नवरात्रि का महत्व, पूजन विधि और नवरात्र के नौ देवियों की रहस्मय जानकारी

नमस्ते प्यारे भक्तो आपका HimanshuGrewal.com पर हार्दिक स्वागत है. आज में आपको चैत्र नवरात्रि का महत्व, नवरात्रि पूजन सामग्री, नवरात्रि के नियम और टोटके के बारे में बताऊंगा.

नवरात्रि का त्यौहार हिन्दुओ का एक प्रमुख पर्व है. जिसको पूरा भारत देश बहुत की गर्व से मनाया जाता हैं. नवरात्रि का जो शब्द है यह एक संस्कृत शब्द हैं, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’.

इन 9 रातों और 10 दिनों के दिन, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा होती है (नवरात्रि पूजा). नवरात्री का दसवाँ दिन दशहरा के नाम से बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध हैं.

Navratri Festival वर्ष में 4 बार आता है. पौष, चैत्र, आषाढ, अश्विन प्रतिपदा से इसको नवमी तक मनाया जाता हैं.

नवरात्री के नौ रातों में तीन देवियों के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है (महालक्ष्मी, महासरस्वती या सरस्वती और दुर्गा) जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं.

माँ ‘दुर्गा’ का मतलब होता है “जीवन के दुख कॊ हटानेवाली“. नवरात्रि एक महत्वपूर्ण और प्रमुख त्योहार है जिसको पूरे भारत देश में महान उत्साह के साथ और खुशियों के साथ मनाया जाता है.

नवरात्रि का महत्व – नवरात्रि के नौ देवियाँ के नाम:-

  1. शैलपुत्री – इसका जो अर्थ है वो है – पहाड़ो की पुत्री
  2. ब्रह्मचारिणी – इसका अर्थ है – ब्रह्मचारीणी
  3. चंद्रघंटा – इसका जो अर्थ है – चाँद की तरह चमकने वाली
  4. कूष्माण्डा – इसका अर्थ है – पूरा जगत उनके पैर में
  5. स्कंदमाता – इसका अर्थ है – कार्तिक स्वामी की माता
  6. कात्यायनी – इसका जो अर्थ हैं वो – कात्यायन आश्रम में जन्मि
  7. कालरात्रि – इसका जो अर्थ है वो है – काल का नाश करने वली
  8. महागौरी – इसका अर्थ है – सफेद रंग वाली मां
  9. सिद्धिदात्री – इसका अर्थ है – सर्व सिद्धि देने वाली

Navratri in hindi – नवरात्र पर निबंध

नराते शक्ति की शारदीय उपासना का पर्व है, इस पर्व को नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है.

श्रीरामचंद्रजी ने नवरात्रि पूजा की शुरुआत समुंद्र तट पर की थी और ठीक उसके बाद उन्होंने नवरात्र के दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और उन्होंने विजय भी प्राप्त की.

तब से अभी तक असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत के पर्व के रूप में दशहरा मनाया जाने लगा. नवरात्र के नौ दिनों में आदिशक्ति के हर रूप की अलग-अलग पूजा की जाती हैं.

माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है. सिद्धिदात्री माता सभी प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली हैं. इनका जो वाहन है वो सिंह है और माता कमल पुष्प पर ही आसीन होती हैं. सिद्धिदात्री माता की पूजा नवरात्रि के नौवें दिन की जाती है.

नवरात्रि का महत्व और त्यौहार हिन्दुस्तान (भारत) में अलग-अलग भागों में अलग ढंग से मनाया जाता है. भारत के गुजरात प्रदेश में नवरात्र को बड़े पैमाने में मनाया जाता है.

गुजरात में नवरात्री समारोह डंडिया और गरबा के रूप में मनाया जाता है. यह समारोह पूरी रात भर चलता रहता है. गुजरात में लोग अपनी भक्ति प्रदर्शन के लिए देवी के सम्मान में सबसे पहले गरबा, ‘आरती’ से पहले किया जाता है और डंडिया समारोह उसके बाद.

नवरात्रि का महत्व और पूजा विधि

नवरात्री फेस्टिवल देवी अंबा (विद्युत) का प्रतिनिधित्व है. इस त्यौहार को वसंत की शुरुआत और शरद ऋतु की शुरुआत, जलवायु और सूरज के प्रभावों का प्रमुख संगम माना जाता है.

इन दो समय में माँ दुर्गा की पूजा करने पर काफी लाभ होता है और इस दिन को पवित्र अवसर भी माना जाता है. नवरात्री के त्यौहार की तिथियाँ चंद्र कैलेंडर के अनुसार निर्धारित होती हैं.

नवरात्री पर्व, माता दुर्गा की भक्ति और परमात्मा की शक्ति की पूजा करने के लिए सबसे ज्यादा शुभ और अचूक अवधि माना जाता है. नवरात्र की पूजा जो है वो वैदिक युग से पहले, प्रागैतिहासिक काल से है.

नवरात्रि के पहले तीन दिन किस देवी की पूजा करे?

काफी लोगो को यह नही पता होता की नवरात्रि के पहले तीन दिन क्या करे? तो इस दिन देवी दुर्गा जी की पूजा करनी चाहिए. यह पूजा माता दुर्गा की उर्जा और शक्ति के लिए की जाती है.

नवरात्री के पहले दिन बालिकाओ की पूजा करना चाहिए इसको करना शुभ माना जाता है. नवरात्री के दूसरे दिन युवती की पूजा की जाती है और नवरात्री के तीसरे दिन जो महिला परिपक्वता के चरण में पहुंच गयी है उसकी पूजा करनी चाहिए.

इन सब पूजा को करने से देवी दुर्गा के विनाशकारी पहलु सब बुराई के प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त कर लेती है.

नवरात्रि के चौथा से छठे दिन यह काम करने से आपको धन की प्राप्ति होगी

जब कोई भी व्यक्ति अपने क्रोध, वासना, अहंकार और अन्य पशु प्रवृत्ति की बुराई प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त कर लेता है तो वह व्यक्ति शून्य का अनुभव करता है. और यह शून्य आध्यात्मिक धन से भर जाता है.

अगर आपको धन और समृद्धि प्राप्त करनी है तो आपको देवी लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. नवरात्रे के चौथे, पांचवें और छठे दिन माता लक्ष्मी – समृद्धि और शांति की देवी की पूजा करने से धन की  समर्पित होती है.

नवरात्री के पाचवें दिन माता देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. सभी किताबो और अन्य साहित्य सामग्रीयो को एक साथ रख दिया जाता है और एक दिया देवी का आशीर्वाद लेने के लिए, देवता के सामने जलाया जाता है.

नवरात्रि का सातवां और आठवां दिन

नवरात्र के सातवें दिन कला और ज्ञान की देवी, सरस्वती की पूजा की जाती है. नवरात्री के आठवे दिन ‘यज्ञ’ किया जाता है. देवी दुर्गा को सम्मान और उनको विदा करने के लिए बलिदान देते हैं.

नवरात्रि का नौवां दिन

नवरात्रि का नौ दिन नवरात्र समारोह का आखिरी और अंतिम दिन है. यह दिन महानवमी के नाम से जाना जाता है.

नौवा दिन पर कन्या पूजन होता है, कुछ लोग आठवें दिन भी कन्या पूजन कर देते है. इस दिन उन नौ लड़कियों की पूजा होती है जो अभी तक यौवन की अवस्था तक नहीं आई है.

इन सभी नौ लड़कियों को देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक ही माना जाता है. कन्याओ (लड़कियों) का सम्मान और स्वागत करने के लिए कन्याओ के पैर भी धोए जाते है. जब पूजा खत्म हो जाती है तो आखिरी में उनको नए कपड़ें पेश किए जाते हैं.

प्यारे भक्तो यह था नवरात्रि का महत्व और उनसे जुड़ी कुछ कथाएं. अगर आपको नवरात्री के बारे में कुछ पता है जिसको आप हमारे साथ शेयर करना चाहते हो तो आप कमेंट के माध्यम से हमारे साथ शेयर कर सकते हो.

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One Response

  1. Vipul September 13, 2017

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