ईसा मसीह कौन थे, ईसा मसीह की कहानी

क्रिसमस का त्यौहार जिसका पूरा देश खूब धूम धाम से मनाता है. क्रिसमस festival को हम ईसा मसीह के जन्मदिवस की खुशी में मनाते है. अब आप यह सोच रहे होंगे की ईसा मसीह कौन थे? 

दोस्तों ईसा मसीह हमारी ही तरह एक आम इन्सान थे पर उनमे कुछ अलग बात थी एक अलग खूबी थी जिससे उनको आम नही मानती थी. ऐसे कैसे? वो हम नीचे आर्टिकल में जानेंगे. तो आईये पढना शुरू करते है.”

Biography of Isa Masih

ईसा मसीह कौन थे | Biography of Isa Masih

आज से 1992 वर्ष पूर्व 25 दिसम्बर को ईसा मसीह का जन्म यरुशलम के बेतलहम नामक गाँव में हुआ था. उनके पिता का नाम जोसफ था और माता का नाम मरियम था.

उनके माता पिता राजा के आदेश पर जनगणना के लिए यरुशलम गये थे. वे रात्रि को एक अस्तबल में ठहरे हुए थे. वहीं पर अर्द्धरात्रि में ईसू का जन्म हुआ. उनका नाम क्राइस्ट था. ईसू के जन्म होते ही उनके पिता उन्हें छिपाकर मिश्र ले गये थे.

ज्यों ज्यों ईसा बड़े होते गये उनका ध्यान सांसारिक कृतियों से हटकर ईशवर की ओर लगने लगा. तीस वर्ष की आयु में उन्हें ‘जान’ नामक महात्मा ने ज्ञान दिया. तब से वह सत्य ज्ञान के प्रचार में लग गये.

ईसा मसीह लोगों से कहते थे (ईसा मसीह का उपदेश था की) ईशवर की आराधना करो, सब मनुष्यों से प्यार करो, दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करो, जैसा तुम चाहते हो की वो तुम्हारे साथ करे. वे ह्रदय की सरलता व पवित्रता को महत्व देते थे. ईसा मसीह की लोकप्रियता के कारण कुछ लोगों को अनसे ईर्ष्या होने लगी.

उन्होंने यरूशलम में शासकों को ईसा के विरुद्ध भड़काया की ईसा घर्म व राज्य के विरुद्ध जनता को संगठित कर रहा है. फलत ईसा को प्राण दंण्ड दिया गया. उनके हाथ व पैरों में कीलें ठोककर उन्हें कूस पर लटका दिया गया.

ईसा मसीह की मृत्यु की पीड़ा के समय भी ईसा ने अपने विरोधियों के बारे में ईशवर से प्राथना करते हुए कहा (ईसा मसीह के वचन) – “प्रभु इन्हें शमा करना क्योंकि ये नही जानते की ये क्या कर रहे है.”

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ईसा मसीह कौन थे इसकी मैंने आपको पूरी जानकारी बता दी है. अगर आपको ईसा मसीह भगवान को थैंक्यू बोलना है तो आप कमेंट करके बोल सकते हो और इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ social media पर शेयर भी कर सकते हो. 🙂

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