गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी का महत्व, निबंध, पूजा और व्रत विधि

गणेश चतुर्थी का महत्व और निबंध
Written by Himanshu Grewal

आज के इस लेख में मै आपको गणेश चतुर्थी का महत्व बताने जा रहा हूँ| यदी आप गणेश चतुर्थी मनाते हैं तो इस लेख को अंत तक ज़रूर पढ़े.

यह बात हम सभी जानते हैं कि गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है, यह त्योहार भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है.

पुराणों के अनुसार इसी दिन गणेश जी का जन्म हुआ था, गणेश चतुर्थी पर हिन्दू भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है| कई प्रमुख जगहों पर भगवान गणेश की बड़ी प्रतिमा स्थापित की जाती है.

इस प्रतिमा का नो दिन तक पूजन किया जाता है, बड़ी संख्या में आस पास के लोग दर्शन करने पहुँचते है। नो दिन बाद गाने बाजे से श्री गणेश प्रतिमा को किसी तालाब इत्यादि जल में विसर्जित किया जाता है.

महत्व » गणेश चतुर्थी पर निबंध और महत्व

गणेश चतुर्थी का महत्व – गणपति शब्द का अर्थ

शिवपुराण में भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को मंगलमूर्ति गणेश की अवतरण-तिथि बताया गया है जबकि गणेशपुराण के मत से यह गणेशावतार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुआ था.

गण + पति = गणपति। संस्कृतकोशानुसार ‘गण’ अर्थात पवित्रक। ‘पति’ अर्थात स्वामी, ‘गणपति’ अर्थात पवित्रकोंके स्वामी|

शायद आपने कभी अपनी दादी माँ से कहानी सुनी होगी, या फिर कही पढ़ा भी होगा किस तरह से गणेश जी का सर एक हाथी के सर की तरह क्यों है ?

यदि आपको जानकारी है तो अच्छी बात है और यदि जानकारी नहीं है तो आप नीचे दी गई गणेश चतुर्थी की कहानी को ध्यान से ज़रूर पढ़िए.

Lord Ganesha Stories For Kids in Hindi – गणेश चतुर्थी पर निबंध हिंदी में

Lord Ganesha Stories For Kids in Hindi

शिवपुराण के अन्तर्गत रुद्र संहिता के चतुर्थ (कुमार) खण्ड में यह वर्णन है कि माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वारपाल बना दिया|

शिवजी ने जब प्रवेश करना चाहा तब बालक ने उन्हें रोक दिया। इस पर शिवगणों ने बालक से भयंकर युद्ध किया परंतु संग्राम में उसे कोई पराजित नहीं कर सका। अन्ततोगत्वा भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सर काट दिया.

इससे भगवती शिवा क्रुद्ध हो उठीं और उन्होंने प्रलय करने की ठान ली, भयभीत देवताओं ने देवर्षिनारद की सलाह पर जगदम्बा की स्तुति करके उन्हें शांत किया.

शिवजी के निर्देश पर विष्णुजी उत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव (हाथी) का सिर काटकर ले आए।

मृत्युंजय रुद्र ने गज के उस मस्तक को बालक के धड पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया। माता पार्वती ने हर्षातिरेक से उस गजमुखबालक को अपने हृदय से लगा लिया और देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया.

ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस बालक को सर्वाध्यक्ष घोषित करके अग्रपूज्य होने का वरदान दिया, भगवान शंकर ने बालक से कहा-

गिरिजानन्दन! विघ्न नाश करने में तेरा नाम सर्वोपरि होगा। तू सबका पूज्य बनकर मेरे समस्त गणों का अध्यक्ष हो जा| गणेश्वर! तू भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा के उदित होने पर उत्पन्न हुआ है|

आइये जानते हैं कि गणेश चतुर्थी का व्रत रखने से एक इंसान को क्या लाभ मिलता है|

इस तिथि में व्रत करने वाले के सभी विघ्नों का नाश हो जाएगा और उसे सब सिद्धियां प्राप्त होंगी। कृष्णपक्ष की चतुर्थी की रात्रि में चंद्रोदय के समय गणेश तुम्हारी पूजा करने के पश्चात् व्रती चंद्रमा को अ‌र्घ्य देकर ब्राह्मण को मिष्ठान खिलाए.

तदोपरांत स्वयं भी मीठा भोजन करे। वर्षपर्यन्त श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है|

ठीक इसी से मिलती जुलती एक और गणेश चतुर्थी की कथा है, जो आप यदि चाहे तो पढ़ सकते हैं.

जरुर पढ़े » गणेश चतुर्थी पूजा विधि, कथा और ऐसे करें श्री गणेश जी को प्रसन्न

गणेश चतुर्थी व्रत कथा इन हिंदी – गणेश चतुर्थी का महत्व

एक बार महादेव जी स्नान करने के लिए भोगावती गए, उनके जाने के पश्चात पार्वती ने अपने तन के मैल से एक पुतला बनाया और उसका नाम ‘गणेश’ रखा|

पार्वती ने उससे कहा – हे पुत्र! तुम एक मुगदल लेकर द्वार पर बैठ जाओ। मैं भीतर जाकर स्नान कर रही हूँ| जब तक मैं स्नान न कर लूं, तब तक तुम किसी भी पुरुष को भीतर मत आने देना|

भोगावती के स्नान करने के बाद जब भगवान शिवजी आए तो गणेशजी ने उन्हें द्वार पर रोक लिया। इसे शिवजी ने अपना अपमान समझा और क्रोधित होकर उनका सिर धड़ से अलग करके भीतर चले गए|

पार्वती ने उन्हें नाराज देखकर समझा कि भोजन में विलंब होने के कारण महादेवजी नाराज हैं। इसलिए उन्होंने तत्काल दो थालियों में भोजन परोसकर शिवजी को बुलाया.

तभी दूसरा थाल देखकर तनिक आश्चर्यचकित होकर शिवजी ने पूछा-यह दूसरा थाल किसके लिए हैं ? पार्वती जी बोलीं- पुत्र गणेश के लिए हैं, जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा है.

यह सुनकर शिवजी और अधिक आश्चर्यचकित हुए, तुम्हारा पुत्र पहरा दे रहा है ?

हाँ नाथ! क्या आपने उसे देखा नहीं ?

देखा तो था, किन्तु मैंने तो अपने रोके जाने पर उसे कोई उद्दण्ड बालक समझकर उसका सिर काट दिया।

यह सुनकर पार्वती जी बहुत दुःखी हुईं, वे विलाप करने लगीं| तब पार्वती जी को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर बालक के धड़ से जोड़ दिया.

पार्वती जी इस प्रकार पुत्र गणेश को पाकर बहुत प्रसन्न हुई। उन्होंने पति तथा पुत्र को प्रीतिपूर्वक भोजन कराकर बाद में स्वयं भोजन किया|

यह घटना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुई थी। इसीलिए यह तिथि पुण्य पर्व के रूप में मनाई जाती है|

यदि आप गणेश चतुर्थी के दिन वर्त रखे तो आपको ये लाभ मिल सकते हैं-

भाद्रपद-कृष्ण-चतुर्थी से प्रारंभ करके प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चंद्रोदयव्यापिनी चतुर्थी के दिन व्रत करने पर विघ्नेश्वरगणेश प्रसन्न होकर समस्त विघ्न और संकट दूर कर देते हैं|

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गणेश चतुर्थी को चन्द्र दर्शन दोष से बचाव – गणेश चतुर्थी का महत्व और निबंध

गणेश चतुर्थी को चन्द्र दर्शन दोष से बचाव

प्रत्येक शुक्ल पक्ष चतुर्थी को चन्द्रदर्शन के पश्चात्‌ व्रती को आहार लेने का निर्देश है, इसके पूर्व नहीं। किंतु भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रात्रि में चन्द्र-दर्शन (चन्द्रमा देखने को) निषिद्ध किया गया है|

जो व्यक्ति इस रात्रि को चन्द्रमा को देखते हैं उन्हें झूठा-कलंक प्राप्त होता है, ऐसा शास्त्रों का निर्देश है और यह अनुभूत भी है|

इस गणेश चतुर्थी को चन्द्र-दर्शन करने वाले व्यक्तियों को उक्त परिणाम अनुभूत हुए, इसमें संशय नहीं है। यदि जाने-अनजाने में चन्द्रमा दिख भी जाए तो निम्न मंत्र का पाठ अवश्य कर लेना चाहिए.

सिहः प्रसेनम्‌ अवधीत्‌, सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्वमन्तकः॥’

भक्तों, आशा है अब आपको गणेश चतुर्थी का महत्व समझ में आया गया होगा और यदि आप अब तक गणेश चतुर्थी के दिन यदि व्रत नहीं करते थे तो कोई बात नहीं| लेकिन अब करना शुरू ज़रूर करेंगे क्यूंकि आज के समय में हर इंसान अपनी ज़िन्दगी में खुशियाँ चाहता है.

आपको यह लेख कैसा लगा कमेंट कर के बताना मत भूलियेगा, और हाँ दोस्तों आप चाहो तो इस लेख को अपने सभी मित्रों और रिश्तेदारों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर ज़रूर करे.

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Himanshu Grewal

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