Chanakya

Story of Chanakya | कौन थे आचार्य चाणक्य?

Chanakya Biography in Hindi
Written by Himanshu Grewal
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Chanakya Biography in Hindi | आचार्य चाणक्य का जीवन परिचय

कौटिल्य या चाणक्य अथवा विष्णुगुप्त सम्पूर्ण में एक महान राजनीतिक और मौर्य सम्राट सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री के रूप में प्रसिद्ध है। उनका व्यक्तिवाचक नाम ‘विष्णुगुप्त; स्थानीय नाम ‘चाणक्य; (चाणक्य वासी) और गोत्र नाम (कौटिल्य से) था। वे चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री थे।

चाणक्य का नाम संभवतः उनके गोत्र के नाम ‘चणक; पिता के नाम ‘चणक’ या स्थान का नाम ‘चणक’ का परिवर्तित रूप होगा। चाणक्य नाम से प्रसिद्ध एक नीतिग्रंथ चाणक्य नीति भी प्रचलित है। तक्षशिला के प्रसिद्ध महान अर्थशास्त्री आचार्य चाणक्य के कारण भी है, जो वहाँ प्राध्यापक थे और जिन्होंने चंद्रगुप्त के साथ मिलकर मौर्य साम्राज्य की नींव डाली।

‘मुद्राराक्षस’ में कहा गया है कि राजा नंद ने भरे दरबार में चाणक्य को उनके उस पद से हटा दिया, जो उन्हें दरबार में दिया गया था। इस पर चाणक्य ने शपथ ली की वो उसके परिवार तथा वंश को निर्मूल करके नंद से बदला लेंगे। ‘बृहत्कथा कोश’ के अनुसार, चाणक्य की पत्नी का नाम यशोमती था।

इसे पढ़ें: आचार्य चाणक्य का जन्म कब हुआ था?

About Chanakya Biography in Hindi

आचार्य चाणक्य की शिक्षा तथा जन्म | चाणक्य का जन्म: माना जाता है कि चाणक्य ने ईसा से 370 वर्ष पूर्व ऋषि चणक के पुत्र के रूप में जन्म लिया था। वही उनके आरंभिक काल के गुरु थे। कुछ इतिहासकार मानते है कि चणक केवल उनके गुरु थे। चणक के ही शिष्य होने के नाते उनका नाम ‘चाणक्य’ पड़ा। उस समय का कोई प्रामाणिक इतिहास उपलब्ध नहीं है।

इतिहासकारों के प्राप्त सूचनाओ के आधार पर अपनी-अपनी धारणाए बनाई। परन्तु यह सर्वसम्मत है कि चाणक्य की आरंभिक शिक्षा गुरु चणक द्वारा ही दी गई।

संस्कृत ज्ञान तथा देव-पुराण आदि धार्मिक ग्रंथो का अध्ययन चाणक्य ने उन्हीं के निर्देशन में किया। चाणक्य मेधावी छात्र थे। गुरु उनकी शिक्षा ग्रहण करने की तीव्र शमता से अत्यंत प्रसन्न थे। तत्कालीन समय में सभी सूचना व विधा धर्म-ग्रंथो के माध्यम से ही प्राप्त होती थी। अत: धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन शिक्षा प्राप्त करने का एकमात्र साधन था। Chanakya ने किशोरावस्था में ही उन ग्रंथो का सारा ज्ञान ग्रहण कर लिया था।

चाणक्य नीति जीवन में सफल बनना है तो यह बातें याद रखो

चाणक्य नीति में उनके द्वारा सैकड़ों वर्ष पूर्व लिखी गई बातें आज भी असल जिंदगी में लोगों के काम आती है! जितना कि पहले आती थी। सच्चाई जो मनुष्य के चरित्र के निर्माण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं उनके द्वारा मनुष्य के आचरण के विषय पर कहीं गई कुछ बेहद महत्वपूर्ण बातों को।

  • कांटों और दुष्टों से बचने के दो उपाय है।
  1. या तो आप अपने पैर में जूते पहन लो।
  2. या फिर उन दुष्टों को इतना शर्मासार करो कि अगली बार आप से नजरें मिलने में भी शर्माएं।
  • जितना हो सके दूसरों की गलतियों को देखकर उनसे सीखें। यदि आप उन गलती से बिना सीखें खुद पर प्रयोग करते हैं, तो इससे आपकी आयु घटेगी।
  • चाणक्य के अनुसार अपने सच्चे मित्र और कपटी मित्र के बीच के अंतर को समय पर पता कर लेना बेहद जरूरी है। अन्यथा कपटी मित्र आगे आपको मुसीबत में डाल सकता है।
  • जो बीत गया सो बीत गया। कोई गलती करती है तो उसे भूलकर आगे बढ़ो। जो आज है उसका इस्तेमाल करो और आज में जीकर अपने भविष्य को संवारने की कोशिश करो।
  • कोई सांप जहरीला नहीं है। तब भी उसे फुंफकारना छोड़ना नहीं चाहिए। इसी प्रकार एक कमजोर व्यक्ति को अपनी कमजोरी का प्रदर्शन लोगों के सामने नहीं करना चाहिए।
  • एक व्यक्ति जिसे सभी धर्म शास्त्रों का ज्ञान है, परंतु उसे खुद की आत्मा के विषय पर कोई ज्ञान नहीं है तो यह उसी चमचे के समान है जिसने अनेक पकवानों को हिलाया परंतु किसी का स्वाद नहीं लिया।

चाणक्य की प्रेरक कहानी

बात उस समय की है जब मगध के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में कुछ खास मेहमान उनसे मिलने आए। उनसे मिलने के बाद मेहमानों ने चंद्रगुप्त मौर्य से आचार्य चाणक्य से मिलने की इच्छा जाहिर की! अब क्योंकि रात्रि का समय हो चुका था तो चंद्रगुप्त मौर्य ने कहा “अभी संध्या का समय हो रहा है आप ऐसा करें उनसे कल मिल लीजिए” लेकिन मेहमानों द्वारा किए गए विशेष आग्रह को देखते हुए उन्होंने मेहमानों को चाणक्य से मिलने की इजाजत दे दी।

जब आगंतुक चाणक्य के कमरे के निकट पहुंचे तो रात्रि का समय होने की वजह से आचार्य चाणक्य दीपक प्रज्वलित कर कुछ राजकीय कार्यों में लगे हुए थे। सभी मेहमान उनके कमरे में पहुंचे तो उन्होंने आचार्य चाणक्य को प्रणाम करते हुए कहा कि हम आपसे एक व्यक्तिगत परामर्श लेना चाहते हैं। अपनी सहमति जताते हुए आचार्य चाणक्य ने उन्हें कहा कि बिल्कुल आप थोड़ी देर बैठ जाएं और कुछ समय बाद राजकीय कार्यों को पूर्ण करने के बाद चाणक्य ने जो दीपक जलाया हुआ था उसे बुझाते हुए एक दूसरे दीए में तेल डालकर उसको जलाया।

पास में बैठे आगंतुक यह सब देख ही रहे थे और इससे पहले कि वे चाणक्य से किसी विषय पर व्यक्तिगत चर्चा करें तभी एक जिज्ञासु व्यक्ति ने उठकर आचार्य चाणक्य से पूछ ही लिया।

क्षमा चाहता हूं आचार्य, परंतु मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूं कि आपने अभी एक दिया जलाया था उसे बुझा कर आपने दूसरा दिया क्यों जलाया? जबकि पहले वाले दीपक में तेल अभी शेष था।

यह सुनते ही आचार्य ने विनम्रता पूर्वक कहा। उस समय मैं राजनीतिक कार्यों मैं व्यस्त था इसीलिए जिस दीपक को मैंने उन कार्यों को पूर्ण करने के लिए प्रज्ज्वलित किया था उस में डाला गया तेल राजकोष के धन से लिया हुआ था। लेकिन क्योंकि आप मुझसे व्यक्तिगत चर्चा करने आए है तो इसलिए यह दीपक जो अभी जल रहा है इसमें डाला गया तेल मेरे कमाए हुए धन का है। आचार्य ने कहा कि मैं कभी भी अपने निजी कार्यों के लिए राजकोष के धन का प्रयोग नहीं करता, मेरे लिए प्रजा के धन का उपयोग निजी हित के लिए करना उचित नहीं होगा।

इन शब्दों को सुनते ही उस आगंतुक का सिर निष्ठा से आचार्य कि और झुक गया।

तो साथियों आचार्य चाणक्य की कर्तव्य परायणता, ईमानदारी को देखकर हमें यह सीख मिलती है कि जिस राष्ट्र के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन व्यक्ति इस तरह अपने कार्य के प्रति कर्तव्यनिष्ठ एवं इमानदार हो जिनका उद्देश्य मात्र जन सेवा करना हो उस राज्य का भला होना निश्चित है।

आचार्य चाणक्य सुविचार

तो साथियों अब हम आपके साथ इस लेख में चाणक्य द्वारा कही गई कुछ अनमोल सुविचारों को शेयर कर रहे हैं। आशा है आपकी जिंदगी में चाणक्य द्वारा कही गई इन बातों से आपको काफी कुछ सीखने को मिलेगा।

Acharya Chanakya Quotes in Hindi

बुद्धिमान व्यक्ति का असली परीक्षण संकट के समय में होता है। क्योंकि संकट की स्थिति में आपकी बुद्धि ही आपको उस परिस्थिति से निकालने में काम आती है।


आचार्य चाणक्य स्टेटस हिंदी में

ज्ञान के बिना इस दुनिया में किसी भी धन का कोई मोल नहीं और भूख से बड़ा इस दुनिया में कोई भी शत्रु नहीं!!


आचार्य चाणक्य जी के कड़वे वचन

किसी भी कार्य को अंजाम देने से पूर्व खुद से एक बार यह प्रश्न जरूर पूछें? मैं यह काम क्यों कर रहा हूं? इसका परिणाम क्या होगा? और क्या इस कार्य में सफल हो पाऊंगा।


आचार्य चाणक्य नीति

जो व्यक्ति स्वयं में श्रेष्ठ होता है वह दूसरों को भी अपने समान ही मानता हैज जबकि अहंकारी व्यक्ति दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करता है।


आचार्य चाणक्य के अनमोल वचन

अपने राज कभी भी किसी के दूसरों के सामने ना खोलें क्योंकि वक्त आने पर वह आपके राज किसी के भी सामने खोल कर आप को सबसे बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है!


आचार्य चाणक्य के प्रेरणादायक विचार

बुद्धिमान व्यक्ति यदि किसी मूर्ख को समझाने का प्रयत्न कर रहा है, तो समझ ले बुद्धिमान व्यक्ति खुद अपने पैरों में कुल्हाड़ी मारने का कार्य कर रहा है।


Acharya Chanakya Niti for Motivation in Hindi

मन में सोचे हुए कार्यों को किसी को बताना: स्वयं खुद का मजाक बनाना है। अतः मन में जिस चीज को आप ने ठान लिया है उसे मन ही मन पूरी शिद्दत के साथ पूरा करने में लग जाओ।


Acharya Chanakya Niti for Success in Life in Hindi

अपने लक्ष्यों को पाने के लिए कभी भी किसी शत्रु के सामने मदद न लें, वरना पाया गया लक्ष्य आपको जीवन भर तकलीफ दे सकता है।


Acharya chanakya Thoughts in Hindi

जो व्यक्ति समय की कदर नहीं करता वह कभी भी अपने जीवन के प्रति सचेत नहीं रहता।


आचार्य चाणक्य के सुविचार

चालाक एवं कपटी व्यक्ति हमेशा अपने फायदे के लिए दूसरों की सेवा में लगे रहते हैं, अतः ऐसे व्यक्तियों का हमेशा बच कर रहे !


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चाणक्य एक महान व्यक्ति थे। इनके बारे में जितना लिखू उतना कम है। अगर आपको इनके बारे में और जानना है जैसे की चाणक्य नीति, चाणक्य के अनमोल विचार तो आप विकिपीडिया पर इनके बारे में और अच्छे से पढ़ सकते हो। अगर आपको इनके बारे में कुछ ऐसी बात पता है जो हमे जाननी चाहिए, या फिर आप इनके बारे में कुछ बोलना चाहते है तो आप कमेंट के माध्यम से हमको बता सकते हो और इस लेख को आप अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर भी कर सकते हो।

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Himanshu Grewal

मेरा नाम हिमांशु ग्रेवाल है और यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसमें आपको दुनिया भर की बहुत सारी जानकारी मिलेगी जैसे की Motivational स्टोरी, SEO, इंग्लिश स्पीकिंग, सोशल मीडिया etc. अगर आपको मेरे/साईट के बारे में और भी बहुत कुछ जानना है तो आप मेरे About us page पर आ सकते हो.

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