों के अनुसार भगवान कृष्ण ने माँ सरस्वती को एक वरदान दिया था की वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी आराधना की जायेगी|

यूँ ही भारत के कई हिस्सों में माँ सरस्वती की पूजा होने लगी| पतंग उड़ाने का इस दिन रिवाज हजारो वर्ष पहले चीन में शुरू हुआ था फिर जापान के रास्ते होता हुआ यह भारत आया| पतंग तब से इस त्यौहार पर उड़ाई जाती है.

बसंत पंचमी का महत्व (वसंत ऋतु का महत्व)

बसंत पंचमी के आते ही प्रकति और अद्बुध लगने लगती है मानो चारो और खुशहाली सी छा गयी हो पशु पक्षी उल्ल्हास से भर जाते है.

एक नई उमंग के साथ सूर्योदय होता है और नई चेतना को प्रदान करके अगले दिन फिर इसी प्रकार आने की आशा देकर चला जाता है.

वसंत पंचमी का महीना माघ का महीना होता है यह माघ का पूरा महीना उत्साह का महीना होता है.

प्राचीन काल से वसंत पंचमी को माँ सरस्वती का जन्मदिन के नाम से जाना जाता है जो लोग शिक्षाविद भारत से प्रेम करते है वो लोग इस दिन माँ सरस्वती की आराधना करते है.

कलाकारों के लिए तो बसंत पंचमी पर निबंध का बहुत अधिक महत्व है| कवि, लेखक, गायक इस दिन जरूर माँ सरस्वती की आराधना करते है| इसके साथ ही यह दिन हमे अतीत की कुछ प्रेरक घटनाये भी याद दिलाता है.

बसंत पंचमी के दिन ही श्री राम चंद्र जी दक्षिण से होते हुए शबरी की कुटिया जा पहुंचे थे जहा उन्होंने शबरी के हाथो से बेर खाये थे| शबरी ने एक एक बेर चखकर की यह बेर मीठा है या नहीं तब श्री राम जी को बेर खिलाए थे.

उस क्षेत्र के वनवासी आज भी उस जगह को पूजते है जहा श्री राम चंद्र जी जाकर बैठे थे| वहा आज भी माता शबरी का मंदिर है यह घटना वसंत पंचमी की ही है| वसंत पंचमी की महत्वता का अपना ही अनोखा रूप है.

Essay on Basant Panchami in Hindi

बसंत पंचमी का दिन हमे पृथ्वी राज चौहान की याद भी दिलाता है| उन्होंने मोह्हमद गोरी को सोलह बार हराया था और हर बार अपनी उदारता के कारण मोह्हमद गोरी को ज़िंदा छोड़ दिया.

परन्तु सत्रहवीं बार मोह्हमद गोरी ने पृथ्वी राज चौहान को हरा दिया और उन्हें अफगानिस्तान लेजाकर उनकी आंखे फोड़ दी.

मोह्हमद गोरी ने पृथ्वी राज चौहान को मृत्यु दण्ड देने से पहले उनके शब्दभेदी बाण का कमाल देखना चाहा|

पृथ्वी राज चौहान ने अपने साथी चंदरबाई के द्वारा दिए सन्देश और अनुमान लगाकर तीर इस प्रकार मारा की वो तीर सीधा मोह्हमद गोरी के सीने में जा धसा और इसके बाद पृथ्वी राज चौहान और मोह्हमद गोरी ने भी एक दूसरे को छुरा भोंककर ख़तम कर दिया.

बसंत पंचमी पर भाषण और बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है

बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है

बसंत पंचमी के दिन का लाहौर के निवासी वीर हकीकत का भी गहरा सम्बन्ध है.

एक दिन जब मुल्ला जी किसी काम की वजह से पाठशाला से जल्दी चले गए थे तब सब बच्चे खूब मस्ती कर रहे थे परन्तु वह पढ़ाई कर रहा है.

मुस्लिम बच्चे उसे छेड रहे थे तो वीर हकीकत ने दुर्गा माँ की कसम देकर उन बच्चो से कहा की मुझे परेशान मत करो| तब उन बच्चो ने दुर्गा माँ का मजाक उडाया और कहा की अगर तुम्हारी बीबी फातिमा का कोई इसी तरह मजाक उड़ाए तो तुम्हे कैसा लगेगा?

उन मुस्लिम बच्चों ने हकीकत की शिकायद मुल्ला जी से की और यह मामला काजी तक पहुंच गया और सजा के रूप में हकीकत को मृत्यु दण्ड मिला और उसकी मासूम शक्ल को देखकर कसाई भी उसका सर काटने से रुक गया.

तब हकीकत ने कहा की में बच्चा होकर अपने धर्म से नहीं हट रहा और तुम बड़े होकर भी अपने धर्म से हट रहे हो| अपने धर्म का पालन करो तभी कसाई ने बिना समय व्यर्थ किये हकीकत का सर काट दिया और हकीकत का शरीर उड़कर अम्बर में चला गया और वही आकाश मार्ग से सीधा स्वर्ग चला गया.

पाकिस्तान एक मुस्लिम देश है फिर भी हकीकत के आकाशगामी शीश की याद में वहा पतंग उड़ाई जाती है और आज भी वहा पतंग उड़ाई जाती है.

वसंत पंचमी के दिन ही कलम के सिपाही हिंदी साहित्य की अमर विभूति महाकवि “सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला” जी का जन्म दिन है.

त्रिपाठी जी ने कई साहित्य लिखे है वे मन के अच्छे और दिल से बहुत नरम थे वो हमेशा गरीबो की मदत करते थे और निर्धनों को धन भी देते थे इसलिए लोग उन्हें “महाप्राण” भी कहते है.

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Himanshu Grewal

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